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जावेद अख्तर ने पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को सुनाई खरी-खरी, हिंदू आबादी पर दिए बयान पर भड़केराजनीति
17 अग॰ 2026, 7:59 pm (25 दिन पहले)· 0

जावेद अख्तर ने पाक राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को सुनाई खरी-खरी, हिंदू आबादी पर दिए बयान पर भड़के

प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने देश के हिंदू अल्पसंख्यकों को 'बर्दाश्त' करने की बात कही थी। अख्तर ने उनके पुराने 'मिस्टर 10 परसेंट' वाले उपनाम पर भी तंज कसा।

प्रसिद्ध गीतकार और पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के एक हालिया बयान को लेकर तीखा विरोध जताया है। राष्ट्रपति जरदारी ने अपने देश में रहने वाले हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर जो टिप्पणी की थी, उस पर गीतकार ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इस पूरे विवाद की शुरुआत पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़े एक वीडियो के सामने आने के बाद हुई, जिसमें देश की जनसांख्यिकी और अल्पसंख्यकों की स्थिति का जिक्र किया गया था।

स्वतंत्रता दिवस समारोह का वह वीडियो

पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भारत और पाकिस्तान की हिंदू आबादी को लेकर तुलनात्मक बातें कही थीं। अपने संबोधन में उन्होंने दावा किया था कि भारत का दृष्टिकोण अलग हो सकता है, लेकिन वे अन्य पहलुओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। जरदारी ने आगे कहा था कि वे लोग मुस्लिम हैं और उनकी यह मानसिकता है कि वे अपने मुल्क की 3 से 4 प्रतिशत हिंदू आबादी को सहन करते हैं। उनके इस दावे के मुताबिक वे अल्पसंख्यक समुदाय के लोग वहां उतने ही स्वतंत्र हैं जितने किसी अन्य स्थान पर हो सकते हैं।

एक्स पर जावेद अख्तर का तीखा पलटवार

जब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस कार्यक्रम का वीडियो तेजी से वायरल हुआ, तो जावेद अख्तर ने इस पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराने में देर नहीं लगाई। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से राष्ट्रपति द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के संदर्भ में 'बर्दाश्त' जैसे शब्द के चयन की कड़ी आलोचना की। अख्तर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बेनजीर भुट्टो से विवाह के पश्चात सुर्खियों में आए मिस्टर जरदारी यह बयान देते हैं कि वे अपने देश में तीन से चार फीसदी हिंदू आबादी को सहन करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए यह भी जोड़ा कि वे इस बात को भली-भांति समझ सकते हैं कि जरदारी का रवैया हमेशा से उन सभी विषयों के प्रति बेहद असंवेदनशील रहा है जिनका आंकड़ा 10 प्रतिशत से भी कम होता है। एक्स पर साझा की गई इस प्रतिक्रिया को ऑनलाइन काफी देखा और सराहा गया है।

'मिस्टर 10 परसेंट' उपनाम का इतिहास

गीतकार द्वारा किए गए '10 प्रतिशत' वाले तंज के पीछे दशकों पुराना एक चर्चित किस्सा जुड़ा हुआ है जो आसिफ अली जरदारी के नाम के साथ गहराई से चिपका हुआ है। अस्सी के दशक के अंतिम वर्षों और नब्बे के दशक के शुरुआती दौर में जब बेनजीर भुट्टो की सरकार को बर्खास्त किया गया था, उस समय कार्यवाहक प्रधानमंत्री गुलाम मुस्तफा जटोई ने जरदारी पर कई गंभीर भ्रष्टाचार के मामले उछाले थे। उस वक्त यह आरोप लगाया गया था कि वे सरकारी ठेके दिलाने और तमाम व्यावसायिक सौदों को तय करने में 10 प्रतिशत का कमीशन वसूला करते थे। इसी पृष्ठभूमि के बाद उन्हें सार्वजनिक तौर पर 'मिस्टर 10 परसेंट' कहा जाने लगा था, हालांकि राष्ट्रपति और उनके समर्थक इन सभी आरोपों को हमेशा से सिरे से खारिज करते आए हैं।

सीमापार के मामलों पर अख्तर का मुखर रुख

यह पहला अवसर नहीं है जब जावेद अख्तर ने पड़ोसी मुल्क की नीतियों या वहां से आने वाले बयानों पर बिना किसी झिझक के अपनी राय रखी हो। इससे पहले भी वे कई बड़े मंचों से पाकिस्तान समर्थित सीमापार आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों में वहां की सरकार की उदासीनता की तीखी आलोचना कर चुके हैं। मुंबई शहर में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि भारत ने हमेशा से पड़ोसी देश के साथ दोस्ताना संबंध बहाल करने और सांस्कृतिक मेलजोल को आगे बढ़ाने की ईमानदार कोशिशें की हैं, लेकिन रिश्ते सुधारने के लिए दोनों पक्षों की तरफ से समान प्रयास होने चाहिए जो कभी देखने को नहीं मिले।

बयान के बाद बढ़ती वैश्विक चर्चा

पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया गया है और उसके जवाब में जावेद अख्तर ने जिस बेबाकी से अपनी बात रखी है, उसकी गूंज सोशल मीडिया से लेकर हर तरफ सुनाई दे रही है। एक तरफ जहां दुनिया भर में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, गरिमा और अधिकारों को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं, वहीं इस तीखे और त्वरित जवाब को आम जनता का भरपूर समर्थन मिल रहा है।

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सवाल-जवाब

जावेद अख्तर ने किस बयान पर आपत्ति जताई है?
जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के उस बयान पर आपत्ति जताई जिसमें उन्होंने देश के हिंदू अल्पसंख्यकों को 'बर्दाश्त' करने की बात कही थी।
आसिफ अली जरदारी ने अपने भाषण में क्या कहा था?
जरदारी ने दावा किया था कि उनकी मानसिकता ऐसी है कि वे अपने देश में तीन से चार प्रतिशत हिंदू आबादी को सहन करते हैं।
जावेद अख्तर ने अपनी प्रतिक्रिया कहां साझा की?
जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट लिखकर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।
'मिस्टर 10 परसेंट' उपनाम का संबंध किससे है?
यह उपनाम 1980 और 1990 के दशक में आसिफ अली जरदारी पर लगे भ्रष्टाचार और सरकारी ठेकों में कमीशन मांगने के आरोपों से जुड़ा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·24 दिन पहले

पाकिस्तानी राष्ट्रपति के इस बयान ने अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जहाँ 'सहन करने' जैसे शब्दों का प्रयोग गहरी मानसिकता को उजागर करता है। जावेद अख्तर का यह तीखा और तथ्यात्मक तंज, जिसमें उनके पुराने राजनीतिक इतिहास की ओर इशारा किया गया है, सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। इस तरह की बयानबाजी से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पड़ोसी देश की वैचारिक संकीर्णता और अल्पसंख्यकों की वास्तविक स्थिति खुलकर सामने आती है, जिसका असर कूटनीतिक और सामाजिक स्तर पर लंबे समय तक देखा जा सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

पाकिस्तानी राष्ट्रपति के इस बयान से वहां की आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता का एक और पहलू उजागर होता है, जो वैश्विक मंच पर देश की छवि और विदेशी निवेशकों के भरोसे को सीधे प्रभावित करता है। अल्पसंख्यकों के प्रति इस तरह की असंवेदनशील सोच और ऐतिहासिक भ्रष्टाचार के दाग देश के अंदरूनी आर्थिक सुधारों और डिजिटल एसेट्स व वैश्विक व्यापार में भागीदारी की संभावनाओं को भी सीमित करते हैं।

Riya Menon@riya-menon·24 दिन पहले

पाकिस्तानी नेतृत्व की यह संकीर्ण मानसिकता न केवल उनकी सामाजिक ताने-बाने की कमजोरी को दर्शाती है, बल्कि इससे वैश्विक स्तर पर सांस्कृतिक अलगाव का खतरा भी बढ़ता है। जब किसी राष्ट्र में अल्पसंख्यकों को मात्र 'सहन' करने का दृष्टिकोण रखा जाता है, तो वह समाज अंतरराष्ट्रीय समुदाय में अपनी साख खो बैठता है और विदेशी निवेश तथा आर्थिक विकास की मुख्यधारा से पिछड़ जाता है। ऐसी नीतियां देश के भीतर और बाहर दोनों जगह गहरा अविश्वास पैदा करती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

पाकिस्तानी राष्ट्रपति का अल्पसंख्यकों को 'बर्दाश्त' करने वाला बयान और उस पर जावेद अख्तर की यह तीखी प्रतिक्रिया राजनीतिक संवेदनशीलता और कूटनीतिक दायरे से परे मानवाधिकारों के हनन को उजागर करती है। किसी भी संप्रभु राष्ट्र के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग सार्वजनिक सुरक्षा, धार्मिक स्वतंत्रता और सह-अस्तित्व की मूल अवधारणा पर सीधा सवालिया निशान लगाता है। इस घटनाक्रम से सीमापार कूटनीतिक तनाव के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वहां की न्याय व्यवस्था और अल्पसंख्यक सुरक्षा की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े होने तय हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

पाकिस्तानी राष्ट्रपति के इस बयान और उस पर उपजी तीखी ऑनलाइन प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि कूटनीतिक मंचों पर अल्पसंख्यकों के अधिकारों का मुद्दा अब और अधिक आक्रामक तरीके से उठाया जाएगा। राष्ट्राध्यक्ष के स्तर पर इस तरह की बयानबाजी से वैश्विक पटल पर पड़ोसी देश की धर्मनिरपेक्षता और आंतरिक सुरक्षा के दावों की पोल खुलती है। इससे अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के बीच पड़ोसी मुल्क में धार्मिक अल्पसंख्यकों की गिरती सुरक्षा और उनके मानवीय अधिकारों पर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ने की पूरी संभावना है।

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