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केरल चुनाव में करारी शिकस्त के बाद सीपीआई(एम) में मंथन, क्या समीक्षा बैठक में पिनाराई विजयन के नेतृत्व पर उठेंगे सवाल?राजनीति
10 अग॰ 2026, 5:18 pm (77 दिन पहले)· 0

केरल चुनाव में करारी शिकस्त के बाद सीपीआई(एम) में मंथन, क्या समीक्षा बैठक में पिनाराई विजयन के नेतृत्व पर उठेंगे सवाल?

केरल विधानसभा चुनाव के तीन महीने बाद भी वाम मोर्चा अपनी हार की वजहों की पड़ताल कर रहा है। 140 सीटों वाले सदन में एलडीएफ 99 से गिरकर 35 पर आ गया है और अब आगामी राज्य समिति बैठक में समीक्षा की तैयारी है।

केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे आए तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-एम) के भीतर हार की वजहों की तलाश अब भी जारी है। पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) इस विश्वास के साथ चुनाव मैदान में उतरा था कि वह केरल की राजनीति में लगातार तीसरी बार सरकार बनाकर नया इतिहास रचेगा। हालांकि, राज्य के मतदाताओं ने इस उम्मीद को पूरी तरह खारिज कर दिया और सत्ता की बाजी कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) के पक्ष में मोड़ दी।

विधानसभा में बदला सीटों का गणित

केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में इस चुनाव ने राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है। वर्ष 2021 के चुनाव में 99 सीटें जीतने वाला एलडीएफ इस बार मात्र 35 सीटों पर सिमट कर रह गया है। दूसरी ओर, यूडीएफ ने प्रचंड बहुमत हासिल कर नई सरकार का गठन किया है। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। वर्ष 2021 में शून्य पर रहने वाली भाजपा इस बार 3 सीटें हासिल करने में सफल रही है।

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कन्नूर के गढ़ में सेंध और अजीब चुनावी समीकरण

सीपीआई(एम) के लिए सबसे असहज करने वाली बात यह रही कि उसके तीन दिग्गज नेता अपनी सीटें बचाने में केवल इसलिए सफल रहे क्योंकि उनके खिलाफ यूडीएफ ने अपने उम्मीदवार ही नहीं उतारे थे। इनमें से दो सीटें कन्नूर जिले में आती हैं, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का सबसे मजबूत राजनीतिक दुर्ग माना जाता रहा है। इस घटनाक्रम को वामपंथी किले की दीवारों में आई बड़ी दरार के रूप में देखा जा रहा है।

विजयन के नेतृत्व की समीक्षा पर राष्ट्रीय नेतृत्व का रुख

पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव परिणामों के विश्लेषण से पूर्व मुख्यमंत्री विजयन के नेतृत्व को अलग नहीं रखा जा सकता। एक समय पार्टी के भीतर विजयन के फैसलों पर सवाल उठाना नामुमकिन माना जाता था और उसकी तुलना कन्नूर के मौसम पर बहस करने से की जाती थी। अब पार्टी के अंदर ही माहौल बदल रहा है और नेतृत्व शैली पर खुलकर चर्चा हो रही है।

सोशल मीडिया पर विपक्ष की भूमिका और आगामी बैठक

हार के बावजूद विजयन का खेमा चुप बैठने को तैयार नहीं है। उनका सोशल मीडिया तंत्र नई वीडी सतीशन सरकार के हर प्रशासनिक फैसले, बाढ़ प्रबंधन और सरकारी कमियों की लगातार आलोचना कर रहा है। सोशल मीडिया अभियानों में यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि विजयन के शासनकाल में स्थिति बेहतर थी। हालांकि, अगले महीने होने वाली तीन दिवसीय सीपीआई(एम) राज्य समिति की समीक्षा बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। इस बैठक में हार के कारणों की गहन पड़ताल की जाएगी और सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या पिनाराई विजयन की कार्यशैली और नेतृत्व की भी निष्पक्ष समीक्षा की जाएगी।

सवाल-जवाब

केरल विधानसभा चुनाव में एलडीएफ को कितनी सीटें मिलीं?
140 सदस्यों वाली विधानसभा में एलडीएफ की सीटें 99 से घटकर 35 रह गईं।
केरल चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहा?
भाजपा ने केरल विधानसभा में वापसी करते हुए 3 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि 2021 में उसे एक भी सीट नहीं मिली थी।
कन्नूर जिले की सीटों पर क्या स्थिति देखने को मिली?
सीपीआई(एम) के तीन दिग्गज नेताओं की सीटों पर यूडीएफ ने उम्मीदवार नहीं उतारे, जिनमें से दो सीटें पूर्व मुख्यमंत्री विजयन के गढ़ कन्नूर की हैं।
सीपीआई(एम) की समीक्षा बैठक कब होने वाली है?
अगले महीने सीपीआई(एम) की तीन दिवसीय राज्य समिति की बैठक आयोजित होगी, जिसमें चुनावी हार और नेतृत्व की समीक्षा की जाएगी।
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