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आम आदमी पार्टी में नजरअंदाज हुए खेल संबंधी सुझाव तो हरभजन सिंह ने थामा बीजेपी का दामन, गद्दार कहे जाने पर भी दिया करारा जवाबराजनीति
13 अग॰ 2026, 5:13 pm (3 घंटे पहले)· 2

आम आदमी पार्टी में नजरअंदाज हुए खेल संबंधी सुझाव तो हरभजन सिंह ने थामा बीजेपी का दामन, गद्दार कहे जाने पर भी दिया करारा जवाब

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के अपने फैसले पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने कहा कि पार्टी में खेल विकास से जुड़े उनके विचारों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने के अपने फैसले पर सार्वजनिक रूप से स्थिति साफ की है। एक विस्तृत पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान 46 वर्षीय हरभजन सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम राजनीति की वजह से नहीं, बल्कि खेल विकास को लेकर दी गई अपनी सलाह को लगातार नजरअंदाज किए जाने के कारण उठाया। उन्होंने बताया कि जिस मूल उद्देश्य को लेकर उन्होंने संसदीय जीवन में कदम रखा था, वह पुरानी पार्टी में पूरा होता नहीं दिख रहा था।

खेल विकास के प्रस्तावों को नहीं मिली तवज्जो

हरभजन सिंह के अनुसार, वर्ष 2022 में जब पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उन्हें आम आदमी पार्टी से जुड़ने का निमंत्रण दिया था, तब उन्होंने पहले ही दिन अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी थीं। उन्होंने नेतृत्व से साफ कहा था कि वह राजनीति करने या राजनीतिक बहसों में शामिल होने के लिए नहीं आ रहे हैं, बल्कि उनका एकमात्र ध्यान राज्यसभा के जरिए देश और राज्य में खेलों के ढांचे को मजबूत करने पर रहेगा।

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हालांकि, समय बीतने के साथ स्थिति वैसी नहीं रही जैसी उन्होंने सोची थी। हरभजन सिंह ने खुलासा किया कि उन्होंने जमीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देने के लिए पार्टी नेतृत्व को कई व्यावहारिक सुझाव दिए थे। लेकिन इन प्रस्तावों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि उनके विचार सिर्फ कागजों और बैठकों तक ही सीमित रह गए। यदि उनकी योजनाओं की दिशा में एक छोटा-सा सकारात्मक कदम भी उठाया गया होता, तो उन्हें दल बदलने की नौबत कभी नहीं आती।

विरोध प्रदर्शन और गद्दार के आरोपों पर पलटवार

पार्टी छोड़ने के बाद आम आदमी पार्टी के नेताओं द्वारा उन्हें और अन्य सहयोगियों को 'विश्वासघाती' करार दिए जाने पर हरभजन सिंह ने गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया। इस फैसले के बाद जालंधर स्थित उनके आवास के बाहर प्रदर्शन किए गए थे, नारेबाजी हुई थी और उनका पुतला भी फूंका गया था।

इन प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए पूर्व फिरकी गेंदबाज ने कहा कि वह किसी का नाम लेकर मामले को तूल नहीं देना चाहते, क्योंकि हर कोई जानता है कि उन प्रदर्शनों के पीछे कौन से लोग शामिल थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस आम जनता ने एक क्रिकेटर के रूप में उन्हें वर्षों तक भरपूर प्यार और सम्मान दिया, वह अचानक उनके घर के बाहर 'गद्दार' जैसे शब्द क्यों लिखेगी? हरभजन सिंह ने सवालिया लहजे में पूछा कि उन्होंने आखिर किसके साथ धोखा किया है।

पंजाब के वादों पर खड़े किए सवाल

अपनी बात रखते हुए हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी के नेतृत्व पर सीधा पलटवार किया और पंजाब की जनता से किए गए वादों की याद दिलाई। उन्होंने सवाल किया कि चुनाव के समय राज्य के लोगों से जो बड़े-बड़े दावे और वादे किए गए थे, उनका क्या हुआ? उन्होंने पूछा कि वास्तव में पंजाब की बेहतरी के लिए क्या काम किया गया है और ऐसे में असली गद्दार किसे कहा जाना चाहिए।

हरभजन सिंह ने जोर देकर कहा कि केवल किसी पर आरोप लगा देने या 'गद्दार' की तख्ती टांग देने से कोई देशभक्त देशद्रोही नहीं बन जाता। उन्होंने कहा कि उनका दिल सदैव भारत और पंजाब के लिए धड़कता है और अपनी देशभक्ति या निष्ठा को साबित करने के लिए उन्हें किसी भी राजनीतिक दल के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है।

राजनीतिक घटनाक्रम का पृष्ठभूमि विवरण

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने वर्ष 2022 में हरभजन सिंह को उच्च सदन यानी राज्यसभा में भेजा था। हालांकि, लंबे समय तक चले वैचारिक असंतोष के बाद अप्रैल 2026 में हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी से अपना नाता तोड़ लिया और छह अन्य नेताओं के साथ औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली।

सवाल-जवाब

हरभजन सिंह ने AAP छोड़कर BJP में शामिल होने का क्या कारण बताया?
उन्होंने बताया कि खेल विकास से जुड़े उनके सुझावों को पार्टी में गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था और जिस उद्देश्य से वे राज्यसभा में आए थे, वह पूरा नहीं हो रहा था।
हरभजन सिंह किस वर्ष राजनीति में आए और उन्हें किसने आमंत्रित किया था?
हरभजन सिंह 2022 में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के निमंत्रण पर आम आदमी पार्टी में शामिल हुए थे।
हरभजन सिंह ने जालंधर में हुए विरोध प्रदर्शनों पर क्या कहा?
उन्होंने अपने जालंधर स्थित घर के बाहर प्रदर्शन और 'गद्दार' लिखे जाने पर सवाल उठाया कि क्रिकेट की वजह से प्यार देने वाली जनता ऐसा नहीं करेगी और पूछा कि उन्होंने किसे धोखा दिया है।
हरभजन सिंह किस महीने और वर्ष में BJP में शामिल हुए?
हरभजन सिंह अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी के छह अन्य नेताओं के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Rohan Verma@rohan-verma·21 मिनट पहले

हरभजन सिंह का यह कदम पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति में आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। खेल और युवाओं से जुड़ा मुद्दा उठाने से राज्य के ग्रामीण और शहरी मतदाताओं पर असर पड़ना तय है। आने वाले दिनों में यह घटनाक्रम चुनावी समीकरणों और क्षेत्रीय दलों की रणनीति को कैसे प्रभावित करता है, यह देखना बेहद अहम होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 मिनट पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला अब केवल राजनीतिक दल बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक मंचों पर इस तरह के व्यक्तिगत विरोध और 'गद्दार' जैसे गंभीर आरोपों के बाद कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा का नया मुद्दा बन गया है। जालंधर स्थित आवास के बाहर प्रदर्शन और पुतला दहन जैसी घटनाओं से राजनीतिक तनाव बढ़ने का जोखिम है। यदि इस पर तुरंत प्रशासनिक संयम नहीं बरता गया, तो यह विवाद राज्य के अन्य हिस्सों में भी विधि-व्यवस्था की स्थिति को प्रभावित कर सकता है, जिस पर सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन की पैनी नजर रहनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

हरभजन सिंह का यह कदम पंजाब की क्षेत्रीय राजनीति में आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा वैचारिक झटका है। खेल के बुनियादी ढांचे और ज़मीनी स्तर पर विकास के मुद्दों को दरकिनार किए जाने का यह मामला स्पष्ट करता है कि राजनीतिक दलों में पेशेवर और गैर-राजनीतिक विशेषज्ञों को शामिल करने के बाद भी नीतिगत मामलों में समन्वय की कमी बनी रहती है। आगामी राजनीतिक समीकरणों और चुनाव की दृष्टि से यह देखना अहम होगा कि भाजपा उनके इस अनुभव का किस प्रकार उपयोग करती है और इसका राज्य के मतदाताओं पर कितना असर पड़ता है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

हरभजन सिंह का आम आदमी पार्टी से भारतीय जनता पार्टी में जाना और खेल नीति की उपेक्षा का आरोप लगाना पंजाब के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ रहा है। एक तरफ जहां इसे क्षेत्रीय सत्ता समीकरणों में बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी खड़ा होता है कि राजनीतिक दल पेशेवर और गैर-राजनीतिक चेहरों को सिर्फ प्रतीकात्मक रूप से जोड़ते हैं या नीतिगत निर्णयों में उन्हें वास्तविक स्वायत्तता भी देते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा उनके इस अनुभव का इस्तेमाल पंजाब के चुनावी मैदान में किस तरह करती है और इससे क्षेत्रीय राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

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