महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर हलचल मची हुई है। "ऑपरेशन टाइगर" और "ऑपरेशन तुतारी" नाम के दो सियासी शब्द इन दिनों सुर्खियों में हैं। एक तरफ विपक्ष के कुछ नेताओं के महायुति खेमे में जाने की चर्चाएं गर्म हैं, तो दूसरी तरफ शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी में संभावित टूट और पार्टी के भविष्य को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। कहा तो यहां तक जा रहा है कि पार्टी को टूटने से बचाने के लिए कांग्रेस में विलय से लेकर एनडीए को समर्थन देने तक के विकल्पों पर भीतरखाने मंथन चल रहा है। हालांकि एनसीपी (शरद पवार) और कांग्रेस, दोनों ने ही इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जबकि बीजेपी ने विपक्षी विधायकों और सांसदों के राजनीतिक भविष्य का हवाला देते हुए इन दावों को सिरे से नकारा नहीं है। यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब महाराष्ट्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों तरफ सियासी समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं।
'ऑपरेशन तुतारी' को लेकर क्यों मची है हलचल
महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों "ऑपरेशन तुतारी" सबसे बड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। राजनीतिक गलियारों में दावा किया जा रहा है कि शरद पवार की एनसीपी में टूट की आशंका के बीच पार्टी अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर कई विकल्पों पर विचार कर रही है। एक तरफ कांग्रेस में विलय की संभावना पर मंथन की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ एनडीए को अंदर या बाहर से समर्थन देने या फिर सीधे गठबंधन में शामिल होने जैसे विकल्प भी टटोले जाने की चर्चा है। गौर करने वाली बात यह है कि यह पूरी अटकलबाजी ऐसे समय शुरू हुई है, जब विपक्षी खेमे के कुछ नेताओं के महायुति की ओर रुख करने की खबरें भी साथ-साथ चल रही हैं, जिससे यह चर्चा और तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।
सुप्रिया सुले को केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी का दावा
सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि कांग्रेस और बीजेपी, दोनों के सामने कुछ प्रस्ताव रखे गए हैं। इनमें सुप्रिया सुले को केंद्र में अहम जिम्मेदारी सौंपे जाने के साथ-साथ पार्टी के अन्य नेताओं को भी केंद्र या महाराष्ट्र में महत्वपूर्ण पद दिए जाने की बातें शामिल बताई जा रही हैं। इन कथित प्रस्तावों के पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि पार्टी को टूटने से बचाने और नेताओं को राजनीतिक रूप से संतुष्ट रखने के लिए ऐसी पेशकश की जा सकती है। लेकिन चूंकि इनमें से किसी भी दावे की किसी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है, इसलिए यह सारी जानकारी फिलहाल दावों और कयासों के दायरे तक ही सीमित मानी जा सकती है।
'पार्टी पूरी तरह एकजुट है', शशिकांत शिंदे का जवाब
इन तमाम अटकलों पर महाराष्ट्र एनसीपी (शरद पवार) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने साफ शब्दों में सफाई दी। उन्होंने कहा कि न तो कांग्रेस में विलय को लेकर कोई चर्चा हुई है और न ही एनडीए को अंदर या बाहर से समर्थन देने का कोई प्रस्ताव पार्टी के सामने है। शिंदे के मुताबिक एनसीपी (शरद पवार) एक स्वतंत्र पार्टी है, जिसकी अपनी अलग विचारधारा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है, न कोई विधायक और न ही कोई सांसद पार्टी छोड़ने की बात कर रहा है, और न ही किसी की कांग्रेस या एनडीए के साथ जाने की कोई इच्छा है।
नाना पटोले बोले, विलय का कोई प्रस्ताव नहीं
इसी बीच कांग्रेस ने भी इन अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया। महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने बताया कि जब वह 2024 में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब लोकसभा चुनाव से पहले इस तरह का एक प्रस्ताव जरूर सामने आया था, लेकिन उस पर आगे कोई बात नहीं बढ़ी। पटोले ने साफ किया कि फिलहाल कांग्रेस के पास एनसीपी (शरद पवार) के विलय को लेकर कोई प्रस्ताव नहीं है और इस तरह की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है।
आदित्य ठाकरे का दावा, यह 'ऑपरेशन देवेंद्र' है
शिवसेना (यूबीटी) के नेता आदित्य ठाकरे ने पूरे घटनाक्रम को बिल्कुल अलग नजरिए से देखा। उनका कहना है कि यह न तो ऑपरेशन टाइगर है और न ऑपरेशन तुतारी, बल्कि यह असल में "ऑपरेशन देवेंद्र" है। ठाकरे के मुताबिक महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस को कमजोर करने और उनका राजनीतिक कद घटाने के मकसद से ही विपक्षी दलों को तोड़ने की कोशिश की जा रही है।
चंद्रशेखर बावनकुले ने विपक्ष के नेतृत्व पर उठाए सवाल
वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता और कैबिनेट मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने विपक्षी दलों के नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने कहा कि चाहे शिवसेना (यूबीटी) हो या शरद पवार की एनसीपी, दोनों ही जगह नेतृत्व की कमी साफ नजर आ रही है। बावनकुले ने यह भी कहा कि शरद पवार की बढ़ती उम्र की वजह से पार्टी के विधायक और सांसद अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर नए विकल्प तलाशने लगे हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई जनप्रतिनिधि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और विकास के एजेंडे से प्रभावित होकर एनडीए में शामिल होना चाहता है, तो बीजेपी को इसमें कोई आपत्ति नहीं है।
अब आगे क्या, सबकी नजर आने वाले दिनों पर
फिलहाल "ऑपरेशन तुतारी" को लेकर दावे और जवाबी दावे लगातार सामने आ रहे हैं। एक तरफ एनसीपी (शरद पवार) और कांग्रेस इन सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर रही हैं, तो दूसरी तरफ बीजेपी विपक्षी दलों के भीतर नेतृत्व संकट होने का दावा कर रही है। ऐसे में अब सबकी निगाहें आने वाले दिनों पर टिकी हैं, क्योंकि महाराष्ट्र की राजनीति में आगे किस करवट बैठेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।













