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मल्लिकार्जुन खरगे से दलित दूल्हों के घोड़े तक, राहुल गांधी ने उठाए भेदभाव और छुआछूत के मुद्देराजनीति
29 अग॰ 2026, 2:47 pm (1 घंटे पहले)· 1

मल्लिकार्जुन खरगे से दलित दूल्हों के घोड़े तक, राहुल गांधी ने उठाए भेदभाव और छुआछूत के मुद्दे

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा और आरएसएस की विचारधारा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने देश में दलितों के खिलाफ जारी भेदभाव, छुआछूत और हालिया शुद्धिकरण विवादों पर गहरी चिंता जताते हुए न्याय की मांग की।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा प्रहार किया। इस दौरान उन्होंने देश के भीतर दलितों के साथ होने वाले कथित भेदभाव, सामाजिक अत्याचार और वैचारिक संघर्ष के विभिन्न पहलुओं को खुलकर सामने रखा। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान समय में देश के भीतर दो विपरीत विचारधाराओं के बीच सीधी लड़ाई छिड़ी हुई है। एक तरफ जहां देश का संविधान खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वैचारिक धारा काम कर रही है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े शुद्धिकरण विवाद का विशेष रूप से उल्लेख किया और इस मामले में कानून के तहत कड़ी कार्रवाई तथा इंसाफ की पुरजोर मांग उठाई।

संविधान निर्माताओं के मूल्यों पर जोर और वैचारिक टकराव

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में विस्तार से बताया कि भारत का संविधान डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान विभूतियों की मूल विचारधारा का सच्चा प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने समझाया कि देश में चल रहे मौजूदा राजनीतिक संघर्ष को महज़ सत्ता की लड़ाई नहीं बल्कि इसी गहरे वैचारिक टकराव के रूप में देखा जाना बेहद आवश्यक है। दलितों के साथ समाज में हो रहे भेदभाव के कई गंभीर उदाहरण गिनाते हुए उन्होंने कहा कि भले ही देश के संविधान ने छुआछूत और सामाजिक असमानता को पूरी तरह से गैरकानूनी घोषित कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद समाज के कई हिस्सों में ऐसी अमानवीय घटनाएं आज भी खुलकर देखने को मिलती हैं।

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शिक्षा संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर भेदभाव

दलित बच्चों के साथ स्कूलों में होने वाले सलूक का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कुछ शिक्षण संस्थानों में आज भी दलित बच्चों से जबरन टॉयलेट साफ करवाए जाते हैं और उनसे झाड़ू-पोछा कराया जाता है। इस तरह की दर्दनाक घटनाओं का मासूम बच्चों के कोमल मानसिक विकास और आने वाली पीढ़ियों की सोच पर बेहद गंभीर और नकारात्मक असर पड़ता है। इसके अलावा उन्होंने गांवों के भीतर पानी के तमाम स्रोतों के इस्तेमाल को लेकर भी कड़ा भेदभाव बरते जाने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई स्थानों पर दलित समुदायों के लोगों को सार्वजनिक कुओं से पीने का पानी लेने की बिल्कुल अनुमति नहीं दी जाती है, जिसके कारण उन्हें अपनी दैनिक जरूरतों के लिए अलग से व्यवस्था करने के वास्ते मजबूर होना पड़ता है.

चाय की दुकानों और बारात की परंपराओं पर पाबंदियां

भेदभाव के अन्य रूपों को उजागर करते हुए उन्होंने ग्रामीण और शहरी इलाकों की चाय की दुकानों पर कथित तौर पर रखे जाने वाले अलग-अलग कपों का विशेष रूप से जिक्र किया। उनके मुताबिक देश के कुछ स्थानों पर दलितों के लिए विशेष रूप से ऐसे सस्ते कप इस्तेमाल किए जाते हैं जिन्हें उपयोग के तुरंत बाद फेंक दिया जाता है, जबकि अन्य सवर्ण या सामान्य लोगों को कांच के साफ कप दिए जाते हैं। इसके साथ ही कांग्रेस नेता ने शादियों और बारात के दौरान दलित दूल्हों के घोड़े पर चढ़ने को लेकर होने वाली कथित हिंसा का भी कड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आज भी देश के कई हिस्सों में दलित दूल्हों को घोड़ी पर बैठने से रोका जाता है और यदि वे इसका विरोध करते हैं, तो उनके साथ बुरी तरह मारपीट की जाती है.

उत्तर भारत के राज्यों में फैली सामाजिक विकृतियां

राहुल गांधी ने साफ शब्दों में कहा कि यह समस्या केवल देश के किसी एक छोटे इलाके तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर भारत के तमाम शहरों और गांवों में ऐसी घटनाएं बड़े पैमाने पर देखने को मिलती हैं। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी और उसकी सहयोगी ताकतें कभी नहीं चाहती हैं कि देश का दलित समाज किसी भी क्षेत्र में आगे बढ़े। उन्होंने दावा किया कि समाज में दलित व्यक्ति जितना अधिक सफल और संपन्न बनता जाता है, उसके खिलाफ उतनी ही बड़ी साजिश रची जाती है और उस पर हमले किए जाते हैं। हालांकि, उनके इन तमाम तीखे राजनीतिक और सामाजिक आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी की तरफ से क्या प्रतिक्रिया आई है, वह इस पूरी खबर में फिलहाल उपलब्ध नहीं है.

राजस्थान और उत्तराखंड के शुद्धिकरण विवाद

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने विशेष रूप से राजस्थान और उत्तराखंड राज्यों से जुड़े कथित शुद्धिकरण के मामलों का भी पर्दाफाश किया। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के विधायक दल के नेता के एक मंदिर में प्रवेश करने के तुरंत बाद वहां के भाजपा नेताओं द्वारा बाकायदा शुद्धिकरण की रस्म पूरी की गई। उन्होंने इस पूरी गतिविधि को सीधे तौर पर छुआछूत का एक नया रूप करार दिया और कहा कि इस तरह की अपमानजनक गतिविधियां देश के संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ हैं। इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान की एक घटना का भी हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि खरगे के वहां पहुंचकर भाषण देने के ठीक बाद मंदिर या मंच परिसर में शुद्धिकरण की रस्म निभाई गई.

संविधान के खिलाफ कृत्यों पर कार्रवाई की मांग

राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे ने अपना पूरा जीवन देश की सेवा और संविधान को समर्पित कर दिया है, और उनके जैसे वरिष्ठ नेता के साथ इस प्रकार का घृणित व्यवहार किया जाना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी सम्मानित व्यक्ति के मंदिर जाने के बाद उस पूरे परिसर का शुद्धिकरण किया जाता है, तो इसका स्पष्ट अर्थ यही निकाला जाएगा कि उस विशिष्ट व्यक्ति को अशुद्ध माना जा रहा है। इसे खुला छुआछूत बताते हुए उन्होंने याद दिलाया कि भारतीय संविधान के तहत छुआछूत को एक संज्ञेय अपराध घोषित किया गया है। उनके अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष खरगे 8 अगस्त को मंदिर गए थे, 10 अगस्त को वहां कथित तौर पर शुद्धिकरण किया गया और 13 अगस्त को खरगे ने खुद इसे सार्वजनिक रूप से अपराध करार दिया था। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तराखंड के एक भाजपा नेता ने कथित तौर पर इस शुद्धिकरण के कृत्य को सही ठहराने का काम किया था, जिसके बाद उन्होंने इस पूरे मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई.

एफआईआर में देरी और सामाजिक यथार्थ

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि इस पूरी घटना को बीते हुए करीब 20 दिन का लंबा समय बीत चुका है, लेकिन इसके बावजूद जिन लोगों ने कथित तौर पर यह शर्मनाक कृत्य किया है, उनके खिलाफ अब तक जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी। राहुल गांधी ने बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के मंदिर जाने के दौरान हुए कथित भेदभाव का भी विशेष उल्लेख किया और दो टूक कहा कि इस तरह के मामलों को कभी भी कोई सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। उन्होंने अंत में निष्कर्ष देते हुए कहा कि दलितों के खिलाफ होने वाला भेदभाव और हिंसा केवल अतीत की भूली-बिसरी समस्या नहीं है, बल्कि आज भी समाज में मौजूद है। भले ही देश के संविधान ने कानूनन छुआछूत और भेदभाव को पूरी तरह खत्म कर दिया हो, लेकिन सामाजिक धरातल पर इसके अवशेष आज भी मजबूती से टिके हुए हैं और देश की राजनीति में संविधान तथा उसकी विरोधी विचारधाराओं के बीच संघर्ष लगातार जारी है।

सवाल-जवाब

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से किस मुद्दे पर बात की?
उन्होंने देश में दलितों के साथ हो रहे कथित भेदभाव, छुआछूत, अत्याचार और हालिया शुद्धिकरण विवादों पर मुख्य रूप से बात की।
राहुल गांधी ने किन दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई बताई है?
उन्होंने एक तरफ देश के संविधान और दूसरी तरफ भाजपा तथा आरएसएस की विचारधारा के बीच लड़ाई बताई है।
मल्लिकार्जुन खरगे से जुड़े विवाद में किस घटना का जिक्र किया गया?
उत्तराखंड के हल्द्वानी स्थित रामलीला मैदान में खरगे के भाषण के बाद कथित तौर पर शुद्धिकरण की रस्म किए जाने का मामला उठाया गया।
दलित दूल्हों से जुड़ा कौन सा मुद्दा उठाया गया?
शादी और बारात के दौरान दलित दूल्हों को घोड़े पर चढ़ने से रोके जाने और विरोध करने पर मारपीट किए जाने का मुद्दा उठाया गया।
राहुल गांधी ने किन राज्यों में शुद्धिकरण के मामलों का जिक्र किया?
उन्होंने राजस्थान और उत्तराखंड से जुड़े कथित शुद्धिकरण के मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया।
कांग्रेस अध्यक्ष खरगे किस तारीख को मंदिर गए थे?
राहुल गांधी के अनुसार कांग्रेस अध्यक्ष खरगे 8 अगस्त को मंदिर गए थे।
राहुल गांधी ने इस मामले में किस कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है?
उन्होंने इस मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की मांग की है।
बिहार के किस नेता के मंदिर जाने के दौरान भेदभाव का जिक्र किया गया?
राहुल गांधी ने बिहार के मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के मंदिर जाने के दौरान कथित भेदभाव का उल्लेख किया।
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