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CWC बैठक में हल्द्वानी विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे का छलका दर्द, 'सुंदर दिखने वाले' नेताओं की चुप्पी और अनुशासनहीनता पर उठाए गंभीर सवालराजनीति
20 अग॰ 2026, 8:18 am (1 घंटे पहले)· 1

CWC बैठक में हल्द्वानी विवाद पर मल्लिकार्जुन खरगे का छलका दर्द, 'सुंदर दिखने वाले' नेताओं की चुप्पी और अनुशासनहीनता पर उठाए गंभीर सवाल

कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की उच्चस्तरीय बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने हल्द्वानी दौरे के बाद हुए कथित शुद्धिकरण मामले पर पार्टी नेताओं की खामोशी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की। खरगे ने मीडिया में बने रहने वाले नेताओं और पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करने वालों को कड़ा संदेश दिया।

नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक के दौरान पार्टी के भीतर की आंतरिक खींचतान और असंतोष खुलकर सामने आ गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उत्तराखंड के हल्द्वानी दौरे के बाद हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम का मुद्दा उठाते हुए शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपना व्यक्तिगत दर्द साझा किया। खरगे ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इस संवेदनशील मामले पर पार्टी के कई वरिष्ठ सदस्य उनके समर्थन में मुखर होकर खड़े नहीं हुए। उन्होंने विशेष रूप से उन नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाया जो मीडिया में लगातार छाए रहते हैं और अपनी बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। खरगे के इस कड़े रुख से पार्टी के आंतरिक अनुशासन और सामूहिक प्राथमिकताओं पर नए सिरे से बहस छिड़ गई है।

हल्द्वानी शुद्धिकरण विवाद और शीर्ष नेतृत्व का दुख

विवाद की शुरुआत उत्तराखंड के हल्द्वानी में खरगे के आधिकारिक दौरे के पश्चात आयोजित एक कथित शुद्धिकरण हवन से हुई थी। कांग्रेस पार्टी ने इस घटनाक्रम की तीखी आलोचना करते हुए इसे संकीर्ण और जातिवादी मानसिकता का प्रत्यक्ष उदाहरण करार दिया था और भारतीय जनता पार्टी पर सीधे हमले बोले थे। दूसरी ओर, बीजेपी ने इस आयोजन से अपना पल्ला झाड़ते हुए इसे स्थानीय मामला बताया था। खरगे ने इससे पहले राज्यसभा के पटल पर भी इस मुद्दे को पूरी मजबूती के साथ उठाया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि वह कभी यह अपेक्षा नहीं करते कि दलित पृष्ठभूमि का होने के कारण कोई उन्हें विशेष सुरक्षा प्रदान करे, लेकिन उनके प्रस्थान के तुरंत बाद हुए इस आयोजन ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपमानित महसूस कराया। CWC की बैठक में इस मुद्दे को दोबारा उठाते हुए उन्होंने पार्टी सहयोगियों से अपनी निराशा छिपाई नहीं।

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'सुंदर दिखने वाले' नेताओं पर तंज और पार्टी अनुशासन की ताकीद

खरगे ने अपने संबोधन में बिना किसी का प्रत्यक्ष नाम लिए उन नेताओं को निशाने पर लिया जो मीडिया स्पेस का भरपूर उपयोग करते हैं। खरगे ने चुटकी लेते हुए ऐसे नेताओं को सुंदर दिखने वाले लोग कहा। उनका मानना था कि जिन्हें मीडिया में आसानी से जगह मिलती है, उन्हें सामाजिक अन्याय और पार्टी अध्यक्ष के अपमान जैसे गंभीर विषयों पर भी उसी आक्रामकता के साथ अपनी आवाज उठानी चाहिए। बात केवल हल्द्वानी तक सीमित नहीं रही, खरगे ने उन नेताओं को भी आड़े हाथों लिया जो पार्टी की आधिकारिक नीतियों से अलग जाकर सार्वजनिक बयान देते हैं या समाचार पत्रों में लेख लिखते हैं। बैठक में मौजूद पदाधिकारियों के अनुसार खरगे का संदेश बिल्कुल स्पष्ट था कि व्यक्तिगत छवि निर्माण और मीडिया में लोकप्रियता बटोरने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण सामूहिक राजनीतिक प्रतिबद्धता और पार्टी अनुशासन है।

केसी वेणुगोपाल की सफाई और संगठनात्मक प्रतिक्रिया

खरगे के तल्ख तेवरों के बीच कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक के भीतर स्थिति को संभालने का प्रयास किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी ने हल्द्वानी की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की थी और इस विषय को सार्वजनिक मंचों पर उठाया था। बैठक समाप्त होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए भी वेणुगोपाल ने दोहराया कि कथित शुद्धिकरण जैसी गतिविधियां पूरी तरह से अस्वीकार्य और निंदनीय हैं। इसके बावजूद, CWC के भीतर खरगे की ओर से व्यक्त की गई गहरी नाराजगी ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि जब पार्टी के सर्वोच्च नेता पर आघात होता है, तब वरिष्ठ पदाधिकारी एकजुट होकर एक सुर में प्रतिक्रिया क्यों नहीं दे पाते।

छात्र आंदोलन, CJP पर रणनीति और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा

बैठक में केवल सांगठनिक अनुशासन ही नहीं, बल्कि देश के भावी छात्र आंदोलनों और राजनीतिक समूहों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। NSUI के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार ने शीर्ष नेतृत्व के समक्ष अपना दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि कांग्रेस को छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) जैसे नए राजनीतिक समूहों के लिए राजनीतिक धरातल खाली नहीं छोड़ना चाहिए। यद्यपि कांग्रेस वर्तमान में CJP से रणनीतिक दूरी बनाए हुए है, लेकिन वह छात्र आंदोलनों और रोजगार के प्रश्नों पर अपनी सक्रिय उपस्थिति बनाए रखना चाहती है। CWC द्वारा पारित आधिकारिक प्रस्ताव में CJP का नाम लिए बिना यह उल्लेख किया गया कि छात्र संगठनों और एकजुट विपक्ष के निरंतर दबाव के कारण ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा। इससे यह साफ होता है कि कांग्रेस आने वाले समय में छात्र असंतोष को अपनी व्यापक चुनावी रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाने की योजना बना रही है।

राहुल गांधी की 'छात्रों की गूंज' और मनीष तिवारी से वैचारिक मतभेद

युवा आंदोलनों के संदर्भ में बोलते हुए राहुल गांधी ने अपने अभियान छात्रों की गूंज की सफलता का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह मुहिम देश भर के शिक्षार्थियों को एक मंच पर लाने में बेहद कारगर साबित हुई है। चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने देश के राजनीतिक परिदृश्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब भारत का अतीत हैं। हालांकि, राहुल गांधी ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनीष तिवारी के उस ऐतिहासिक विश्लेषण से असहमति जताई जिसमें तिवारी ने 1990 के दशक के एंटी-मंडल आंदोलन को भारत का अंतिम व्यापक छात्र आंदोलन करार दिया था। CWC के प्रस्ताव में भी आधिकारिक रूप से यह दर्ज किया गया कि छात्रों की गूंज अभियान को देश भर के युवाओं से व्यापक और सकारात्मक समर्थन प्राप्त हुआ है।

शारदा प्रस्ताव पर शशि थरूर की आपत्ति और अमेरिकी दबाव का मुद्दा

अंतरराष्ट्रीय मामलों और विदेश नीति पर चर्चा के दौरान CWC प्रस्ताव के मसौदे में इस्तेमाल किए गए शब्दों को लेकर भी तीखी बहस हुई। वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने अमेरिका के रणनीतिक दबाव से जुड़े पैराग्राफ में बुलिंग (bullying) शब्द के प्रयोग पर सैद्धांतिक आपत्ति दर्ज कराई और इसके स्थान पर किसी अन्य राजनयिक शब्द का सुझाव दिया। हालांकि मल्लिकार्जुन खरगे और कुछ अन्य नेताओं का विचार था कि यह शब्द असंसदीय नहीं है और स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है, फिर भी आम सहमति बनाते हुए अंतिम मसौदे से इस शब्द को हटा दिया गया। CWC के अंतिम प्रस्ताव में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि मोदी सरकार अमेरिकी दबाव के आगे नतमस्तक होकर भारत की कृषि सुरक्षा, ऊर्जा संप्रभुता और रणनीतिक स्वायत्तता के साथ समझौते कर रही है।

सवाल-जवाब

CWC बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या मुद्दा उठाया?
खरगे ने हल्द्वानी दौरे के बाद हुए कथित शुद्धिकरण कार्यक्रम पर पार्टी नेताओं की चुप्पी और मीडिया में सक्रिय नेताओं द्वारा समर्थन न देने पर अपना दुख व्यक्त किया।
खरगे ने 'सुंदर दिखने वाले' नेताओं से क्या तात्पर्य निकाला?
उन्होंने बिना नाम लिए उन नेताओं पर तंज कसा जो मीडिया में आसानी से जगह बना लेते हैं, लेकिन सामाजिक अन्याय और संवेदनशील मुद्दों पर मुखर होकर पार्टी के साथ खड़े नहीं होते।
छात्र आंदोलनों को लेकर CWC बैठक में क्या चर्चा हुई?
बैठक में CJP जैसे समूहों से दूरी बनाते हुए छात्र आंदोलनों को कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा बनाने और 'छात्रों की गूंज' अभियान की सफलता पर बात हुई।
CWC प्रस्ताव में अमेरिकी दबाव पर क्या कहा गया?
प्रस्ताव में चिंता जताई गई कि सरकार अमेरिकी दबाव के सामने भारत की कृषि सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक संप्रभुता से समझौता कर रही है।
शशि थरूर ने CWC प्रस्ताव के ड्राफ्ट पर क्या सुझाव दिया था?
थरूर ने अमेरिकी दबाव से जुड़े पैराग्राफ में 'bullying' शब्द के स्थान पर दूसरा शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया था, जिसे अंतिम प्रस्ताव में हटा दिया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

कांग्रेस कार्यसमिति में मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा हल्द्वानी विवाद और आंतरिक अनुशासनहीनता का मुद्दा उठाना पार्टी के भीतर नेतृत्व और वैचारिक एकजुटता पर बड़े सवाल खड़े करता है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड जैसे हिंदी पट्टी के राज्यों में जहां सामाजिक न्याय का मुद्दा चुनावी रूप से बेहद संवेदनशील है, वहां शीर्ष स्तर पर ऐसी अंतर्कलह और नेताओं की चुप्पी विपक्ष के नैरेटिव को कमजोर करती है। आगामी संगठनात्मक रणनीतियों और चुनावों के लिहाज से यह देखना अहम होगा कि आलाकमान इस नाराजगी के बाद जमीनी स्तर पर अनुशासन कैसे बहाल करता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

अपराध और सामाजिक न्याय की रिपोर्टिंग के अनुभव से यह स्पष्ट है कि इस तरह के मामलों में अंदरूनी चुप्पी और बयानबाज़ी केवल राजनीतिक खींचतान नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा के संदेश को कमज़ोर करती है। जब पार्टी के भीतर ही वैचारिक एकजुटता का अभाव दिखता है, तो ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर अपराधियों के हौसले बुलंद होने का खतरा रहता है।

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