महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को आरक्षण को लेकर उठ रही मांगों पर मीडिया के सामने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार अलग-अलग समाजों की तरफ से आरक्षण को लेकर उठाई जा रही मांगों को गंभीरता से सुनेगी, मगर इन पर कोई भी फैसला संविधान और नियमों की सीमा के भीतर रहकर ही लिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में साफ किया कि उनकी सरकार किसी दबाव में आकर या नियमों से हटकर काम नहीं करती, बल्कि हमेशा संविधान के मुताबिक चलती रही है और आगे भी इसी रास्ते पर चलेगी। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार हर पक्ष की बात सुनने को तैयार है, चाहे वह किसी भी समुदाय से जुड़ी क्यों न हो।
संविधान के दायरे में आई मांग पर ही होगा विचार
फडणवीस ने आरक्षण से जुड़ी मांगों पर फैसले का पैमाना भी साफ कर दिया। उन्होंने कहा, "यदि कोई मांग जनहित में है और संविधान के तहत है, तो उस पर विचार किया जाएगा। यदि यह संविधान के दायरे में नहीं आती है, तो इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।" यानी सरकार सिर्फ जनहित का हवाला देकर उठाई गई मांग को स्वीकार नहीं करेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि वह मांग कानूनी तौर पर टिकती है या नहीं।
मराठा और ओबीसी आरक्षण को लेकर छिड़ी है नई बहस
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय पर आई है जब मराठा समाज और अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी श्रेणी से जुड़ी आरक्षण की मांगों पर राज्य में एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इस मुद्दे पर फडणवीस ने मराठा, ओबीसी, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सहित सभी समुदायों को न्याय दिलाने की अपनी सरकार की प्रतिबद्धता भी दोहराई। उन्होंने कहा कि संविधान सरकार को हर वर्ग का ख्याल रखने का निर्देश देता है और उनकी सरकार एक समाज का हक छीनकर दूसरे समाज को देने के पक्ष में नहीं है। मुख्यमंत्री के मुताबिक अब तक सरकार ने सभी समुदायों का ध्यान रखा है और आगे भी इसी नीति पर कायम रहेगी।
मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले पर लगे आरोपों का किया बचाव
इसी बातचीत में फडणवीस से राज्य के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को लेकर भी सवाल हुआ, जिन पर एक खास समुदाय के हितों के खिलाफ काम करने के आरोप लगे थे। मुख्यमंत्री ने मंत्री बावनकुले का बचाव करते हुए समझाया कि संविधान के तहत किसी भी मंत्री के लिए यह जरूरी होता है कि उसे मिलने वाली शिकायतों और अभ्यावेदनों को जांच के लिए संबंधित विभाग तक पहुंचाया जाए। फडणवीस ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित विभाग केवल इस तरह के अभ्यावेदन के आधार पर कोई फैसला नहीं करता, बल्कि सारे साक्ष्यों की जांच के बाद ही अपना निर्णय लेता है। इस तरह उन्होंने बावनकुले पर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरी प्रक्रिया नियमों के मुताबिक ही चली है।
सालों से अदालत और आंदोलन के बीच फंसा है मराठा आरक्षण का मसला
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर विवाद मुख्य रूप से इस बात पर टिका है कि मराठा समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण किस श्रेणी के तहत और किस कानूनी आधार पर मिलना चाहिए। यह मामला बीते कई सालों से सड़कों पर आंदोलन और अदालतों में सुनवाई के बीच उलझा हुआ है, और अब तक इसका कोई स्थायी हल नहीं निकल पाया है। फडणवीस का ताजा बयान इसी लंबे विवाद के बीच आया है, जो दिखाता है कि सरकार इस संवेदनशील मसले पर सतर्कता से आगे बढ़ना चाहती है।





















