उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां काफी तेज हो गई हैं। राज्य के तमाम प्रमुख राजनीतिक दल अपनी चुनावी बिसात बिछाने और रणनीतियों को धरातल पर उतारने में पूरी ताकत से जुट चुके हैं। एक तरफ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अपनी उपलब्धियों और लोक कल्याणकारी योजनाओं का हवाला देकर मतदाताओं के बीच पहुंच रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल बेरोजगारी, बढ़ती महंगाई, किसानों की समस्याओं, शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार की घेराबंदी करने में लगे हैं। ऐसे में मऊ जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी माहौल का जायजा लेने पर जनता की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं और बेहद तीखे सवाल सामने आ रहे हैं।
माहपुर ग्राम सभा में विकास और बुनियादी सुविधाओं पर उठे सवाल
मऊ के माहपुर ग्राम सभा के निवासी अमरुल्लाह खान ने वर्तमान सरकार के पांच साल के कार्यकाल पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि कागजों पर तो कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कार्यकाल के दौरान असली विकास कार्यों के बजाय सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया, जिससे आम जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे छूट गए। अमरुल्लाह खान के अनुसार, आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदाता केवल उन्हीं मुद्दों पर ध्यान देंगे जो उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करते हैं, जैसे कि शिक्षा का स्तर, किसानों की स्थिति, बेरोजगारी का समाधान और युवाओं का भविष्य।
शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल देते हुए अमरुल्लाह खान ने मांग की कि सरकार को निजी और सरकारी सभी विद्यालयों में एक समान शिक्षा प्रणाली लागू करनी चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी और गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों में एक जैसी सुविधाएं और शैक्षणिक ढांचा होना आवश्यक है, ताकि गरीब और अमीर परिवारों के बच्चों को एक समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो सके। वे इस बात पर जोर देते हैं कि इस बार का चुनाव मुख्य रूप से शिक्षा और युवाओं के भविष्य पर केंद्रित होगा। हालांकि, स्थानीय विधायक के संदर्भ में उन्होंने स्वीकार किया कि विधायक का सरकार में सीधा दखल या हिस्सा नहीं है, फिर भी उनका कार्यकाल निराशाजनक रहा है। क्षेत्र में विधायक की अनुपस्थिति और विकास कार्यों की कमी के कारण वे विधायक के साथ-साथ राज्य सरकार को भी बदलने के पक्ष में हैं।
बीजेपी सरकार की योजनाओं और पेंशन वृद्धि का समर्थन
इसी गांव के निवासी एहसान खान का नजरिया सरकार के कामकाज को लेकर काफी सकारात्मक है। उनका मानना है कि केंद्र और राज्य की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने आम नागरिकों, बुजुर्गों और किसानों के हित में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सराहना करते हुए कहा कि इसके तहत किसानों को सालाना 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे मिल रही है, जिससे खेती-किसानी के छोटे खर्चों में बड़ी राहत मिलती है। इसके अलावा, बुजुर्गों की पेंशन राशि बढ़ाकर 1500 रुपये प्रति माह किए जाने से वरिष्ठ नागरिकों को आर्थिक संबल प्राप्त हुआ है।
एहसान खान का कहना है कि सरकार का समग्र कार्यकाल बेहतर रहा है और यही वजह है कि 2027 के चुनाव में एक बार फिर राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने की पूरी संभावना है। उनका कहना है कि सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के सभी वर्गों के लिए कल्याणकारी नीतियां लागू कर रही है। हालांकि, सरकार का समर्थन करने के बावजूद एहसान खान ने भी स्थानीय क्षेत्र के वर्तमान विधायक के प्रदर्शन पर नाखुशी जताई। उनका कहना है कि विधायक अपने कार्यकाल के दौरान क्षेत्र में कभी नजर नहीं आए और न ही इलाके में कोई बड़ा विकास कार्य कराया गया। इसके बावजूद, राज्य स्तर पर सरकार की नीतियों से संतुष्ट होकर वे पुनः बीजेपी सरकार के गठन का समर्थन करते हैं।
महंगाई, पेपर लीक और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर गहरी चिंता
चुनाव में मुख्य मुद्दों पर बात करते हुए रुक्मान खान ने स्पष्ट किया कि 2027 के विधानसभा चुनाव में आम जनता के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बढ़ती महंगाई होगी। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में चीनी जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे घरेलू बजट पर विपरीत असर पड़ा है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा क्षेत्र की दुर्दशा और प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार होने वाले पेपर लीक के मामलों पर गहरी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इस सरकार के दौरान पेपर लीक की घटनाएं सबसे ज्यादा देखने को मिली हैं, जिससे वर्षों तक मेहनत करने वाले युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। सरकार को पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर तत्काल और कठोर रोक लगानी चाहिए।
रुक्मान खान ने यह भी कहा कि किसी भी जिम्मेदार सरकार को सरकारी अस्पतालों और सरकारी विद्यालयों की हालत सबसे बेहतर रखनी चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में इन दोनों क्षेत्रों की उपेक्षा की जा रही है। आम नागरिकों को न तो उचित स्वास्थ्य सेवाएं मिल पा रही हैं और न ही बेहतर शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध हो रही है। यही कारण है कि आगामी चुनाव में मतदान करने से पहले जनता शिक्षा, बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गंभीरता से विचार करेगी। उनका मानना है कि सरकार इन मूलभूत समस्याओं पर चर्चा करने से बच रही है, इसलिए इस बार शासन में बदलाव लाना अनिवार्य हो गया है।
युवाओं के भविष्य और गांव की उपेक्षा पर जनाक्रोश
गांव के युवा महताब आलम और शाहिद ने आगामी चुनाव में युवाओं के मुद्दों को सबसे प्राथमिकता देने की बात कही है। अपने गांव में विकास कार्यों की स्थिति पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि उनके अपने गांव माहपुर में विकास का कोई नया काम नहीं हुआ है। उनका तर्क है कि यदि उनके गांव का विकास पूरी तरह से ठप पड़ा है, तो इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि पूरे विधानसभा क्षेत्र में भी विकास की स्थिति कितनी चिंताजनक होगी।
महताब आलम और शाहिद के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव में शिक्षा, बेरोजगारी और महंगाई ही सबसे हावी रहने वाले मुद्दे साबित होंगे और इन्हीं के आधार पर नई सरकार का चयन होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार केवल कागजी दावों और विज्ञापनों में विकास कार्य दिखा रही है, जबकि धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट है। जमीनी स्तर पर महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच चुके हैं, जिससे युवा वर्ग खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।
शौचालय, आवास और मूलभूत सुविधाओं से वंचित महिलाओं की मांगें
गांव की महिला निवासियों लाली और इंद्रासिनी ने सरकार के विकास के दावों की जमीनी हकीकत उजागर की। सरकार द्वारा हर घर में शौचालय बनवाने और गरीबों को पक्के आवास मुहैया कराने के बड़े-बड़े दावों को खारिज करते हुए उन्होंने बताया कि उनके परिवार आज भी इन सरकारी योजनाओं के लाभ से पूरी तरह वंचित हैं। उन्हें न तो रहने के लिए पक्का मकान मिला है और न ही आज तक घर में शौचालय का निर्माण हो सका है, जिसके कारण उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
लाली और इंद्रासिनी ने दर्द बयान करते हुए कहा कि शौचालय की सुविधा न होने के कारण आज भी महिलाओं और परिवार के सदस्यों को खुले में बाहर जाना पड़ता है। इसके अलावा, उनके घरों तक पहुंचने के लिए न तो पक्की सड़क बनी है और ना ही घरों में बिजली की उचित व्यवस्था की गई है। बुनियादी सुविधाओं के अभाव से परेशान होकर उन्होंने निर्णय लिया है कि 2027 के चुनाव में ऐसी सरकार को चुना जाएगा जो केवल खोखले वादे न करे, बल्कि गरीबों के अधिकारों और उनकी जरूरतों के लिए ईमानदारी से धरातल पर काम करे।





















