उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब महज 6 महीने का वक्त शेष बचा है, और राज्य के विभिन्न चुनावी क्षेत्रों में राजनीतिक सुगबुगाहट चरम पर पहुंच चुकी है। चंदौली जिले के मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र, जिसे अब आधिकारिक तौर पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (पीडीडीयू नगर) के नाम से जाना जाता है, में स्थानीय विधायक रमेश जायसवाल के साढ़े 4 साल के कार्यकाल का लेखा-जोखा तैयार किया जा रहा है। शहर का नाम बदलने के बाद प्रशासनिक पहचान में तो बड़ा फेरबदल हुआ, लेकिन क्षेत्र की जमीनी तस्वीर में कितना गुणात्मक सुधार आया है, इस पर स्थानीय निवासियों की राय काफी बंटी हुई है। एक तरफ जहां ग्रामीण सड़कों के निर्माण और कनेक्टिविटी के विस्तार को लेकर संतोष जताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर जलभराव, पार्किंग, सार्वजनिक शौचालयों की कमी और ट्रैफिक जाम जैसी पुरानी नागरिक समस्याएं आज भी बनी हुई हैं।
नाम परिवर्तन और जमीन पर बदलाव की पड़ताल
पीडीडीयू नगर की पहचान देश के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शनों में से एक के रूप में रही है। मुगलसराय से पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के रूप में नया नाम मिलने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि इस ऐतिहासिक शहर की नागरिक अवसंरचना में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। साढ़े 4 वर्षों के दौरान प्रशासनिक स्तर पर कई नए प्रोजेक्ट शुरू किए गए, लेकिन शहर की बुनियादी सुविधाओं में बड़े पैमाने पर सुधार की प्रतीक्षा बनी हुई है। आगामी विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े इस क्षेत्र के मतदाता अब यह आकलन कर रहे हैं कि क्या मौजूदा जनप्रतिनिधि को एक और अवसर दिया जाना चाहिए या फिर लंबित मुद्दों को लेकर नए विकल्प तलाशे जाने चाहिए।
बाजार में पार्किंग, शौचालय और पैदल यात्रियों की परेशानियां
व्यापारिक और रिहाइशी दृष्टिकोण से समृद्ध पीडीडीयू नगर के मुख्य बाजार क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं की कमी एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरी है। स्थानीय निवासी शशि रंजन कुमार के अनुसार, क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर जो अपेक्षाएं बांधी गई थीं, वे पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। मुगलसराय के केंद्र और आसपास के इलाकों में मूलभूत नागरिक ढांचे का अभाव बना हुआ है।
पड़ाव और उसके पास के क्षेत्रों में रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से आम जनजीवन लगातार प्रभावित होता है। सुबह स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों से लेकर खरीदारी के लिए निकलने वाले सामान्य नागरिकों तक को अव्यवस्थित यातायात और जाम की मार झेलनी पड़ती है। कई मार्गों पर नई सड़कों का निर्माण तो कराया गया है, लेकिन पैदल चलने वाले नागरिकों के लिए सुरक्षित फुटपाथ या पर्याप्त जगह नहीं छोड़ी गई है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
इसके साथ ही, बाजार की मुख्य सड़कों और व्यस्त चौराहों पर बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं की भारी कमी दर्ज की गई है। सर्वसाधारण, विशेषकर महिलाओं और बच्चियों के लिए सुव्यवस्थित सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध न होना एक गंभीर समस्या है। शशि रंजन कुमार ने रेलवे की खाली पड़ी जमीनों के समुचित उपयोग का मुद्दा उठाते हुए स्पष्ट किया कि क्षेत्र में भूमि उपलब्ध होने के बावजूद अब तक व्यवस्थित पार्किंग स्थल विकसित नहीं किए गए हैं। इसके चलते वाहन सड़कों के किनारे ही पार्क कर दिए जाते हैं, जो बाजार में निरंतर लगने वाले ट्रैफिक जाम का मुख्य कारण बनता है।
जलभराव और सीवरेज तंत्र से उपजती मौसमी चुनौतियां
मानसून के दौरान शहर के आवासीय और व्यावसायिक इलाकों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो जाती है। स्थानीय निवासी गुड्डू पटेल ने क्षेत्र की बदहाल सफाई और जल निकासी व्यवस्था को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उनके अनुसार, हल्की से मध्यम बारिश होने पर भी शहर के कई प्रमुख इलाकों में घुटनों तक पानी भर जाता है, जिससे लोगों का अपने घरों से निकलना दूभर हो जाता है।
नालियों की नियमित सफाई न होना और सीवरेज प्रणाली का सुव्यवस्थित न होना इस जलभराव की सबसे बड़ी वजह है। गुड्डू पटेल का मानना है कि एक विधायक से जनता यह उम्मीद रखती है कि वे विधानसभा में और प्रशासनिक स्तर पर क्षेत्र की समस्याओं को मजबूती से उठाएंगे तथा उनका स्थायी समाधान कराएंगे। हालांकि, धरातल पर उस स्तर का प्रभावी कार्य दिखाई नहीं देता है। आगामी चुनाव में जलभराव, सड़क और स्वच्छता जैसे प्राथमिक मुद्दे ही मतदान की दिशा तय करने में निर्णायक साबित होंगे।
ग्रामीण सड़कों का निर्माण और विकास के पक्ष में उठती आवाजें
इसके विपरीत, विधायक रमेश जायसवाल के कार्यकाल को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखने वाले नागरिकों का भी एक वर्ग क्षेत्र में मौजूद है। स्थानीय निवासी तेज प्रताप सिंह ने विधायक के साढ़े 4 साल के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र के दूर-दराज के गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ने का काम प्रमुखता से किया गया है। ग्रामीण इलाकों में नई सड़कों के जाल बिछने से आवागमन सुगम हुआ है।
तेज प्रताप सिंह का कहना है कि पड़ाव क्षेत्र के ऐतिहासिक और जटिल जाम की समस्या को सुलझाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं और स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है। उनका मानना है कि राज्य सरकार और स्थानीय विधायक की ओर से विकास कार्यों की गति संतोषजनक रही है, तथा कई महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं ने क्षेत्र के परिदृश्य को सुधारा है। इस सकारात्मक पक्ष के आधार पर वे विकास की रफ्तार को जारी रखने की वकालत करते हैं।
सीमित विकास के आरोप और बाजार चौड़ीकरण की मांग
दूसरी ओर, विकास के इन दावों को पूरी तरह स्वीकार न करते हुए स्थानीय निवासी नागेश्वर पासवान ने जनप्रतिनिधि के रिपोर्ट कार्ड पर सवाल खड़े किए हैं। उनका तर्क है कि साढ़े 4 वर्ष से अधिक का लंबा कार्यकाल बीत जाने के बाद भी पूरी विधानसभा में कोई ऐसा भव्य या लैंडमार्क प्रोजेक्ट नजर नहीं आता, जिसे मिसाल के तौर पर पेश किया जा सके।
नागेश्वर पासवान के अनुसार, मुख्य बाजार की सड़कों पर भीड़भाड़ और यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सड़कों के चौड़ीकरण की दिशा में कोई ठोस और दीर्घकालिक नीति लागू नहीं की गई। उनका आरोप है कि विकास कार्य पूरे क्षेत्र में समान रूप से कराने के बजाय केवल कुछ सीमित स्थानों और छोटी दूरियों तक ही सिमट कर रह गए हैं। पैचवर्क या सीमित दूरी में सड़क बना देने से पूरे पीडीडीयू नगर विधानसभा क्षेत्र की भीषण समस्याओं का स्थायी निवारण संभव नहीं है।
चुनावी वर्ष में 6 महीने की मियाद और जनता का संदेश
पीडीडीयू नगर विधानसभा क्षेत्र के इस व्यापक जमीनी जायजे से साफ जाहिर होता है कि जनता का मन दो भागों में विभाजित है। एक धड़ा जहां नए निर्माण और सड़क परियोजनाओं को प्रगति के रूप में देखता है, वहीं दूसरा धड़ा यह सवाल उठा रहा है कि यदि वास्तव में विकास हुआ है तो पीने का पानी, जलभराव, वाहन पार्किंग, जन-शौचालय और ट्रैफिक जाम जैसी प्राथमिक परेशानियां अब तक क्यों दूर नहीं हो सकीं।
आगामी 6 महीनों में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को देखते हुए इन सवालों का महत्व अत्यंत बढ़ गया है। मौजूदा विधायक रमेश जायसवाल को सत्तारूढ़ दल द्वारा पुनः प्रत्याशी बनाया जाएगा या नया चेहरा मैदान में उतारा जाएगा, इसका फैसला तो पार्टी नेतृत्व करेगा, परंतु धरातल पर जनता ने अपना मूल्यांकन शुरू कर दिया है। आने वाले समय में शासन-प्रशासन द्वारा इन लंबित शिकायतों का किस हद तक निस्तारण किया जाता है, वही चुनावी ऊंट किस करवट बैठेगा इसका निर्धारण करेगा। पीडीडीयू नगर की जनता का संदेश स्पष्ट है कि केवल शहर का नाम बदल देना काफी नहीं है, बल्कि उसके साथ-साथ जीवन स्तर और बुनियादी विकास की तस्वीर बदलना भी अनिवार्य है।



















