बहुजन समाज पार्टी में एक बार फिर पारिवारिक जिम्मेदारियों की अदला-बदली सुर्खियों में है। मायावती के भतीजे आकाश आनंद, जिन्हें कभी पार्टी का राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाया गया था, फिलहाल उनके पास संगठन का कोई कामकाज नहीं बचा है। वहीं उनके छोटे भाई ईशान आनंद को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है, उन्हें बसपा में मुख्य सेक्टर प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है, जिसके तहत वे देश के करीब 15 राज्यों में पार्टी इकाइयों के कामकाज पर नजर रखेंगे और उसकी समीक्षा करेंगे।
ईशान आनंद को मिली बड़ी जिम्मेदारी
इस भूमिका में ईशान आनंद को राज्य इकाइयों से रिपोर्ट लेने और संगठन के कामकाज को परखने का जिम्मा मिला है। जिन राज्यों की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है, वहां के पदाधिकारियों से सीधे तालमेल बिठाना उनकी भूमिका का अहम हिस्सा होगा। सक्रिय राजनीति में चर्चा में आने के बाद यह उनकी अब तक की सबसे बड़ी जिम्मेदारी मानी जा रही है।
आकाश आनंद का सियासी सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा
बसपा में आकाश आनंद की स्थिति पिछले कुछ बरसों में कई बार बदली है। मायावती का उत्तराधिकारी बनाए जाने के बाद उनकी जिम्मेदारियां एक से ज्यादा बार सीमित की गईं, और खबरों के मुताबिक मार्च 2025 में उन्हें दूसरी बार पद से हटाया गया था। साल 2025 से लेकर सितंबर 2026 तक आई खबरों में बार-बार यही बात सामने आई है कि मायावती हर बार जिम्मेदारी सौंपने के बाद आकाश आनंद पर उतना भरोसा बनाए नहीं रख पातीं, और उनका पद लगभग हर बार छिन जाता है।
परिवार में एक और उठापटक
यह ताजा बदलाव फरवरी 2025 की उस घटना के बाद आया है, जब मायावती ने अपने एक और भतीजे अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से ही बाहर कर दिया था। उस वक्त इसे भी पारिवारिक अंतर्कलह से जोड़कर देखा गया था।
क्या 2027 चुनाव से पहले तैयार हो रहा नया चेहरा?
इस पूरे घटनाक्रम ने बसपा में एक पुराना सवाल फिर खड़ा कर दिया है, क्या मायावती अब आकाश आनंद के विकल्प के तौर पर ईशान आनंद को आगे बढ़ा रही हैं, या यह उनकी उसी पुरानी रणनीति का हिस्सा है जिसमें किसी चेहरे को तेजी से जिम्मेदारी देकर बाद में उसकी भूमिका सीमित कर दी जाती है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ यह साफ होना बाकी है कि पार्टी का नेतृत्व ढांचा आखिरकार किस दिशा में स्थिर होगा।



















