हैदराबाद के 31 साल के श्यामनाथ गोस्वामी की कहानी बताती है कि हालात इंसान को उसके शौक से कितनी दूर ले जा सकते हैं. एक वक्त था जब वे देश के मशहूर रियलिटी शो डांस इंडिया डांस के मंच पर अपनी अदाओं से जजों को दंग कर चुके थे, लेकिन आज वे अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए गरमागरम तेल में समोसे और कचौरी तलते नजर आते हैं.
बचपन से ही थी डांस की दीवानगी
श्यामनाथ का बचपन हैदराबाद के एक छोटे से घर में गुजरा, जहां संसाधन सीमित थे लेकिन डांस के लिए जुनून बेहिसाब था. स्कूल से लौटने के बाद वे अक्सर इंटरनेट कैफे में घंटों डांस के वीडियो देखा करते थे और फिर रात को छत पर अकेले घंटों रियाज करते, कई बार यह सिलसिला रात के 2 बजे तक चलता रहता था. यही मेहनत आगे चलकर उनकी पहचान बनी.
ऑडिशन में चुनी गई अनोखी शैली
19 साल की उम्र में श्यामनाथ ने बड़ा फैसला लिया, उन्होंने पढ़ाई बीच में छोड़ी और बिना किसी को बताए डांस इंडिया डांस के ऑडिशन में हिस्सा लिया. हजारों उम्मीदवारों के बीच उनकी टॉलीवुड अंदाज वाली डांस स्टाइल ने जजों को इतना प्रभावित किया कि हैदराबाद से सिर्फ उन्हीं का चयन हुआ.
मुंबई पहुंचते ही टूटा मुश्किलों का पहाड़
चयन के बाद जब वे सपनों की नगरी मुंबई पहुंचे तो वहां हालात आसान नहीं रहे. स्टेशन पर ही उनका मोबाइल और सामान गायब हो गया, जिसके चलते कई रातें उन्हें बोरिवली स्टेशन पर ही गुजारनी पड़ीं. इन तमाम दिक्कतों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और शो के टीवी राउंड तक अपनी जगह बना ली.
पहचान मिलने से पहले ही आया बड़ा झटका
लेकिन टीवी पर असली पहचान मिलने से ठीक पहले श्यामनाथ की जिंदगी ने अचानक ऐसा मोड़ ले लिया, जिसने सब कुछ बदल दिया. घर वापस लौटते ही पता चला कि उनके बड़े भाई का अचानक निधन हो गया है. पिता पहले से ही बीमार और कमजोर थे, ऐसे में पूरे परिवार को संभालने की जिम्मेदारी महज 19 साल की उम्र में श्यामनाथ के कंधों पर आ गई.
डांसिंग शूज उतारकर थामा समोसों का ठेला
परिवार को टूटने से बचाने के लिए श्यामनाथ ने अपने सपनों को फिलहाल किनारे रख दिया और तेलंगाना हाईकोर्ट के गेट नंबर 6 के सामने पुराने शहर के इलाके में कचौरी, मिर्ची भजिया और समोसे का ठेला लगाना शुरू कर दिया. बीते 12 सालों से वे हर दिन दोपहर 2 बजे से लेकर आधी रात तक इसी ठेले पर मेहनत करते हैं, ताकि परिवार का खर्च चल सके.
अंदर का कलाकार आज भी जिंदा
हालात ने भले ही श्यामनाथ को डांस फ्लोर से दूर कर दिया हो, लेकिन उनके भीतर छिपा कलाकार आज भी पूरी तरह जिंदा है. मौका मिलने पर वे आज भी स्थानीय कार्यक्रमों में कोरियोग्राफी करते हैं. उन्हें पूरा यकीन है कि आने वाले वक्त में उन्हें अपनी कला दुनिया के सामने रखने का मौका दोबारा जरूर मिलेगा.



















