स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में लखनऊ को मिला देश में पहला स्थान, राजनाथ सिंह ने दी बधाईयूके बजट भाषण और अमेरिकी मुद्रास्फीति आंकड़ों से पहले 1.35 के स्तर पर टिका ब्रिटिश पाउंडराशिफल 8 सितंबर 2026: मेष से मीन तक जानें कल आपकी राशि में क्या खास होगाकॉमर्जबैंक का दावा, ECB की सख्ती के बावजूद यूरो को नहीं मिलेगा बड़ा फायदा, डॉलर का दबदबा बरकरारसत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली के PG में मिलीं सुरक्षा में बड़ी खामियां, किराया 17 हजार फिर भी सुविधा नदारदमंडी में सांसद कंगना रनौत के तीखे रुख पर सुक्खू सरकार हमलावर, मुख्यमंत्री के सलाहकार नरेश चौहान ने मर्यादित आचरण की दी सलाहनाभा जेलब्रेक के आरोपी गुरप्रीत सेखों की आम आदमी पार्टी में एंट्री पर सियासत गरमाई, विपक्ष ने बोला हमलागारो हिल्स के युवाओं को अब नई दिल्ली तक पहुंचने का मौका देगा 2027 का विकसित भारत डायलॉगब्रिटेन के वित्त मंत्री हीली की चेतावनी: कर्ज की लागत रिकॉर्ड ऊंचाई पर, बजट में सख्ती बरकरार रहेगीटीडी सिक्योरिटीज का अनुमान: सितंबर में ब्याज दरें नहीं बदलेगा फेडरल रिजर्व, लेकिन आगे कटौती से ज्यादा बढ़ोतरी की आशंका
सड़क, सुरक्षा और सफाई: कोटा के वार्डों में वादों से नहीं, काम से पक्का होगा वोटराजनीति
7 सित॰ 2026, 2:19 pm (1 घंटे पहले)· 2

सड़क, सुरक्षा और सफाई: कोटा के वार्डों में वादों से नहीं, काम से पक्का होगा वोट

कोटा में नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच वार्डों के वोटर टूटी सड़कों, महिला सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट और आवारा मवेशियों जैसे मुद्दों पर खुलकर बोल रहे हैं और कह रहे हैं कि वोट अब सिर्फ जमीन पर काम करने वाले प्रत्याशी को ही मिलेगा।

कोटा में नगर निकाय चुनाव की घोषणा होते ही उम्मीदवार वार्ड दर वार्ड घर-घर पहुंचने लगे हैं, हाथ जोड़कर वोट मांग रहे हैं और विकास के भरोसे भी दे रहे हैं। मगर वोटरों का मिजाज इस बार पहले से अलग दिख रहा है, उनका कहना है कि सिर्फ भाषण और वादों से जीत तय नहीं होगी, पर्ची उसी नाम पर पड़ेगी जो जमीन पर वाकई काम करके दिखाएगा। शहर के अलग-अलग वार्डों में घूमकर बात करने पर सड़क, सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट, सफाई और आवारा मवेशियों की समस्या सबसे ज्यादा उभरकर सामने आई।

सड़कों की बदहाली सबसे बड़ी नाराजगी

अलग-अलग वार्डों में लोगों से बात करने पर सबसे ज्यादा गुस्सा टूटी सड़कों और गड्ढों को लेकर सामने आया। वोटरों का कहना है कि सड़क एक बार बन जाने के बाद उसकी क्वालिटी और रखरखाव पर किसी का ध्यान नहीं जाता, काम पूरा दिखाकर सब भूल जाते हैं। बारिश के मौसम में यही सड़कें और बदतर हो जाती हैं, गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना का डर बना रहता है और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लोगों की मांग है कि अब बार-बार खुदाई और पैचवर्क की जगह ऐसी सड़कें बनें जो सालों तक टिकें और जिनकी नियमित निगरानी भी हो।

ये भी पढ़ें

महिला सुरक्षा के लिए सीसीटीवी की मांग

महिला सुरक्षा को लेकर भी वार्डों के वोटर काफी सजग नजर आए। लोगों का कहना है कि भीड़भाड़ वाली और संवेदनशील गलियों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि चोरी, चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं पर निगरानी रखी जा सके और वारदातें रुकें। कई महिलाओं ने कहा कि रात में सुनसान गलियों से गुजरना उनके लिए आज भी असहज अनुभव है।

आवारा पशु और अंधेरी सड़कें भी चिंता का विषय

सड़कों पर घूमते आवारा कुत्तों और मवेशियों की समस्या भी लोगों की एक बड़ी शिकायत के रूप में सामने आई। इसके अलावा कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी होने से रात में अंधेरा पसरा रहता है, जिससे असुरक्षा का माहौल बनता है। वोटरों की मांग है कि लाइट खराब होने की शिकायत मिलते ही उसे जल्द ठीक कराने का सिस्टम बनाया जाए, ताकि लोगों को बार-बार निगम के चक्कर न काटने पड़ें।

गौशाला से लेकर राशन दुकानों तक सुधार की उम्मीद

लोगों ने नगर निगम की गौशालाओं में बेहतर इंतजाम, वहां पशु चिकित्सकों की नियमित मौजूदगी और सड़क पर बीमार या मृत मवेशी मिलने पर उसे तुरंत हटाने की मांग रखी। इसके साथ ही घर-घर से कचरा उठाने का काम नियमित हो, सामुदायिक भवनों की देखभाल ठीक से हो और राशन दुकानों पर लगने वाली लंबी लाइनों से राहत मिले, ऐसी उम्मीद भी जताई गई। कई लोगों ने यह भी कहा कि छोटी-छोटी शिकायतों के लिए भी उन्हें कई बार निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

वोटरों को चाहिए ऐसा पार्षद जो फोन न काटे

ज्यादातर लोगों की एक ही मांग रही कि जीतने वाला पार्षद पढ़ा-लिखा, ईमानदार और जनता के बीच रहने वाला हो। लोगों ने साफ कहा कि चुनाव जीतने के बाद पार्षद का मोबाइल बंद नहीं होना चाहिए, बल्कि समस्या बताते ही उसके समाधान की कोशिश तुरंत शुरू हो जानी चाहिए। कोटा के वार्डों में उठ रहे ये सारे मुद्दे बिल्कुल जमीनी हैं, अब देखना यह है कि प्रत्याशियों के घोषणापत्र में इन्हें कितनी जगह मिलती है और जीत के बाद कितने वादे हकीकत में बदलते हैं।

सवाल-जवाब

कोटा में यह राजनीतिक हलचल किस चुनाव को लेकर है?
यह हलचल कोटा के आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर है, जिसमें प्रत्याशी वार्डों में घर-घर जनसंपर्क कर रहे हैं।
वार्डों में लोगों की सबसे बड़ी शिकायत क्या रही?
सबसे ज्यादा नाराजगी टूटी सड़कों और गड्ढों को लेकर सामने आई, इसके बाद महिला सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट और आवारा मवेशियों की समस्या का नंबर रहा।
वोटर किस तरह का पार्षद चाहते हैं?
लोग ऐसा पार्षद चाहते हैं जो पढ़ा-लिखा, ईमानदार हो, जनता के बीच रहे और जीतने के बाद फोन बंद न करे।
महिला सुरक्षा को लेकर लोगों की क्या मांग है?
लोग चाहते हैं कि भीड़भाड़ वाली और संवेदनशील गलियों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि चोरी और चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं पर निगरानी रखी जा सके।
गौशालाओं को लेकर क्या मांग उठी?
लोगों ने गौशालाओं में बेहतर इंतजाम, नियमित पशु चिकित्सक की मौजूदगी और सड़क पर बीमार या मृत मवेशियों को तुरंत हटाने की मांग की।
राशन दुकानों को लेकर लोगों ने क्या कहा?
लोगों ने राशन दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत दिलाने की उम्मीद जताई।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 मिनट पहले

कोटा के इन नगरीय चुनावों में बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा सीधे तौर पर सामाजिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ गया है। टूटी सड़कें, अंधेरी गलियाँ और सीसीटीवी का अभाव केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा में बड़ी सेंध हैं, जिससे चेन स्नेचिंग और चोरी जैसे अपराधों की आशंका बढ़ जाती है। जनता का यह स्पष्ट रुख कि जनप्रतिनिधि फोन न काटे और जमीन पर जवाबदेह हो, यह साबित करता है कि अब स्थानीय चुनावों में भी सुरक्षा और सुशासन ही सबसे बड़ा पैमाना बनेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

यह ग्राउंड रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि शहरी निकाय चुनावों में अब मतदाता सिर्फ बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि वह सीधे जवाबदेही चाहता है। सड़कों, स्ट्रीट लाइट और आवारा पशुओं जैसी समस्याएं सीधे तौर पर दैनिक जीवन और सुरक्षा को प्रभावित करती हैं। जब एक नागरिक को छोटी-छोटी शिकायतों के लिए निगम के चक्कर काटने पड़ें, तो यह कमजोर गवर्नेंस का स्पष्ट संकेत है। आने वाले चुनावों में यह मतदाता का यह रुख पारंपरिक चुनावी समीकरणों को बदलकर रख सकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR