महाराष्ट्र की सियासत में बारामती हमेशा से पवार परिवार के भीतर की खींचतान का अखाड़ा रहा है, लेकिन इस बार मामला लोकसभा या विधानसभा का नहीं बल्कि एक सहकारी चीनी मिल के निदेशक मंडल का है। श्री सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल के पंचवर्षीय चुनाव का कार्यक्रम घोषित होते ही एनसीपी शरदचंद्र पवार गुट के युवा नेता युगेंद्र पवार ने खुद चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर दिया है, जिससे परिवार के भीतर एक और नया मोर्चा खुल गया है।
इस बार मुकाबला सुनेत्रा पवार के नेतृत्व वाले पैनल और युगेंद्र पवार के गुट के बीच सीधा होने जा रहा है। युगेंद्र पवार ने संकेत दिया है कि वे व्यक्तिगत पैनल की बजाय एक स्वतंत्र किसान पैनल के बैनर तले चुनाव लड़ेंगे, जिसका पूरा फोकस गन्ना उत्पादक किसानों की मांगों पर रहेगा। उनका कहना है कि मिल से जुड़े किसान सदस्यों के हितों को सबसे ऊपर रखा जाएगा। इस ऐलान के बाद बारामती की सियासी सरगर्मी अचानक बढ़ गई है।
बदलाव की मांग, व्यक्तिगत विरोध नहीं
युगेंद्र पवार ने बार-बार दोहराया है कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि मिल के किसान सदस्यों को एक साफ-सुथरा और पारदर्शी विकल्प देने की कोशिश है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, "सुनेत्रा काकी से हमारी कोई निजी शिकायत नहीं है, मगर सोमेश्वर मिल के मौजूदा बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के कामकाज पर गंभीर एतराज हैं." उनका कहना है कि दशकों से मिल की सत्ता एक ही परिवार के इर्द-गिर्द घूमती रही है, और अब इसमें लोकतांत्रिक तरीके से बदलाव लाने का वक्त आ गया है। इस बयान से साफ हो गया कि सत्ता पक्ष की सुलह की कोशिशें बेकार जा सकती हैं।
गन्ना किसानों की मांगों पर टिका एजेंडा
युगेंद्र पवार का पूरा चुनावी एजेंडा गन्ना किसानों से जुड़ी जमीनी समस्याओं पर केंद्रित है। उनके पैनल का मकसद किसानों को गन्ने का बेहतर और वाजिब दाम दिलाना है, ताकि खेती की लागत निकालने के बाद किसानों को मुनाफा भी मिल सके। इसके अलावा वे मिल में बनने वाली चीनी की गुणवत्ता सुधारने की बात कर रहे हैं, जिससे मिल की बाजार में साख बेहतर हो। गन्ने की कटाई तय शेड्यूल के हिसाब से हो, यह भी उनकी प्राथमिकता में है, क्योंकि देर से कटाई किसानों को आर्थिक नुकसान पहुंचाती है। साथ ही मिल में स्टाफ की भर्ती पूरी तरह मेरिट के आधार पर करने का वादा भी इस पैनल के एजेंडे का अहम हिस्सा है। करीब 150 गांवों के किसान इस चुनाव से सीधे जुड़े हैं, इसलिए यह मुकाबला सिर्फ बारामती तक सीमित नहीं रह गया है।
शरद पवार का मार्गदर्शन चाहते हैं किसान सदस्य
युगेंद्र पवार के मुताबिक, सोमेश्वर मिल से जुड़े किसान सदस्य चाहते हैं कि संस्थान पर वरिष्ठ नेता शरद पवार की सीधी निगरानी और मार्गदर्शन बना रहे। उन्होंने मीडिया और विरोधियों से अपील की कि इस मुकाबले को सिर्फ "पवार बनाम पवार" की तरह पेश न किया जाए, क्योंकि उनका मानना है कि यह लड़ाई "पवार विथ पवार" की भावना के साथ भी आगे बढ़ सकती है। इस बयान से साफ है कि युगेंद्र पवार परिवार के भीतर के इस टकराव को पूरी तरह व्यक्तिगत रंग देने से बचना चाहते हैं, भले ही जमीनी स्तर पर मुकाबला बेहद कड़ा दिख रहा हो।
सुनेत्रा पवार की निर्विरोध अपील का असर नहीं
दो दिन पहले हुए एक किसान सम्मेलन में सुनेत्रा पवार ने सभी सदस्यों से एकजुट होने की अपील की थी, ताकि सोमेश्वर मिल का यह पंचवर्षीय चुनाव बिना किसी टकराव के निर्विरोध पूरा हो सके। उन्होंने यह भी कहा था कि यह चुनाव पूरी तरह अजित पवार की विकासवादी नीतियों और सोच के आधार पर ही लड़ा जाएगा। लेकिन युगेंद्र पवार के तीखे तेवरों ने निर्विरोध चुनाव की हर संभावना को खत्म कर दिया है, और अब मैदान में सीधी टक्कर तय मानी जा रही है।
11 अक्टूबर को वोटिंग, 12 को नतीजे
प्रशासन ने सोमेश्वर सहकारी चीनी मिल के पंचवार्षिक चुनाव का पूरा कार्यक्रम जारी कर दिया है। मतदान 11 अक्टूबर को होगा, जब किसान सदस्य अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। इसके अगले ही दिन, यानी 12 अक्टूबर को वोटों की गिनती होगी और नतीजे सामने आ जाएंगे। मिल का कार्यक्षेत्र करीब 150 गांवों में फैला हुआ है, और इसमें बारामती, पुरंदर, खंडाला और फलटन तहसीलों के हजारों किसान सदस्य शामिल हैं। इतने बड़े दायरे की वजह से इस चुनाव के नतीजों का असर सिर्फ बारामती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समूचे पश्चिमी महाराष्ट्र के सहकारिता आंदोलन की दिशा भी इससे प्रभावित होगी।



















