तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने सोमवार को पहली बार अभिनेत्री तृषा कृष्णन से जुड़े विवाद पर विधानसभा में मुंह खोला और महिलाओं के बारे में की जाने वाली टिप्पणियों को लेकर सीधी चेतावनी दी. उन्होंने किसी का नाम लिए बिना यह जरूर साफ कर दिया कि राजनीतिक बहस की भी एक सीमा होती है और उस सीमा को पार कर महिलाओं पर निजी हमला करना उन्हें मंजूर नहीं.
यह बयान ऐसे वक्त आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में माहौल पहले से ही गर्म है. विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके के बीच पिछले कई हफ्तों से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. वजह है डीएमके नेता और नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन की वह कथित टिप्पणी, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने अभिनेत्री तृषा कृष्णन पर निशाना मानते हुए आपत्तिजनक करार दिया. इस पूरे मामले में अब तक एक पुलिस शिकायत, एक संक्षिप्त हिरासत और अब खुद मुख्यमंत्री की विधानसभा में सीधी टिप्पणी सामने आ चुकी है.
विवाद की शुरुआत कैसे हुई
पूरा मामला पिछले महीने तंजावुर में हुई एक सभा से जुड़ा है, जहां उदयनिधि स्टालिन कावेरी जल विवाद पर भीड़ को संबोधित कर रहे थे. भाषण के बीच में ही मौजूद भीड़ के एक हिस्से ने तृषा, तृषा के नारे लगाने शुरू कर दिए. कहा जाता है कि इसी पर उदयनिधि ने कुछ ऐसा कह दिया, जिसे भीड़ में मौजूद लोगों और बाद में सोशल मीडिया पर बड़ी तादाद में लोगों ने कावेरी नदी पर टिप्पणी न मानकर अभिनेत्री पर सीधा और डबल मीनिंग वाला कटाक्ष माना. बाद में उदयनिधि ने सफाई दी कि उनका इशारा सिर्फ कावेरी के पानी की तरफ था, किसी व्यक्ति विशेष की तरफ नहीं, लेकिन तब तक नाराजगी काफी बढ़ चुकी थी और इस सफाई से बात संभल नहीं पाई.
उदयनिधि के खिलाफ दर्ज हुआ पुलिस केस
टीवीके की महिला विंग यहीं नहीं रुकी. उसके सदस्यों ने तंजावुर के एक थाने पहुंचकर इस टिप्पणी को लेकर विधिवत शिकायत दर्ज कराई और आरोप लगाया कि सार्वजनिक मंच से एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई. इस शिकायत के आधार पर तमिलनाडु पुलिस ने उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कई धाराओं में केस दर्ज किया, जिनमें महिला की मर्यादा का अपमान, सार्वजनिक स्थान पर अश्लील भाषा का इस्तेमाल, आपराधिक साजिश, आपराधिक धमकी, तमिलनाडु महिला उत्पीड़न निषेध अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं शामिल हैं. पुलिस उन्हें चेन्नई स्थित उनके घर से हिरासत में लेकर तंजावुर ले गई. उदयनिधि ने इस पूरी कार्रवाई को कॉमेडी करार देते हुए किसी भी तरह की आपत्तिजनक टिप्पणी से इनकार किया और दावा किया कि यह पूरा विवाद संपादित और भ्रामक क्लिप पर खड़ा किया गया है. उन्होंने राजनीतिक जवाब देने के बजाय कानूनी रास्ता अपनाने का इरादा जताया है.
विधानसभा में विजय ने क्या कहा
सोमवार को विधानसभा में बोलते हुए विजय ने अपने शब्द फूंक-फूंक कर चुने, लेकिन अपना रुख साफ रखा. उन्होंने कहा कि नेता एक-दूसरे की नीतियों और कामकाज पर राजनीतिक टिप्पणी करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन महिलाओं को नीचा दिखाने वाली या डबल मीनिंग वाली भाषा सार्वजनिक बहस में कभी बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए. उन्होंने सदन में कहा,
अगर महिलाओं का अपमान होगा तो कानून कार्रवाई करेगा.यह टिप्पणी उन्होंने किसी एक पार्टी पर हमले के तौर पर नहीं, बल्कि एक बुनियादी मानक के तौर पर पेश की, जिसका पालन वे अपनी पार्टी सहित हर किसी से चाहते हैं.
विजय यहीं नहीं रुके. उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता का जिक्र करते हुए सदन को याद दिलाया कि उसी विधानसभा में जयललिता को किस तरह के अपमान का सामना करना पड़ा था, यह वहां मौजूद हर किसी ने अपनी आंखों से देखा है. इस उदाहरण के जरिए उन्होंने यह बात रखी कि राजनीतिक बहस चाहे कितनी भी तीखी क्यों न हो जाए, किसी महिला को नीचा दिखाना कभी सही नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे किसी को नसीहत देने नहीं आए, बल्कि सिर्फ वह बात दोहरा रहे हैं जो सब पहले से जानते हैं.
डीएमके पर लगाए भ्रष्टाचार के आरोप
इसी भाषण में विजय ने तृषा वाले विवाद से हटकर डीएमके पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी लगाए. उन्होंने पहले अपनी मेज पर रखी फाइलों का जिक्र किया था, अब उन्होंने उसका एक नमूना सदन के सामने पेश किया. प्रवर्तन निदेशालय से जुड़े दस्तावेजों का हवाला देते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकों और परियोजनाओं से पार्टी फंड के नाम पर 7.5 प्रतिशत से लेकर 10 प्रतिशत तक कमीशन वसूला जाता रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि उस दौर में सत्ता किसके हाथ में थी, और इशारा मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उस वक्त उपमुख्यमंत्री रहे उदयनिधि स्टालिन की तरफ किया.
विजय ने पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके भाई से जुड़े टीएएसएमएसी मामले का भी जिक्र छेड़ा और आरोप लगाया कि कऱूर के आसपास के राजनीतिक लोग पार्टी फंड जुटाने में शामिल रहे, और शराब की हर बोतल पर कथित तौर पर 10 रुपये की रिश्वत वसूली गई. उन्होंने सीधा सवाल दागा कि क्या यह उतना सबूत काफी है जितना मांगा जा रहा था, और आरोप लगाया कि डीएमके जहां भी मौजूद रहती है, वहां गड़बड़ी की गुंजाइश बनी रहती है.
विजय के ये बयान विपक्ष की तरफ से हो रहे हमलों के जवाब में आए हैं, और तृषा विवाद को लेकर टीवीके और डीएमके के बीच पहले से गरमाया माहौल विधानसभा सत्र आगे बढ़ने के साथ और तीखा होने के आसार हैं.





















