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नतीजों से तय होगी सफलता, ओम बिरला ने ब्रिक्स मंच पर वैश्विक व्यवस्था पर रखी बातराजनीति
26 अक्तू॰ 2026, 2:13 pm (15 घंटे पहले)· 2

नतीजों से तय होगी सफलता, ओम बिरला ने ब्रिक्स मंच पर वैश्विक व्यवस्था पर रखी बात

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को संबोधित करते हुए कहा कि संगठन की सफलता केवल चर्चाओं से नहीं बल्कि ठोस परिणामों से आंकी जाएगी।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 26 अक्टूबर को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान वैश्विक व्यवस्था को आकार देने में संसदों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। राजधानी दिल्ली स्थित संसद भवन परिसर के संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित इस उच्चस्तरीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि इस वर्ष यह मंच अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। संगठन का दायरा लगातार बढ़ रहा है और इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों की दिशा तय करने की उसकी ताकत भी तेजी से मजबूत हो रही है।

सम्मेलन में शामिल हुए सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए ओम बिरला ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन का उल्लेख किया जिसमें ब्रिक्स को समस्याओं के समाधान का एक इको सिस्टम बनाने की जरूरत बताई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी संगठन की सफलता केवल बैठकों या बहसों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह जमीन पर दिखने वाले नतीजों से तय होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सभी देशों को एक साझा एजेंडा तय करने का संकल्प लेना चाहिए, भले ही उनकी अपनी राष्ट्रीय परिस्थितियां और प्रशासनिक दृष्टिकोण अलग-अलग क्यों न हों।

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चर्चा के दौरान उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि तमाम सदस्य देशों की प्राथमिक आकांक्षाएं एक जैसी हैं जिनमें शांति, सुरक्षा, परस्पर सम्मान, समान अवसर और अपने नागरिकों के लिए जीवन स्तर को बेहतर बनाना शामिल है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संसदीय मंच आपसी साझेदारी को और अधिक प्रगाढ़ करेगा तथा एक ज्यादा समावेशी, शांतिपूर्ण और सतत विश्व के निर्माण में अपना सार्थक योगदान सुनिश्चित करेगा।

ओम बिरला ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी और पृथ्वी के करीब एक-तिहाई भूभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं। वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में इन राष्ट्रों की भूमिका बेहद अहम है। उन्होंने स्वीकार किया कि इन देशों के बीच भौगोलिक दूरियां, अलग संस्कृतियां, भाषाएं और सामाजिक संरचनाएं भिन्न हो सकती हैं, लेकिन साझा लोकतांत्रिक मूल्य और मानवता के प्रति समान जिम्मेदारी सभी को एक सूत्र में पिरोती है।

सामूहिक जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों की ताकत के साथ वैश्विक उत्तरदायित्व भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में जरूरी है कि सदस्य देश आपसी सहयोग, निरंतर संवाद और साझे लक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ें। लोकसभा स्पीकर ने आह्वान किया कि सभी देशों को मिलकर एक ऐसी मजबूत कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए जिससे आपसी विश्वास बढ़े और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की प्रक्रिया को बल मिले।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस मंच पर होने वाली गंभीर चर्चाएं आपसी भरोसे को नई ऊंचाई देंगी और जन केंद्रित विकास के संकल्प को और मजबूत करेंगी। उन्होंने कहा कि मिलकर काम करने से एक ऐसी प्रभावी संसदीय साझेदारी बन सकेगी जो नागरिकों के सपनों को साकार करते हुए उन्हें शांति, समृद्धि और सतत विकास के नए अवसर उपलब्ध कराएगी।

सवाल-जवाब

12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का आयोजन कहाँ किया गया था?
यह सम्मेलन संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में आयोजित किया गया था।
इस मंच को संबोधित किसने किया?
इस सम्मेलन को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संबोधित किया।
इस वर्ष ब्रिक्स संसदीय मंच को कितने वर्ष पूरे हो रहे हैं?
इस वर्ष इस मंच की स्थापना के 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
ब्रिक्स देश दुनिया की कितनी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं?
ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी और पृथ्वी के करीब एक-तिहाई भूभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के संबंध में क्या बात कही है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स को समाधानों का इको सिस्टम मानने की आवश्यकता पर बल दिया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·2 घंटे पहले

सिर्फ चर्चाओं से बात नहीं बनेगी, यह तो सही है, पर पिछले बीस साल में ज़मीन पर असल में हुआ क्या है, यह भी तो देखना चाहिए। बस बड़ी-बड़ी बैठकों से नतीजे थोड़ी आते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·13 घंटे पहले

ओम बिरला ने एकदम सही कहा कि सिर्फ बैठकें करने से कुछ नहीं होगा, ज़मीन पर नतीजे दिखने चाहिए। जब तक आधे विश्व की आबादी वाले इन देशों के लोग अपनी तरक्की खुद अपनी आँखों से न देखें, तब तक ऐसी चर्चाओं का कोई बड़ा मतलब नहीं बचता।

Meera Joshi@meera-joshi·13 घंटे पहले

रविकेश, आपकी बात सही है। पिछले साल जब मैं एक अंतरराष्ट्रीय वेलनेस कार्यशाला में गई थी, तो वहाँ भी कागजी प्लान बहुत थे पर ज़मीन पर बदलाव ढूँढने से भी नहीं मिला था।

Rohan Verma@rohan-verma·14 घंटे पहले

सिर्फ चर्चाओं से काम नहीं चलेगा, बात तो सही कही है। पर ये ठोस नतीजे ज़मीन पर दिखेंगे कब, और इसके लिए भारत क्या नया प्लान लेकर आया है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 घंटे पहले

रोहन भाई, दुनिया की आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली बात पर गौर किया क्या? वजन तो है इस आंकड़े में।

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