संसद के मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच का टकराव अब अपने चरम पर पहुंच चुका है। एक तरफ जहां चिकित्सा प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी (NEET-UG) में कथित धांधली और पेपर लीक के गंभीर मुद्दों को लेकर विपक्षी दलों ने संसद के दोनों सदनों में सरकार को घेरने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में एक अत्यंत महत्वपूर्ण केंद्रीय कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में देश की परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पेपर लीक करने वाले संगठित गिरोहों के खिलाफ अत्यधिक कठोर कानूनी प्रावधानों को अमलीजामा पहनाने के लिए गंभीर विचार-विमर्श शुरू हुआ है। इसके साथ ही, विधायी मोर्चे पर राज्यसभा के भीतर दोपहर के सत्र के दौरान एक नया विधेयक पेश किया गया, जिसने राजनीतिक सरगर्मियों को और अधिक तेज कर दिया है।
राज्यसभा में राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक और हंगामे के बीच कार्यवाही स्थगित
संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा में शुक्रवार को सुबह के सत्र में हुए भारी हंगामे के बाद दोपहर दो बजे जैसे ही कार्यवाही दोबारा शुरू की गई, वैसे ही सदन का माहौल फिर से अशांत हो गया। इसी हंगामे के बीच केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 'वंदे मातरम्' बिल पेश किया। इस विधेयक को 'नेशनल ऑनर (संशोधन) विधेयक' यानी राष्ट्रीय सम्मान (संशोधन) विधेयक के रूप में सदन के पटल पर रखा गया है। इस महत्वपूर्ण विधेयक का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों और नियमों में आवश्यक संशोधन करना है ताकि राष्ट्रीय प्रतीकों की गरिमा को और अधिक सुरक्षित किया जा सके। हालांकि, इस विधेयक के पेश होते ही विपक्षी सांसदों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया, जिसके कारण सदन में सामान्य कामकाज चलाना पूरी तरह असंभव हो गया। भारी शोर-शराबे को देखते हुए राज्यसभा की कार्यवाही को सोमवार तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
परीक्षा प्रणालियों को सुरक्षित बनाने के लिए मोदी कैबिनेट की बड़ी बैठक
देश के लाखों युवा परीक्षार्थियों के भविष्य और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं की साख को बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुलाई गई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में पेपर लीक माफियाओं और नकल गिरोहों के खिलाफ कड़े से कड़ा कानूनी शिकंजा कसने के विभिन्न प्रस्तावों पर गहन चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि वर्तमान में लागू कानूनों को किस प्रकार और अधिक प्रभावी बनाया जाए ताकि कोई भी अपराधी परीक्षा प्रणाली के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके। कैबिनेट के इन कदमों का उद्देश्य देश की प्रतियोगी परीक्षाओं और पूरी मूल्यांकन प्रणाली में आम जनता, छात्रों और उनके अभिभावकों का खोया हुआ भरोसा वापस बहाल करना है।
जून 2024 के कानून को और अधिक कठोर बनाने की तैयारी
केंद्र सरकार ने इससे पहले जून 2024 में ही पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट लागू किया था। यह कानून नीट-यूजी (NEET-UG) और जेईई (JEE) समेत देश की सभी प्रमुख सार्वजनिक और प्रतियोगी परीक्षाओं पर पूरी तरह से लागू होता है। इस मौजूदा कानून के तहत पेपर लीक करना, परीक्षा में संगठित रूप से नकल कराना, असली छात्र के स्थान पर किसी अन्य फर्जी अभ्यर्थी को बैठाना (इम्पर्सोनेशन) और कंप्यूटर सिस्टम के साथ अनधिकृत छेड़छाड़ करना गंभीर आपराधिक अपराध घोषित किया गया है। वर्तमान नियमों के अनुसार, व्यक्तिगत रूप से दोषी पाए जाने वाले अपराधियों के लिए तीन से पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, यदि कोई संगठित गिरोह या सिंडिकेट इस तरह के अपराधों में लिप्त पाया जाता है, तो उसके लिए पांच से दस साल तक की जेल और कम से कम एक करोड़ रुपये के न्यूनतम जुर्माने का सख्त प्रावधान किया गया है। अब मोदी कैबिनेट में इस बात पर विचार चल रहा है कि इन सजाओं को और अधिक कठोर कैसे किया जाए।
फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन और तीन महीने में त्वरित न्याय का लक्ष्य
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में विचाराधीन सबसे महत्वपूर्ण प्रस्तावों में से एक विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों को कानूनी मान्यता देना है। इन विशेष अदालतों का एकमात्र उद्देश्य पेपर लीक और परीक्षा धांधली से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई अत्यंत तीव्र गति से करना होगा। इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत एक सख्त समय-सीमा तय करने की योजना बनाई गई है। इसके अनुसार, जांच एजेंसियों द्वारा जांच पूरी होने और आरोप पत्र दाखिल किए जाने के बाद, इन फास्ट-ट्रैक अदालतों को अधिकतम तीन महीने के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाना होगा। त्वरित सुनवाई और समयबद्ध सजा के इस प्रावधान से न केवल दोषियों को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे भेजा जा सकेगा, बल्कि भविष्य में इस तरह के अपराधों पर पूरी तरह से अंकुश लगाने में भी मदद मिलेगी।
लोकसभा में राहुल गांधी का सरकार पर गंभीर आरोप और तीन मांगें
दूसरी तरफ, लोकसभा में भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी रस्साकशी देखने को मिली। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पहले तो उनसे खुद बातचीत करने और सहयोग करने की अपील की थी, लेकिन जैसे ही उन्होंने सदन के भीतर देश के छात्रों की समस्याओं और मांगों को उठाना शुरू किया, वैसे ही अचानक उनका माइक बंद कर दिया गया। राहुल गांधी ने संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि देश के पीड़ित छात्रों की तीन प्रमुख मांगें हैं जिन पर सरकार को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा है। दूसरी मांग यह है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित रूप से बल प्रयोग और लाठीचार्ज करने वालों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। और तीसरी मांग यह है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश के छात्रों से इस अव्यवस्था के लिए माफी मांगें। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से पहले विपक्ष सरकार के साथ किसी भी प्रकार की चर्चा में भाग नहीं लेगा।
सदन में निरंतर गतिरोध और लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित
नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक विवाद को लेकर विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन के सांसदों ने लोकसभा के भीतर भी बेहद आक्रामक रुख अपनाया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद अध्यक्ष के आसन के सामने जमा हो गए और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार नारेबाजी करने लगे। सदन में जारी इस अभूतपूर्व शोर-शराबे के बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष से बार-बार अपील की कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर सदन में नियम सम्मत और विस्तृत चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन विपक्ष अपनी इस मांग पर अड़ा रहा कि चर्चा शुरू होने से पहले शिक्षा मंत्री को हटाया जाए। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बने इस गतिरोध के कारण सदन सुचारु रूप से नहीं चल सका, जिसके चलते अध्यक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।
किरेन रिजिजू का विपक्ष पर निशाना और सोनम वांगचुक का संदर्भ
विपक्षी दलों के अड़ियल रवैये से नाराज संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लोकसभा में अपनी बात रखते हुए कहा कि जब लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपनी मांगों को लेकर चल रहे 26 दिनों के लंबे अनशन को समाप्त कर दिया है, तो विपक्ष को भी अपनी हठधर्मिता छोड़कर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए। किरेन रिजिजू ने विशेष रूप से विपक्ष के नेता राहुल गांधी से आग्रह किया कि वे सदन में सार्थक चर्चा होने दें ताकि देश के सामने सभी दल अपनी बात और सुझाव रख सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल पूर्व शर्तें रखकर और नए-नए बहाने बनाकर नीट-यूजी (NEET-UG) जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषय पर चर्चा से भागने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
मल्लिकार्जुन खड़गे का प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो संदेश पर तीखा पलटवार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किए गए एक हालिया वीडियो संदेश को लेकर सरकार पर तीखा निशाना साधा। मल्लिकार्जुन खड़गे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि जब संसद का महत्वपूर्ण सत्र चल रहा है, तब देश के प्रधानमंत्री को सदन के भीतर आकर अपनी बात रखनी चाहिए और सांसदों के सवालों का सामना करना चाहिए, न कि देर रात वीडियो रिकॉर्ड करके एकतरफा 'मन की बात' करनी चाहिए। खड़गे ने पुरजोर मांग की कि प्रधानमंत्री संसद में आने से पहले शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से बर्खास्त करें, छात्रों पर लाठीचार्ज और पेलेट गन का इस्तेमाल करने के जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करें और छात्रों से माफी मांगें। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन बुनियादी शर्तों के पूरा होने के बाद ही कांग्रेस पार्टी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के विषय पर सरकार के साथ किसी भी प्रकार की विस्तृत चर्चा के लिए तैयार होगी।
छात्रों के प्रदर्शन पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा और संसद में गूंज
नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक के विवाद के साथ-साथ आने वाले दिनों में संसद के भीतर 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर की गई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी पूरी ताकत से गूंजने वाला है। विपक्ष ने साफ संकेत दिए हैं कि वह इस मामले में पुलिस की बर्बरता और दमनकारी नीतियों को लेकर सरकार को पूरी तरह घेरेगा। वहीं, सरकार की ओर से इस बात की तैयारी की जा रही है कि वह राष्ट्रीय राजधानी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के अपने फैसले का पुरजोर बचाव करे। इस प्रकार, संसद के भीतर और बाहर दोनों ही जगहों पर युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे देश की राजनीतिक बहस के केंद्र बिंदु बने हुए हैं।
मकर द्वार पर विपक्षी इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन और भावी रणनीति
मानसून सत्र के दौरान अपनी एकजुटता दिखाने और सरकार पर दबाव बनाने के लिए विपक्षी इंडिया (INDIA) गठबंधन के सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर एक विशाल सांकेतिक विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। इस संयुक्त प्रदर्शन के जरिए विपक्ष यह संदेश देना चाहता है कि वह नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक के शिकार हुए देश के लाखों छात्रों के साथ मजबूती से खड़ा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे संसद के भीतर और बाहर दोनों ही मोर्चों पर संघर्ष जारी रखेंगे। हालांकि, कांग्रेस के सूत्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि पार्टी संसद में पेश किए जाने वाले अन्य महत्वपूर्ण सरकारी विधेयकों को उनके गुण-दोष के आधार पर देखेगी और उन पर होने वाली चर्चाओं में हिस्सा भी ले सकती है, बशर्ते सरकार पहले शिक्षा क्षेत्र में आई इस भारी अव्यवस्था पर अपनी जवाबदेही तय करे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सुनिश्चित करे।
कारगिल के अमर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि और सदन की शुरुआत
शुक्रवार सुबह 11 बजे जब संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हुई, तो सबसे पहले एक अत्यंत गरिमामयी और भावुक क्षण देखने को मिला। लोकसभा में कार्यवाही की शुरुआत कारगिल युद्ध के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए अमर शहीदों को नमन करने के साथ हुई। लोकसभा अध्यक्ष और सदन के सभी सदस्यों ने कारगिल के वीर जवानों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर उन्हें अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पूरा सदन कुछ पलों के लिए देश भक्ति के गहरे भाव में डूब गया। लेकिन इस गौरवशाली और शांतिपूर्ण क्षण के तुरंत बाद, जैसे ही नियमित विधायी और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कामकाज को शुरू करने का प्रयास किया गया, वैसे ही विपक्ष का हंगामा और नारेबाजी फिर से शुरू हो गई। इसके चलते पहले दोपहर 12 बजे तक और फिर अंततः पूरे दिन के लिए सदन की कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा।



















