संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार और विपक्षी गठबंधन के बीच विभिन्न संवेदनशील मुद्दों को लेकर जारी गतिरोध बुधवार को भी थमता हुआ नजर नहीं आ रहा है। नई दिल्ली स्थित संसद परिसर में दोनों सदनों की कार्यवाही की शुरुआत से ही भारी हंगामे की स्थिति बनी हुई है। उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल अयोध्या में स्थित राम मंदिर के चढ़ावे में कथित रूप से हुई चोरी और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस बल के इस्तेमाल को लेकर विपक्षी दल लगातार आक्रामक बने हुए हैं। विपक्षी सांसदों का तर्क है कि इन दोनों गंभीर विषयों पर सदन की कार्यवाही रोककर तत्काल चर्चा कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही, विपक्ष इस पूरे मामले पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संसद के पटल पर जवाब देने और एक आधिकारिक बयान जारी करने की मांग पर अड़ा हुआ है, जिसके कारण लोकसभा और राज्यसभा में बार-बार व्यवधान आ रहा है।
प्रमुख विधायी नोटिस और सांसदों की मांगें
संसदीय कार्यवाही के दौरान जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाने के लिए कई विपक्षी नेताओं ने महत्वपूर्ण नोटिस दाखिल किए हैं। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने उच्च सदन में नियम 267 के तहत एक विशेष प्रस्ताव पेश किया है। इस नोटिस के जरिए उन्होंने पूरे देश में अनिवार्य रूप से लागू किए गए E20 पेट्रोल के फैसले पर व्यापक बहस कराने की मांग उठाई है। संजय सिंह का कहना है कि E20 ईंधन के अनिवार्य उपयोग से आम वाहन मालिकों और उपभोक्ताओं के अधिकारों पर सीधा असर पड़ रहा है, जिससे आम जनता के बीच भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है। इसलिए, उपभोक्ता हितों की रक्षा के लिए इस नीति की समीक्षा और चर्चा आवश्यक है।
दूसरी तरफ, लोकसभा में स्थिति को देखते हुए कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने एक स्थगन प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है। उनका उद्देश्य देश के मौजूदा राजनीतिक तंत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे अवसरवादी दल-बदल को रोकने के लिए एक नए और प्रभावी दल-बदल विरोधी कानून की रूपरेखा पर बहस कराना है। मनीष तिवारी ने तर्क दिया कि बिना किसी वास्तविक वैचारिक सिद्धांत या नीतिगत मतभेद के केवल निजी स्वार्थ के लिए किए जाने वाले दल-बदल पर सख्त कानूनी रोक लगनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नए कानून में लोकतांत्रिक आलोचना और वैचारिक असहमति व्यक्त करने के लिए पर्याप्त स्वतंत्रता और स्थान बना रहना चाहिए।
पिछले सत्र की कार्यवाही और पारित हुए विधेयक
वर्तमान गतिरोध से पहले, मंगलवार को भी दोनों सदनों में विपक्षी सदस्यों के जोरदार हंगामे और नारेबाजी के कारण विधायी कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ था। हालांकि, इस भारी शोर-शराबे और विरोध के बीच भी सरकार कुछ महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में सफल रही। निचले सदन यानी लोकसभा में विनियोग (संख्यांक-3) विधेयक, 2026 को बिना किसी विस्तृत चर्चा के केवल ध्वनिमत के जरिए मंजूरी दे दी गई।
इसी प्रकार, उच्च सदन राज्यसभा में भी संक्षिप्त बहस के पश्चात जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित कर दिया गया। लेकिन विधेयकों के पारित होने के बावजूद सदन में शांति स्थापित नहीं हो सकी। विपक्षी सांसदों के लगातार वेल में आकर प्रदर्शन करने और नारेबाजी करने के कारण राज्यसभा की कार्यवाही को दो बार स्थगित करना पड़ा, और अंततः स्थिति न सुधरने पर पूरे दिन के लिए स्थगित घोषित कर दिया गया।
प्रियंका गांधी वाड्रा का बयान और प्रस्तावित विरोध मार्च
संसद भवन के बाहर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने शासन प्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, "जो पद पर आसीन हैं उनकी जनता के प्रति कुछ जिम्मेदारियां होती हैं। ये लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं है किसी का राज दरबार नहीं है। अगर कुछ हुआ है, बच्चों पर गोलियां चली हैं, पैलेट गन चलाए गए हैं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए हैं तो किसी ना किसी की तो जिम्मेदारी है ना, किसी ने को आदेश दिया होगा। अपनी जिम्मेदारी लें यही इस देश की परंपरा रही है।"
संसदीय गतिरोध को और तेज करने की रणनीति के तहत, 20 जुलाई को विपक्षी दल सड़क पर भी अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा अन्य विपक्षी सांसदों के साथ मिलकर संसद परिसर के भीतर एक विशाल विरोध मार्च की अगुवाई करेंगे। यह मार्च प्रेरणा स्थल पर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा से शुरू होकर संसद के प्रमुख द्वार मकर द्वार तक निकाला जाएगा। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य CJP प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई और अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों को लेकर गृह मंत्री अमित शाह के प्रति अपना कड़ा विरोध दर्ज कराना है।



















