एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों को लेकर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने कहा कि यूसीसी लागू करने का वास्तविक उद्देश्य देश में समानता लाना नहीं, बल्कि गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानूनों को थोपना है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जारी अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया में एआईएमआईएम नेता ने स्पष्ट किया कि भारत की असली ताकत और उसकी आत्मा विविधता में निहित है।
विधि आयोग की रिपोर्ट और राज्य कानूनों पर उठाए सवाल
ओवैसी ने केंद्र सरकार को उसके अपने फैसलों की याद दिलाते हुए कहा कि खुद भाजपा सरकार द्वारा गठित विधि आयोग ने माना था कि देश में यूसीसी न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय। उन्होंने सत्तारूढ़ दल की नीतियों में विरोधाभास का दावा करते हुए कहा कि एक तरफ यूसीसी की बात की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा शासित राज्यों में अशांत क्षेत्र अधिनियम जैसे कानून लागू किए गए हैं। यह कानून हिंदुओं और मुसलमानों के बीच संपत्ति की खरीद-बिक्री पर रोक लगाता है। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि 'लव जिहाद' के नाम पर बनाए गए कानूनों का इस्तेमाल विशेष रूप से ईसाइयों और मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए किया गया है, जिससे साबित होता है कि यूसीसी का मकसद सिर्फ एक समुदाय को घेरना है।
सहयोगी दलों को सलाह और 2019 के आंदोलनों का जिक्र
भाजपा के साथ गठबंधन में शामिल राजनीतिक दलों को चेतावनी देते हुए ओवैसी ने कहा कि अब उनके लिए अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान साबित करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि सहयोगी दलों को यह दिखाना होगा कि वे महज 'छोटी भाजपा' बनकर नहीं रह गए हैं, बल्कि उनकी अपनी स्वतंत्र आवाज भी है। केंद्रीय गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 2019 में अमित शाह के गलत अहंकार और 'क्रोनोलॉजी' वाले बयानों के कारण ही देशभर में सीएए और एनआरसी के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ था। उस स्थिति के बाद खुद प्रधानमंत्री को सामने आकर सफाई देनी पड़ी थी कि कोई राष्ट्रव्यापी एनआरसी लागू नहीं होने जा रहा है।
एसआईआर और नागरिकता साबित करने की प्रक्रिया पर निशाना
एसआईआर प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए ओवैसी ने कहा कि इसके कारण आज आम लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सुनवाई के लिए कागजात लेकर अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने से सबसे ज्यादा परेशानी अल्पसंख्यकों, एससी, एसटी और प्रवासी मजदूरों को उठानी पड़ रही है। उन्होंने असम में लागू की गई एनआरसी प्रक्रिया को विनाशकारी बताते हुए चेतावनी दी कि पूरे देश में एनआरसी लागू करना असम से 100 गुना अधिक नुकसानदेह साबित होगा। ओवैसी ने सवाल उठाया कि जिस देश में 80 करोड़ लोग सरकारी राशन पर निर्भर हैं, वहां आम नागरिकों को कतारों में खड़ा कर कागजों के जरिए नागरिकता साबित करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे वे पूरी तरह से सरकारी अफसरों और बाबुओं की दया पर निर्भर हो जाएंगे।



















