दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगभग एक महीना पहले प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर सड़कों पर उतर आए हैं। 21 जुलाई को प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करने के बाद, 21 अगस्त को राहुल गांधी दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठ गए। उनकी मुख्य मांग है कि छात्र आंदोलन के दौरान इस्तेमाल की गई पैलेट गन के मामले में पुलिस तुरंत एफआईआर दर्ज करे। राहुल गांधी के इस अचानक उठाए गए कदम के बाद भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने उन पर तीखे राजनीतिक हमले शुरू कर दिए हैं और उनके इस विरोध प्रदर्शन की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
जेपी नड्डा ने प्रदर्शन को बताया सस्ती और ध्यान भटकाने वाली राजनीति
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के इस धरने को सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास करार दिया। उन्होंने कहा कि पूरा देश देख रहा है कि कांग्रेस पार्टी किस तरह राजनीतिक हताशा से गुजर रही है। जब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर रहा है, तब कैमरे लेकर थाने के सामने बैठने का कोई औचित्य नहीं बनता। जेपी नड्डा ने सवाल उठाया कि क्या विपक्ष के नेता को देश की सर्वोच्च अदालत पर भी भरोसा नहीं रह गया है?
राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए जेपी नड्डा ने उन्हें कैमराजीवी की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि यह महज एक राजनीतिक तमाशा और हठयोग है। संसद के सत्र के दौरान सरकार हर विषय पर खुली चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन राहुल गांधी चर्चा से पीछे हट गए। नड्डा के अनुसार, जो नेता संसद के पटल पर तर्कसंगत जवाब देने का साहस नहीं रखता, वह अब सड़कों पर प्रदर्शन करके जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश की व्यवस्था संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रियाओं से संचालित होती है, किसी के निजी हठ से नहीं।
वंदे मातरम् विवाद से ध्यान हटाने का आरोप
बीजेपी नेताओं ने राहुल गांधी के इस धरने के समय पर भी सवाल खड़े किए हैं। बीजेपी सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत अराजकता की राजनीति को बढ़ावा दे रहा है। बिना किसी पूर्व सूचना के पुलिस स्टेशन के बाहर धरने पर बैठना कानून-व्यवस्था में बाधा डालने जैसा है।
रवि शंकर प्रसाद और जेपी नड्डा दोनों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी हाल ही में 'वंदे मातरम्' पर अपने स्टैंड को लेकर जनता के बीच घिर चुकी है। देश की जनता कांग्रेस से जवाब मांग रही है। इस राजनीतिक फजीहत और किरकिरी से बचने के लिए राहुल गांधी ने इस नए विवाद को जन्म दिया है ताकि मुख्य मुद्दे से मीडिया और जनता का ध्यान भटकाया जा सके।
सुरक्षा बलों के खिलाफ रुख पर स्मृति ईरानी का हमला
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी राहुल गांधी के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि देश के सुरक्षा बलों पर सवाल उठाना राहुल गांधी की पुरानी आदत रही है। आज वे देश की पैरामिलिट्री फोर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर थाने के बाहर बैठे हैं। जो जवान चौबीसों घंटे देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में मुस्तैद रहते हैं, राहुल गांधी पहले भी उनके मनोबल और निष्ठा पर सवाल खड़ा करते रहे हैं।
प्रफुल्ल पटेल ने रखा लोकतंत्र और युवा नीति पर पक्ष
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने इस पूरे घटनाक्रम पर संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि स्वतंत्र भारत के लोकतंत्र में हर नागरिक और राजनीतिक दल को विरोध दर्ज कराने का पूर्ण अधिकार है। हालांकि, जहां तक युवाओं की समस्याओं का सवाल है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके प्रति पूरी तरह संवेदनशील हैं और लगातार कदम उठा रहे हैं।
प्रफुल्ल पटेल ने ध्यान दिलाया कि केंद्र सरकार ने युवाओं की आकांक्षाओं को पूरा करने में कभी ढिलाई नहीं बरती है। उन्होंने कहा कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना अपने आप में एक बड़ा कदम था, जो यह साबित करता है कि सरकार जनभावनाओं और युवाओं की मांगों का सम्मान करती है। ऐसे में विरोध के नाम पर प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालना उचित नहीं है।



















