राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में संसद मार्ग स्थित पुलिस स्टेशन के बाहर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के घंटों लंबे विरोध प्रदर्शन और भारी राजनीतिक दबाव के बाद दिल्ली पुलिस ने अंततः कनॉट प्लेस पैलेट गन मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस प्रशासन द्वारा एफआईआर दर्ज करने का लिखित आश्वासन मिलने और वैधानिक कागजी कार्रवाई आगे बढ़ने के पश्चात राहुल गांधी अपनी कार में बैठकर पुलिस स्टेशन से रवाना हो गए। इस कदम के साथ ही पिछले कई घंटों से थाने के परिसर में बना उच्च तनाव का माहौल धीरे-धीरे शांत हुआ और वहां जुटे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जमावड़ा समाप्त होने लगा।
भारतीय न्याय संहिता की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई
दिल्ली पुलिस ने घायल छात्र की ओर से दी गई शिकायत को आधार बनाते हुए भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस की दो अत्यंत गंभीर धाराओं के अंतर्गत अज्ञात आरोपियों के विरुद्ध केस पंजीकृत करने की कानूनी प्रक्रिया आरंभ की है। इसमें प्राथमिक धारा बीएनएस 118(1) शामिल की गई है, जो किसी भी खतरनाक हथियार अथवा जानलेवा माध्यम से किसी नागरिक को स्वेच्छा से चोट पहुंचाने के गंभीर अपराध से संबंधित है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार इस धारा में गोली चलाने वाले शस्त्र या किसी अन्य घातक साधन का प्रयोग शामिल माना जाता है। इस अपराध के तहत सजा का निर्धारण पीड़ित को पहुंची चोट की भयावहता और प्रकृति के आधार पर तय किया जाता है।
इसके साथ ही प्राथमिक रिपोर्ट में बीएनएस की धारा 125 को भी जोड़ा गया है। यह धारा किसी नागरिक द्वारा किए गए ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और लापरवाह व्यवहार पर लागू होती है जिससे किसी अन्य व्यक्ति के जीवन या उसकी व्यक्तिगत सुरक्षा को सीधा खतरा उत्पन्न होता है। यदि ऐसे लापरवाह आचरण के परिणामस्वरूप पीड़ित को गंभीर रूप से शारीरिक क्षति पहुंचती है, तो दोषी पाए जाने वाले आरोपी को कानून के तहत अधिकतम 3 वर्ष तक का सश्रम कारावास भुगतना पड़ सकता है और साथ ही आर्थिक जुर्माना भी चुकाना होगा। दिल्ली पुलिस अब इन कानूनी प्रावधानों के तहत मामले की विस्तृत तफ्तीश करेगी और घटना स्थल से साक्ष्य जुटाकर जिम्मेदार तत्वों की पहचान करेगी।
पीड़ित छात्र साहिल की दर्दनाक स्थिति और राहुल गांधी का कड़ा रुख
यह संपूर्ण प्रकरण 20 जुलाई को दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में छात्रों के एक प्रदर्शन के दौरान घटी हिंसक घटना से उत्पन्न हुआ है। प्रदर्शन के दौरान साहिल लोचव नामक एक छात्र पैलेट गन से निकले छर्रों की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। संसद मार्ग थाने पहुंचे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पीड़ित छात्र साहिल और उसकी बिलखती हुई मां के साथ डीसीपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए थे। राहुल गांधी ने स्थिति की भयंकर सच्चाई उजागर करते हुए बताया कि पीड़ित छात्र साहिल के शरीर में 200 से अधिक पैलेट छर्रे धंसे हुए पाए गए हैं।
राहुल गांधी ने मीडिया और पुलिस अधिकारियों के सामने खुलासा किया कि इस हादसे के कारण पीड़ित छात्र की एक आंख की दृश्यता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। इसके अलावा कई घातक छर्रे छात्र के दिल के बेहद करीब फंसे हुए हैं, जिससे उसकी जिंदगी को लगातार खतरा बना हुआ है। राहुल गांधी ने थाने के बाहर धरना देते हुए सवाल दागा कि जब इतना संगीन अपराध हुआ है तो पुलिस केस दर्ज करने में हीलाहवाली क्यों कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों ने खुद माना है कि अपराध घटित हुआ है, फिर भी मामला पंजीकृत करने से बचा जा रहा था। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी यह कह रहे हैं कि उन्हें ऊपर से एफआईआर न दर्ज करने की हिदायत मिली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, प्रदर्शनकारी वहां से नहीं हटेंगे।
अधिवक्ता का बड़ा दावा और दिल्ली पुलिस मुख्यालय का बयान
घायल छात्र साहिल लोचव के अधिवक्ता ने पुलिस प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। वकील के अनुसार, उन्होंने 14 अगस्त को ही सक्षम अधिकारियों के समक्ष इस घटना के संबंध में लिखित शिकायत सौंपी थी। हालांकि, अधिकारियों ने शिकायत पत्र को पढ़ने के उपरांत उसे आवेदक को वापस थमा दिया। अधिवक्ता का दावा है कि थाने के एसएचओ ने फोन पर बातचीत के दौरान स्पष्ट कहा कि ऊपर से सख्त आदेश मिले हैं, इसलिए एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। इसी वजह से शिकायत मिलने के बाद भी कोई आईओ नंबर या आधिकारिक प्राप्ति रसीद जारी नहीं की गई।
वहीं दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस मुख्यालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी की ओर से प्रस्तुत शिकायत को पुलिस ने औपचारिक रूप से प्राप्त कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, 20 जुलाई के घटनाक्रम से जुड़ी सभी प्राथमिक रिपोर्ट अदालत की प्रत्यक्ष निगरानी और संज्ञान के तहत हैं। इसमें पैलेट गन के इस्तेमाल का विषय भी सम्मिलित है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शीर्ष अधिकारी यह कानूनी परामर्श ले रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आलोक में इस मामले में नई प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है या नहीं।
संसद मार्ग थाने पर दिनभर बना रहा हाई वोल्टेज ड्रामा
राहुल गांधी के संसद मार्ग थाने पर धरने की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता मौके पर एकत्रित हो गए। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस विभाग ने थाने के चारों तरफ कड़ी बैरिकेडिंग कर दी और अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात कर दिया। इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचीं। थाने के भीतर एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम दर्ज किया गया जब प्रियंका गांधी वाड्रा डीसीपी कार्यालय के कमरे के अंदर गईं और कुछ समय बाद बाहर आईं।
बाहर आते ही प्रियंका गांधी वाड्रा ने राहुल गांधी के समीप जाकर उनके कान में कुछ गोपनीय चर्चा की और इसके तुरंत बाद वे दोबारा डीसीपी कार्यालय के कमरे में लौट गईं। इस दौरान वहां मौजूद मीडियाकर्मियों और समर्थकों की नजरें दोनों शीर्ष नेताओं की हर हरकत पर टिकी रहीं। कांग्रेस पार्टी का मत है कि छात्र साहिल विरोध प्रदर्शन के वक्त पैलेट गन के घातक छर्रों से जख्मी हुआ और पुलिस को निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए। विपक्षी नेता ने पूर्व में भी इस प्रश्न को देश की संसद के भीतर उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा था कि छात्र प्रदर्शन पर पैलेट गन चलाने की अनुमति किसने दी थी।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का तीखा पलटवार
राहुल गांधी के इस विरोध प्रदर्शन पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने जोरदार हमला बोला है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रदर्शन पर प्रहार करते हुए कहा कि पूरा देश राहुल गांधी की सस्ती और ध्यान भटकाने वाली राजनीति को देख रहा है। जेपी नड्डा ने कहा, "पूरा देश एक बार फिर राहुल गांधी की सस्ती और ध्यान भटकाने वाली राजनीति देख रहा है।" उन्होंने स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत पूर्व में ही पूरे प्रकरण का संज्ञान ले चुकी है और एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन कर चुकी है।
जेपी नड्डा ने प्रश्न दागा कि जब देश की उच्चतम न्यायिक संस्था पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रही है और दिल्ली पुलिस का अपराध दस्ता (क्राइम ब्रांच) विस्तृत तफ्तीश में जुटा है, तो राहुल गांधी थाने के बाहर बैठकर क्या साबित करना चाहते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का मकसद न्याय दिलाना नहीं, बल्कि मीडिया में बने रहने के लिए हंगामा खड़ा करना और कानून व्यवस्था को चुनौती देना है। इसी तरह भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने राहुल गांधी पर बिना अनुमति और बिना पूर्व सूचना के थाने में बैठकर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया।
इसके अलावा, भाजपा नेता आर पी सिंह का दावा था कि विपक्षी नेता राष्ट्रगीत वंदे मातरम से जुड़े विषय से जनमानस का ध्यान भटकाने हेतु यह ड्रामा रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कमेटी गठित किए जाने के बाद राहुल गांधी को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। वहीं, दिल्ली के मंत्री आशीष सूद ने कहा कि राहुल गांधी इस तरह की गतिविधियों के माध्यम से अपनी और कांग्रेस पार्टी की बची-कुची राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने की निरर्थक कोशिश कर रहे हैं। इसके विपरीत, कांग्रेस सांसद मल्लू रवि ने सरकार को घेरते हुए कहा कि देश में अराजक शासन चल रहा है जहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन का इस्तेमाल किया जा रहा है।



















