बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर बुधवार को भारी राजनीतिक उथल-पुथल और अराजकता देखने को मिली। शहर में एक ही दिन में दो बड़े प्रदर्शन हुए, जिन्होंने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया। जहां एक तरफ छात्रों ने शिक्षा प्रणाली की खामियों को लेकर मोर्चा खोला, वहीं दूसरी ओर राज्य के दो प्रमुख राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आपस में बुरी तरह भिड़ गए। सबसे ज्यादा तनावपूर्ण स्थिति अशोक राजपथ पर देखने को मिली, जहां बात जुबानी जंग से शुरू होकर हिंसक संघर्ष तक पहुंच गई। इस अचानक हुए बवाल के कारण आसपास के इलाके में दहशत का माहौल बन गया और लोग अपनी सुरक्षा के लिए भागते नजर आए।
यह पूरा राजनीतिक संग्राम बिहार में कांग्रेस पार्टी के मुख्य कार्यालय, सदाकत आश्रम के ठीक बाहर शुरू हुआ। तनाव उस वक्त अपने चरम पर पहुंच गया, जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के समर्थकों की एक भारी भीड़ कांग्रेस दफ्तर की ओर मार्च करते हुए पहुंची। यह कोई स्थानीय या अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि एक सुनियोजित देशव्यापी विरोध का हिस्सा था। दरअसल, मंगलवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा प्रदर्शन किया था। इसी घटना के विरोध में बीजेपी ने बुधवार को पूरे देश में कांग्रेस कार्यालयों के घेराव का आह्वान किया था। इसी कड़ी में, पटना में भी बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता अपना विरोध दर्ज कराने के लिए सदाकत आश्रम के पास पहुंच गए थे।
नारेबाजी के बाद शुरू हुआ पथराव
जैसे ही बीजेपी समर्थक अशोक राजपथ स्थित कांग्रेस दफ्तर के गेट पर पहुंचे, वहां का माहौल तेजी से गरमा गया। अपने कार्यालय के बाहर इतनी बड़ी संख्या में विरोधियों को देखकर कांग्रेस कार्यकर्ता भी बड़ी तादाद में बाहर निकल आए। इस तरह दोनों प्रतिद्वंद्वी दलों के लोग बिल्कुल आमने-सामने खड़े हो गए। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शुरुआत में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। लेकिन यह जुबानी नोकझोंक ज्यादा देर तक सीमित नहीं रही और कुछ ही मिनटों में स्थिति पूरी तरह से बेकाबू हो गई।
आक्रामक नारेबाजी ने जल्द ही एक हिंसक झड़प का रूप ले लिया। दोनों तरफ के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर ईंट और पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। कई लोग हाथों में लाठी-डंडे लेकर अपने राजनीतिक विरोधियों पर हमला करने के लिए दौड़ पड़े। इस अचानक भड़की हिंसा की वजह से पूरे इलाके में भारी अफरा-तफरी मच गई। लगातार हो रही पत्थरबाजी और लाठी-डंडों से हो रहे हमलों को देखकर वहां से गुजर रहे आम लोगों और स्थानीय निवासियों में भयंकर खौफ फैल गया। सड़क पर काफी देर तक यह खतरनाक स्थिति बनी रही, जिससे यातायात और सामान्य कामकाज पूरी तरह ठप हो गया।
पुलिस की कार्रवाई और छात्रों का विरोध
सड़क पर हो रही इस भयंकर हिंसा की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग हरकत में आ गया। भारी संख्या में पुलिस बल को तुरंत घटनास्थल पर भेजा गया। पुलिस अधिकारियों के सामने हिंसक रूप से लड़ रही भीड़ को अलग करने की एक बड़ी चुनौती थी। हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए पुलिस ने फौरन एक सुरक्षा घेरा तैयार किया और दोनों गुटों के बीच एक भौतिक दीवार खड़ी कर दी। पुलिस की इस सख्त कार्रवाई के बाद आखिरकार काफी जद्दोजहद के बाद इस बेकाबू स्थिति पर नियंत्रण पाया जा सका। हालांकि, माहौल शांत होने के बाद भी पूरे इलाके में लंबे समय तक तनाव साफ महसूस किया जा रहा था।
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बता दिया है, लेकिन इस भयंकर पथराव और लाठीचार्ज के दौरान कई लोगों के घायल होने की खबर सामने आई है। अभी तक स्थानीय पुलिस की तरफ से कोई भी विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, जिसमें घायलों की सटीक संख्या या उपद्रवियों के खिलाफ की जा रही कानूनी कार्रवाई का पूरा ब्यौरा हो। इस राजनीतिक हिंसा के अलावा, बुधवार को पटना में एक और बड़ा हंगामा हुआ। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) के कार्यकर्ताओं ने नीट पेपर लीक के विवादित मुद्दे को लेकर लोकभवन की तरफ एक बड़ा मार्च निकाला। इस छात्र आंदोलन और राजनीतिक झड़प ने मिलकर बुधवार के दिन को पटना के लिए एक बेहद अशांत और हंगामेदार दिन बना दिया।



















