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फारूक अब्दुल्ला का अपनी ही पार्टी के सांसद आगा रुहुल्लाह पर फूटा गुस्सा, बोले- संसद से इस्तीफा दें और नया जनादेश मांगेंराजनीति
25 अग॰ 2026, 5:58 pm (17 दिन पहले)· 2

फारूक अब्दुल्ला का अपनी ही पार्टी के सांसद आगा रुहुल्लाह पर फूटा गुस्सा, बोले- संसद से इस्तीफा दें और नया जनादेश मांगें

नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह मेहदी को लोकसभा से इस्तीफा देकर नया जनादेश मांगने की चुनौती दी है। इस पर सांसद रुहुल्लाह ने कहा है कि वह कुछ दिनों में इस अपील का जवाब देंगे।

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अपनी ही पार्टी के लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सांसद को खुली चुनौती देते हुए कहा है कि अगर उन्हें अपनी जीत पर इतना ही भरोसा है और उन्हें लगता है कि उनका चुनाव किसी व्यक्तिगत समर्थन के बल पर जीता गया था, तो उन्हें तुरंत संसद से इस्तीफा दे देना चाहिए और एक बार फिर से जनता के बीच जाकर नया जनादेश हासिल करना चाहिए।

अनुच्छेद 370 और राजनीतिक बयानों पर टकराव

मीडिया से बातचीत के दौरान फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी के भीतर और बाहर चल रही चर्चाओं पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि रुहुल्लाह को अनुच्छेद 370 जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से किसी ने नहीं रोका था, लेकिन असली विवाद उस तरीके को लेकर था जिससे सांसद अपनी राजनीतिक बातें जनता के सामने रख रहे थे। फारूक अब्दुल्ला ने चुनौती भरे लहजे में कहा कि यदि रुहुल्लाह को वास्तव में यह विश्वास है कि अनुच्छेद 370 वापस लाया जा सकता है, तो उन्हें इस विषय को संसद के पटल पर पुरजोर तरीके से उठाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने रुहुल्लाह के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि उनकी चुनावी जीत पूरी तरह से उनके अपने व्यक्तिगत समर्थन के आधार पर हुई थी। फारूक अब्दुल्ला ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह संसद से इस्तीफा दें और जनता के बीच वापस लौटकर आएं, तब देखा जाएगा कि उन्हें कौन वोट देता है।

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आगा रुहुल्लाह ने दी प्रतिक्रिया

पार्टी अध्यक्ष की तरफ से आई इस कड़ी चुनौती के बाद श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने भी मीडिया के सामने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वह नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की तरफ से दिए गए इस्तीफे के बयान और अपील का आने वाले कुछ दिनों के भीतर विस्तार से जवाब देंगे। इसके साथ ही उन्होंने अपने बयान में वरिष्ठ नेता के प्रति गहरा सम्मान और आदर भी व्यक्त किया। रुहुल्लाह ने कहा कि ऐसा कभी नहीं हो सकता कि फारूक अब्दुल्ला उनसे कुछ मांगें और वह उनकी बात को नजरअंदाज कर दें। उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह अपने वरिष्ठ नेता को कभी खाली हाथ नहीं लौटाना चाहते हैं क्योंकि उन्होंने अपनी इस उम्र में कुछ मांगा है, और वह उनके हर फैसले का सम्मान करते हैं। जब संवाददाताओं ने उनसे यह जानना चाहा कि क्या वह फारूक अब्दुल्ला की इस खुली चुनौती को स्वीकार करेंगे, तो उन्होंने दोहराया कि वह कुछ दिनों का समय लेकर इसका जवाब देंगे।

कहाँ से शुरू हुआ यह पूरा विवाद

यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार बढ़ रहे सार्वजनिक मतभेदों की पृष्ठभूमि में सामने आया है। दोनों पक्षों के बीच यह वैचारिक दूरी मुख्य रूप से पार्टी के राजनीतिक रुख, विशेष रूप से अनुच्छेद 370 की बहाली, राज्य के दर्जे की वापसी और जम्मू-कश्मीर के संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर बनी हुई है। इसके अलावा, सांसद आगा ने हाल ही के दिनों में सरकार के कामकाज के तौर-तरीकों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरक्षण की नीति और बिजली की बढ़ी हुई दरों जैसे आम जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर खुलकर अपना पक्ष रखा है, जिसके बाद से पार्टी के भीतर आंतरिक कलह खुलकर सामने आ गई है।

सवाल-जवाब

फारूक अब्दुल्ला ने आगा रुहुल्लाह को क्या चुनौती दी है?
फारूक अब्दुल्ला ने आगा रुहुल्लाह से लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर जनता से नया जनादेश मांगने को कहा है।
आगा रुहुल्लाह किस पार्टी से सांसद हैं?
आगा रुहुल्लाह नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी से श्रीनगर के लोकसभा सांसद हैं।
आगा रुहुल्लाह ने फारूक अब्दुल्ला के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
आगा रुहुल्लाह ने कहा है कि वह वरिष्ठ नेता का बहुत सम्मान करते हैं और इस अपील का आने वाले कुछ दिनों में जवाब देंगे।
फारूक अब्दुल्ला और आगा रुहुल्लाह के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या है?
यह विवाद अनुच्छेद 370 की बहाली, राज्य के दर्जे, और आरक्षण व बिजली दरों जैसे मुद्दों पर पार्टी के रुख को लेकर चल रहे मतभेदों के कारण उपजा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

जम्मू-कश्मीर की राजनीति में अनुच्छेद 370 और नीतिगत मामलों को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर उपजा यह वैचारिक मतभेद सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक स्थिरता के लिहाज से संवेदनशील है। एक क्राइम और राजनीतिक मामलों के विश्लेषक के रूप में, यह देखना अहम होगा कि रुहुल्लाह का आगामी जवाब पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर क्या असर डालता है और क्या यह विवाद संगठनात्मक कलह को और गहरा करेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर चल रहा यह आंतरिक घमासान केवल राजनीतिक मतभेद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम क्षेत्रीय स्थिरता और शासन व्यवस्था पर पड़ सकते हैं। एक वरिष्ठ संपादक के रूप में मेरा मानना है कि अनुच्छेद 370 और नीतिगत मुद्दों पर नेतृत्व और सांसद के बीच की यह तनातनी आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा को नया मोड़ दे सकती है। यदि यह गतिरोध सुलझता नहीं है, तो इससे न केवल संगठनात्मक एकता कमजोर होगी, बल्कि आर्थिक और विकासात्मक प्राथमिकताओं से भी प्रशासनिक ध्यान भटक सकता है।

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