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फिल्म जगत के पाकिस्तान प्रेम से राहुल गांधी पर प्रहार तक, कंगना रनौत ने कई मुद्दों पर साधा निशानाराजनीति
12 अग॰ 2026, 8:46 pm (30 दिन पहले)· 2

फिल्म जगत के पाकिस्तान प्रेम से राहुल गांधी पर प्रहार तक, कंगना रनौत ने कई मुद्दों पर साधा निशाना

बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने बॉलीवुड में पाकिस्तान के प्रति कथित झुकाव, विपक्ष के नेता राहुल गांधी के संसदीय आचरण और हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार द्वारा लगाए गए नए ईंधन सेस को लेकर तीखा हमला बोला है।

भारतीय जनता पार्टी की मंडी से सांसद और प्रसिद्ध फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिए अपने ताजा बयानों से राजनीतिक और सिनेमा जगत के गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने कला क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अभिनेताओं के रुख, संसद भवन में विपक्षी दल के रवैये तथा राज्य सरकारों की आर्थिक नीतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। अपने वक्तव्य में कंगना रनौत ने फिल्म उद्योग के एक वर्ग पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और साथ ही लोकसभा में विपक्ष के नेता की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए।

फिल्म उद्योग की चुप्पी और पाकिस्तान के प्रति रुख पर उठाए सवाल

दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह द्वारा छात्र आंदोलनों के संदर्भ में दी गई टिप्पणियों का जवाब देते हुए कंगना रनौत ने कहा कि मनोरंजन उद्योग का रवैया लंबे समय से पक्षपातपूर्ण रहा है। उन्होंने स्मरण कराया कि जब संसद भवन के निकट अशांति की स्थितियां बनी थीं अथवा जनप्रतिनिधियों के आवासों का घेराव हुआ था, उस समय उद्योग के बड़े नाम पूरी तरह मौन रहे थे। उनका तर्क था कि राजधानी के जंतर मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शनों के प्रति सहानुभूति जताने वाले लोग झारखंड राज्य में मासूम बच्चों पर होने वाले कथित अत्याचारों के समय खामोशी क्यों साध्य रहते हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि क्या वे पीड़ित बच्चे युवा पीढ़ी का हिस्सा नहीं हैं।

इसी क्रम में कंगना रनौत ने स्वतंत्रता के बाद भी फिल्म उद्योग के एक वर्ग में पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रति दिखने वाले विशेष लगाव पर गहरा आश्चर्य प्रकट किया। उनका कहना था कि अनेक फिल्मों, सार्वजनिक साक्षात्कारों और बयानों में ऐसा दृष्टिकोण बार-बार उजागर होता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की जनता के समक्ष इस प्रकार की मानसिकता का औचित्य स्पष्ट किया जाना चाहिए और इस पाखंड को अब स्वीकार नहीं किया जा सकता।

संसदीय गरिमा और विपक्ष के नेता पर तीखे बाण

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयानों और आचरण की आलोचना करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि देश के सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच की गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि संसदीय इतिहास में इस प्रकार का माहौल पहले कभी नहीं देखा गया जहां लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का उपहास उड़ाया जाए। कंगना रनौत ने ध्यान दिलाया कि एक तरफ विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से जटिल विषयों पर विस्तृत उत्तर की मांग करता है, वहीं दूसरी ओर जब गृह मंत्री जवाब देने खड़े होते हैं तो विपक्ष के नेता सदन में उपस्थित रहने से बचते हैं।

कंगना रनौत ने दावा किया कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में इस प्रकार का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार विपक्ष के नेता के रूप में उनके वर्तमान कार्यकाल को अंतिम साबित कर सकता है। उन्होंने उल्लेख किया कि देश के मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार स्पष्ट और प्रचंड जनादेश दिया है। इसके बावजूद विपक्षी नेतृत्व अविश्वास का माहौल बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय जॉर्ज सोरोस जैसी ताकतों के प्रभाव में देश की स्थिरता को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निरंतर चुनावी विफलताओं के बाद भी केवल पारिवारिक पृष्ठभूमि के आधार पर नेतृत्व पद पर बने रहना राजनीतिक विश्वसनीयता को कमजोर करता है।

कॉकरोच और गटर संबंधी बयान पर दी गई सफाई

युवा वर्ग को लेकर पूर्व में सामने आई अपनी एक टिप्पणी पर उपजे विवाद को खारिज करते हुए मंडी की सांसद ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनके वक्तव्य को गलत संदर्भ में प्रस्तुत किया गया था और उन्होंने देश के समस्त युवाओं के विषय में कोई प्रतिकूल बात नहीं कही थी। कंगना रनौत के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वयं के लिए आपत्तिजनक शब्दावली का प्रयोग करता है और उस पर कोई प्रतिक्रिया दी जाती है तो उसे संपूर्ण युवा समाज से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संकेत केवल उस सीमित वर्ग की ओर था जो नशीले पदार्थों के सेवन, अवैध सट्टेबाजी, जुए और इंटरनेट के डार्क वेब जैसे अपराधों में संलिप्त होकर अपना जीवन गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि समाज के एक भटके हुए छोटे हिस्से की समस्याओं पर चर्चा करना पूरे देश के होनहार युवाओं का अपमान करना नहीं है, बल्कि उस सामाजिक बुराई की ओर ध्यान आकर्षित करना है।

हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति और सेस का विरोध

अपने गृह राज्य हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में बात करते हुए कंगना रनौत ने सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार पर तीखा प्रहार किया। राज्य सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल पर अनाथ बच्चों तथा असहाय माताओं के कल्याण के नाम पर लगाए गए 60 पैसे प्रति लीटर के अतिरिक्त सेस पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य इस समय गंभीर आर्थिक तंगी से गुजर रहा है और प्रशासनिक विफलता को छुपाने के लिए आम जनता पर नए-नए कर थोपे जा रहे हैं।

बीजेपी सांसद ने कहा कि जनकल्याण और सामाजिक सहायता के नाम पर लिए जा रहे इस राजस्व का सही उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पूर्व राज्य सरकार देवदार के बहुमूल्य वृक्षों की नीलामी की योजनाओं पर विचार कर रही थी और अब ईंधन पर सेस लगाकर नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य की जनता इस प्रशासनिक व्यवस्था से ऊब चुकी है और आने वाले समय में प्रदेश में पुन: बीजेपी की डबल इंजन सरकार की वापसी होगी।

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सवाल-जवाब

कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह और बॉलीवुड पर क्या सवाल उठाए?
कंगना रनौत ने नसीरुद्दीन शाह के बयानों को नफरत भरा बताते हुए फिल्म इंडस्ट्री पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया और पूछा कि बंटवारे के इतने सालों बाद भी बॉलीवुड में पाकिस्तान के प्रति मोह क्यों नजर आता है।
राहुल गांधी के संसदीय रवैये पर कंगना ने क्या कहा?
कंगना रनौत ने कहा कि राहुल गांधी संसद का मजाक बना रहे हैं, जहां वे गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगते हैं लेकिन खुद जवाब सुनने के वक्त मौजूद नहीं रहते।
कंगना रनौत ने अपने कॉकरोच और गटर वाले बयान पर क्या सफाई दी?
कंगना ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सभी युवाओं को गलत नहीं कहा था, बल्कि केवल नशे, जुए और डार्क वेब की लत में डूबे भटके हुए वर्ग के संदर्भ में बात की थी।
हिमाचल प्रदेश सरकार पर कंगना ने किस बात का विरोध किया?
उन्होंने हिमाचल की सुक्खू सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल पर अनाथों और विधवाओं के नाम पर लगाए गए 60 पैसे के अतिरिक्त सेस का विरोध करते हुए इसे जनता पर टैक्स का बोझ बताया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

कंगना रनौत के इन बयानों से सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और विधायी अनुशासन के मोर्चों पर राजनीतिक बयानबाजी तेज होना तय है। एक तरफ बॉलीवुड और पाकिस्तान के प्रति रुख को लेकर वैचारिक बहस छिड़ सकती है, तो दूसरी तरफ संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ सकता है। यह देखना अहम होगा कि क्या विपक्षी नेतृत्व इन आरोपों पर कानूनी या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है या यह मामला केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित रहता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

कंगना रनौत के इन बयानों से राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में बहस तेज होना तय है। एक तरफ सिनेमाई विचारधारा और राष्ट्रवाद पर छिड़ी यह वैचारिक जंग सार्वजनिक जीवन में ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकती है, वहीं संसद के भीतर विपक्ष की कार्यशैली पर उठाए गए सवाल विधायी कामकाज और राजनीतिक आचरण को लेकर नए गतिरोध का संकेत देते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

कंगना रनौत द्वारा उठाए गए ये मुद्दे केवल राजनीतिक और सांस्कृतिक बहसों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कॉरपोरेट और मनोरंजन जगत की ब्रांड वैल्यू तथा निवेशकों की धारणा को भी प्रभावित कर सकते हैं। जब फिल्म उद्योग या राजनीतिक मंचों पर वैचारिक ध्रुवीकरण बढ़ता है, तो उसका सीधा असर मीडिया और मनोरंजन कंपनियों के शेयरों, उपभोक्ता बाजार और मीडिया निवेश पर पड़ता है। ऐसे विवादित बयान मीडिया सेक्टर में अनिश्चितता पैदा करते हैं, जिससे संस्थागत निवेशकों का रुख भी सतर्क हो जाता है। आने वाले समय में कॉरपोरेट घरानों और विज्ञापनदाताओं को भी अपनी मार्केटिंग रणनीतियों में इन सामाजिक-राजनीतिक तनावों को ध्यान में रखना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

कंगना रनौत के इन बयानों से राजनीतिक और सांस्कृतिक गलियारों में बहस तेज़ होना तय है। फिल्म जगत की विचारधारा और संसद में पक्ष-विपक्ष के टकराव का यह मामला अब सार्वजनिक सुरक्षा और राष्ट्रीय हित के मंच पर आ गया है, जिससे आने वाले दिनों में दोनों मोर्चों पर सियासी तनातनी और बढ़ने के पूरे आसार हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

कंगना रनौत द्वारा उठाए गए सांस्कृतिक मुद्दों और विपक्षी आचरण पर सवाल का यह राजनीतिक टकराव अब कॉर्पोरेट और वित्तीय गलियारों में भी चर्चा का विषय बन गया है। मनोरंजन उद्योग के वैचारिक विभाजन और संसद में नीतिगत गतिरोध का सीधा असर मीडिया और ब्रांड इकोनॉमी पर पड़ता है। कॉरपोरेट जगत और निवेशक इस बात पर नजर रख रहे हैं कि ऐसे वैचारिक संघर्ष आने वाले समय में बाजार की धारणा और मीडिया स्टॉक्स के प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करते हैं।

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