देश की राजनीति में 'रिजीम चेंज' या सत्ता परिवर्तन के मुद्दे को लेकर घमासान मचा हुआ है। वकील प्रशांत भूषण के एक बयान के बाद से भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच नेताओं के बयान लगातार सामने आ रहे हैं, जिसमें देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और विदेशी घटनाओं के उदाहरणों पर बहस छिड़ गई है।
शिवराज सिंह चौहान का विपक्ष पर कड़ा प्रहार
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के तेवरों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव जीतने में असमर्थ होने के कारण विपक्ष देश में अराजकता और विभाजन पैदा करने की साजिश रच रहा है। उनके अनुसार, पड़ोसी देश बांग्लादेश में हुई घटनाओं के बाद से ही इस तरह की मानसिकता को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। समाज में भ्रम, झूठ और अफवाहों का सहारा लेकर आम लोगों को भड़काने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने इतना झूठ बोलने वाला इंसान कभी नहीं देखा और बाकी लोग केवल उनके मोहरे मात्र हैं, जिनके नाम चाहे जो भी हों लेकिन उनकी कार्यशैली एक जैसी ही है।
शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा कि कुछ गिने-चुने लोग देश की शांति व्यवस्था को बिगाड़ना चाहते हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि भारत कोई दूसरा देश नहीं है। यहां भगवान राम के आदर्शों और भगवान कृष्ण की राज्य-संचालन से जुड़ी शिक्षाओं का पूरा सम्मान किया जाता है। ऐसी देशविरोधी और नकारात्मक कोशिशें कभी सफल नहीं हो सकतीं, और देश की जनता ऐसे बेकार लोगों को पूरी तरह से नकार देगी।
विजय वडेट्टीवार ने किया पलटवार
कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इस तीखी आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि प्रशांत भूषण ने जो भी कहा, वह गलत नहीं था। उनका तर्क था कि देश में बढ़ती महंगाई, कर्ज के बढ़ते बोझ, बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या और महिलाओं एवं लड़कियों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों को देखते हुए सत्ता परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की जा रही है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों से क्यों डर रही है। क्या प्रशासन को इस बात का डर सता रहा है कि देश के युवा अपनी आवाज उठाने के लिए एकजुट होकर सड़कों पर उतरेंगे, जिससे सत्ता पर सरकार की पकड़ कमजोर हो जाएगी।
उन्होंने चेतावनी दी कि इन आंदोलनों को जितना अधिक दबाने का प्रयास किया जाएगा, वे उतनी ही तेजी से फैलेंगे और अंततः सरकार को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। किसी भी बड़ी समस्या का समाधान केवल आपसी बातचीत और विचार-विमर्श के माध्यम से ही निकाला जा सकता है, जिसे सत्ता में बैठे लोगों को जल्द से जल्द समझना चाहिए।
प्रह्लाद जोशी का नेपाल और बांग्लादेश का हवाला
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत एक मजबूत और परिपक्व लोकतांत्रिक देश है। यहां लोकतंत्र की जड़ें कांग्रेस पार्टी या आजादी के बाद के आधुनिक इतिहास से नहीं जुड़ी हैं, क्योंकि भारत अपने स्वभाव और संस्कृति से ही एक लोकतांत्रिक राष्ट्र रहा है और यहां के नागरिकों को इस व्यवस्था में अटूट विश्वास है। भारत कभी भी पाकिस्तान, बांग्लादेश या नेपाल जैसे देशों के हालातों के रास्ते पर नहीं चल सकता।
उन्होंने AISA प्रमुख नेहा बोरा ने कहा कि बांग्लादेश ने हमें प्रेरित किया है का जिक्र करते हुए कहा कि वहां क्या स्थिति उत्पन्न हुई थी, यह किसी से छिपी नहीं है। सबसे पहले एक चुनी हुई सरकार को जबरन गिराया गया और तत्कालीन प्रधानमंत्री को देश छोड़कर भागना पड़ा। इसके बाद वहां अल्पसंख्यकों विशेषकर हिंदुओं को निशाना बनाया गया और उनकी निर्मम हत्याएं की गईं। क्या विरोधी दल भारत में भी वैसी ही स्थिति दोहराना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई चुनाव लड़कर शीर्ष पदों पर पहुंचना चाहता है, तो उसे जमीन पर उतरकर कड़ी मेहनत करनी होगी।
कपिल सिब्बल का बयान
राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने भी इस बहस में कूदते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन की मांग केवल कांग्रेस पार्टी नहीं बल्कि देश की आम जनता कर रही है और अब इस मौजूदा सरकार के कार्यकाल के पूरे होने का समय आ गया है। शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करना प्रत्येक नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि देश की आम जनता को यह महसूस होने लगे कि सरकार की नीतियां जनविरोधी हैं और संसद के भीतर उनकी आवाज को दबाया जा रहा है, तो नागरिकों के पास अपना विरोध दर्ज कराने का पूरा अधिकार होना चाहिए।



















