राजस्थान के पाली जिले में पानी की हर बूंद को बचाने और जल संसाधन के नुकसान पर लगाम लगाने के लिए एक अहम पहल शुरू की गई है। इसके तहत जिले के चार प्रमुख बांधों और उनके नहर तंत्र का कायाकल्प किया जाएगा। जल संसाधन विभाग इस पूरी परियोजना पर 702.69 लाख रुपये यानी लगभग 7.03 करोड़ रुपये की राशि खर्च करने जा रहा है। इस योजना का मुख्य मकसद रिसाव और सीपेज की वजह से बर्बाद होने वाले पानी को बचाना, जल संरचनाओं की उम्र बढ़ाना और उपलब्ध पानी का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।
इस पूरे विकास अभियान के दौरान कच्ची नहरों को सीमेंटेड और पक्का किया जाएगा, और जिन इलाकों में पानी रिसने की समस्या ज्यादा है, वहां विशेष जल निकासी प्रणालियां विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही बांधों की दीवारों और किनारों को मजबूत करने पर भी पूरा जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इन सुधारों से न केवल भूजल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था भी अधिक सुचारू हो जाएगी।
बांधों की पाल और संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण
इस मेगा योजना के तहत तखतगढ़ बांध और सिंदरू बांध की पाल की चौड़ाई को मौजूदा 3 मीटर से बढ़ाकर 4.5 मीटर किया जाएगा। इन दोनों स्थानों पर पाल पर मजबूत पत्थरों की पिचिंग भी करवाई जाएगी, जिससे भारी पानी के दबाव को झेलने की उनकी क्षमता में इजाफा होगा। इन तमाम इंजीनियरिग कार्यों के अलावा नहरों की आवश्यक मरम्मत भी की जाएगी, ताकि पानी का प्रवाह बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके और अंतिम छोर के इलाकों तक आसानी से पहुंच सके।
हेमावास और बाणियावास बांध में विशेष कार्य
हेमावास बांध के मामले में, जो पाली शहर के बेहद करीब स्थित है, उसकी 3 किलोमीटर लंबी गुलाबपुरा माइनर को पूरी तरह पक्का किया जाएगा जो अभी तक कच्ची है। इस बदलाव से मिट्टी द्वारा पानी के सोखे जाने की प्रक्रिया रुकेगी और कृषि कार्यों के लिए पानी की बचत होगी। वहीं बाणियावास बांध पर सीपेज की गंभीर समस्या से निपटने के लिए 3 किलोमीटर लंबी टो-ड्रेन बनाई जाएगी। इसके अलावा ओवरफ्लो स्लूस गेट की मरम्मत का काम और मिट्टी की पाल को ठीक करने का काम भी इस परियोजना का हिस्सा है, जिससे आसपास के गांवों को जलभराव से राहत मिलेगी।
टेंडर प्रक्रिया और अधिकारियों का रुख
जल संसाधन विभाग ने हेमावास और बाणियावास समेत अन्य स्थानों पर होने वाले इन सुधार कार्यों के लिए आधिकारिक तौर पर टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग के पाली स्थित कार्यालय के अधिशासी अभियंता शंकरलाल राठौड़ ने जानकारी दी कि इन सभी प्रयासों का मूल केंद्र बिंदु सीपेज और रिसाव के कारण होने वाले जल नुकसान को न्यूनतम स्तर पर लाना है। अधिकारियों का विश्वास है कि इन संरचनाओं के मजबूत होने से आने वाले दिनों में क्षेत्र की पेयजल आपूर्ति और सिंचाई प्रणालियों में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा।



















