पंजाब में पेपर लीक का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। यह राजनीतिक गर्माहट उस समय शुरू हुई है जब सीजेपी प्रोटेस्ट के खत्म होने के 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे। खास तौर पर भारतीय जनता पार्टी पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर पूरी ताकत से हमलावर हो गई है। भाजपा नेताओं का आरोप है कि राज्य में पेपर लीक हुआ है और इसके लिए शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस को तुरंत अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। इस पूरे घटनाक्रम के बीच भाजपा ने आम आदमी पार्टी पर दोहरे मापदंड अपनाने का गंभीर आरोप भी मढ़ा है। वहीं, अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने भी अभिजीत दिपके का एक वीडियो शेयर करते हुए यह सवाल उठाया है कि पंजाब के शिक्षा मंत्री कब अपना इस्तीफा देंगे।
पंजाब की राजनीति में यह नया विवाद ठीक ऐसे वक्त पर उठा है जब हाल ही में NEET पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर चला एक बड़ा आंदोलन समाप्त हुआ था। उस राष्ट्रव्यापी आंदोलन के परिणामस्वरुप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। अब इसी नजीर को सामने रखते हुए भाजपा आम आदमी पार्टी को घेर रही है। भाजपा के नेताओं का यह तीखा सवाल है कि यदि केंद्रीय स्तर पर मंत्रियों के लिए जवाबदेही का सिद्धांत पूरी तरह लागू होता है, तो आखिर पंजाब के शिक्षा मंत्री अपनी नैतिक और प्रशासनिक जवाबदेही स्वीकार करने से क्यों बच रहे हैं।
इस पूरे विवाद के केंद्र में पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 17 जुलाई को फार्मेसी अफसरों की भर्ती के लिए आयोजित की गई एक लिखित परीक्षा है। इस परीक्षा के दौरान फरीदकोट स्थित बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के परीक्षा केंद्र पर नकल पकड़े जाने का मामला सामने आया था। यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. अरविंद के अनुसार यह हाईटेक ब्लूटूथ के जरिए नकल किए जाने का एक सुनियोजित मामला था। इस गड़बड़ी को सबसे पहले यूनिवर्सिटी के सचल दस्ते ने पकड़ा था। इसके बाद मिले पुख्ता इनपुट के आधार पर पुलिस ने 28 अन्य संदिग्धों को भी अपनी हिरासत में ले लिया। इसके अलावा इस नकल रैकेट का संचालन करने वाले 7 कथित सरगनाओं को भी दबोचा गया। हालांकि विपक्षी दलों का दावा है कि यह केवल नकल का छोटा मामला नहीं बल्कि स्पष्ट रूप से पेपर लीक का गंभीर मामला है, जिसके चलते शिक्षा मंत्री को पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें इस्तीफा देना ही चाहिए।
दूसरी तरफ, इस मामले में पंजाब पुलिस का अपना दावा है कि उसके काउंटर इंटेलिजेंस विंग ने एक संयुक्त अभियान को अंजाम देकर इस अंतरराज्यीय नकल गिरोह का पूरी तरह भंडाफोड़ किया है। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह परीक्षा में पास कराने के लिए हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर रहा था। आरोपियों के पास से बैटरी से चलने वाले कुल 27 वायरलेस उपकरण भी बरामद किए गए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि इस गिरोह ने अलग-अलग अभ्यर्थियों से परीक्षा पास कराने के एवज में 3.5 लाख रुपये से लेकर 13 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम वसूली थी।
हरजोत सिंह बैंस और भगवंत मान का पक्ष
विपक्षी दलों के हमलों और इस्तीफे की लगातार मांग के बीच पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने अपनी सफाई देते हुए कहा है कि उनकी सरकार के पिछले 4 साल के कार्यकाल में एक भी पेपर लीक होने का मामला सामने नहीं आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फार्मेसी परीक्षा में जो प्रकरण सामने आया है, वह तकनीकी रूप से पेपर लीक नहीं बल्कि परीक्षा हॉल में नकल का एक मामला था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भले ही संबंधित विभाग उनके पास नहीं है, लेकिन अगर सिर्फ उनके इस्तीफे से पूरी व्यवस्था में सुधार हो सकता है, तो वह इसके लिए हमेशा तैयार खड़े हैं। बैंस ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे पंजाब राज्य को बेवजह बदनाम करने की एक सोची-समझी कोशिश बताया है।
शिक्षा मंत्री के इस बचाव में राज्य के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी खुलकर सामने आ गए हैं। विपक्ष के तीखे तीरों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री मान ने दावा किया कि उनकी सरकार के साढ़े चार साल के कार्यकाल में आज तक एक भी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री के अनुसार, आधिकारिक जांच में जिस नकल गिरोह का खुलासा हुआ है, उसके अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र के अंदर ब्लूटूथ युक्त गैजेट्स और डिजिटल पेन का इस्तेमाल कर रहे थे। इन उपकरणों के जरिए वे परीक्षा केंद्र के ठीक बाहर मौजूद लोगों तक प्रश्नपत्र पहुंचाते थे और बाहर से उन्हें सही उत्तर बताए जाते थे।
भाजपा और कांग्रेस का तीखा हमला
इस पूरे प्रकरण पर भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कई तीखे सवाल खड़े किए हैं। भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कड़ा ऐतराज जताते हुए लिखा कि एक ऐसा सवाल है जिसका स्पष्ट जवाब जनता को मिलना चाहिए कि पंजाब के शिक्षा मंत्री आखिर कब तक अपने पद से इस्तीफा देंगे। उन्होंने आगे लिखा कि अगर मंत्रियों की जवाबदेही ही एकमात्र कसौटी है, तो उसे चुनिंदा मामलों में ही लागू नहीं किया जा सकता है। मालवीय ने तंज कसते हुए यह भी सुझाव दिया कि यदि आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल वास्तव में शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को भारत की शिक्षा व्यवस्था सुधारने का एकमात्र समाधान मानते हैं, तो उन्हें तुरंत पंजाब का शिक्षा मंत्री नियुक्त कर देना चाहिए और इसकी शुरुआत पंजाब से ही की जानी चाहिए। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कड़ा प्रहार करते हुए पूछा कि क्या पंजाब के शिक्षा मंत्री में अब जरा भी शर्म बाकी बची है?
केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि मुख्य विपक्षी दल पंजाब कांग्रेस ने भी इस मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह घेर लिया है। पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराई है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि एक तरफ आम आदमी पार्टी अन्य राज्यों में पेपर लीक के मुद्दों को जोर-शोर से उठाती है, लेकिन जब बात अपने राज्य की आती है तो वह पूरी तरह चुप्पी साध लेती है। मुख्यमंत्री भगवंत मान को यह जवाब देना ही होगा कि आखिर फार्मेसी परीक्षा का पेपर लीक कैसे हो गया, क्योंकि यह मामला राज्य के हजारों बच्चों और उनके परिवारों के भविष्य से सीधा जुड़ा हुआ है। कांग्रेस नेता का यह भी कहना था कि राज्य में पेपर लीक के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, इसलिए सरकार को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए जवाबदेही तय करनी चाहिए।




















