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राहुल गांधी और विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, जानिए कौन है याचिकाकर्ता नंबर 11राजनीति
12 अक्तू॰ 2026, 9:53 pm (14 दिन पहले)· 0

राहुल गांधी और विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, जानिए कौन है याचिकाकर्ता नंबर 11

राहुल गांधी और विपक्ष के दस अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के फैसलों को चुनौती दी है। इस याचिका में अंतिम नाम केरल के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर का है।

नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल के बीच राहुल गांधी और विपक्षी दलों के दस अन्य प्रमुख नेताओं ने देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की है। इस याचिका के माध्यम से चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े कामकाज के तरीकों और निर्णयों को सीधी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि चुनाव आयोग अपने विवादित फैसलों से जुड़ी पूरी फाइलें, बैठकों का एजेंडा, मिनट-दर-मिनट नोटिंग और जनता तथा दलों की आपत्तियों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।

शीर्ष नेताओं की फेहरिस्त और याचिकाकर्ताओं का क्रम

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई इस संयुक्त याचिका में राहुल गांधी को सूची में पहले नंबर का याचिकाकर्ता बनाया गया है। इसके बाद क्रमवार अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के नाम शामिल हैं जिनमें दूसरे स्थान पर मल्लिकार्जुन खरगे, तीसरे पर सौगत राय, चौथे पर अखिलेश यादव, पांचवें पर तेजस्वी यादव, छठे पर संजय राउत, सातवें पर एम ए बेबी, आठवें पर डी राजा, नौवें पर महुआ मांझी और दसवें स्थान पर सुप्रिया सुले का नाम दर्ज है। हालांकि इस पूरी सूची में ग्यारहवें यानी अंतिम स्थान पर एक ऐसे शख्स को जगह दी गई है जिन्हें राहुल गांधी के बेहद करीबी माना जाता है, जिससे राजनीतिक गलियारों में इस नाम को लेकर खासी चर्चा है।

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कौन हैं ग्यारहवें याचिकाकर्ता ई. टी. मोहम्मद बशीर

सुप्रीम कोर्ट में इंडिया ब्लॉक की तरफ से दाखिल इस याचिका में जिस ग्यारहवें चेहरे का जिक्र किया गया है, वे ई. टी. मोहम्मद बशीर हैं जो दक्षिण भारत के केरल राज्य से ताल्लुक रखते हैं। वे लंबे समय से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी IUML के प्रमुख नेता और सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ई. टी. मोहम्मद बशीर की पार्टी आईयूएमएल और कांग्रेस पार्टी का केंद्र स्तर पर मजबूत गठबंधन है। इसके अलावा आईयूएमएल विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का भी एक अहम हिस्सा है। केरल की राजनीति में यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ की एक प्रमुख और पुरानी सहयोगी मानी जाती है।

लोकतंत्र मार्च और चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी कदम

बीते 12 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और गंभीर वोट चोरी के आरोपों को लेकर राहुल गांधी के नेतृत्व में तमाम विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट तक एक बड़ा लोकतंत्र मार्च निकाला था। इसी राजनीतिक और वैधानिक संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह संयुक्त जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे दिग्गजों के साथ ग्यारहवां नाम ई. टी. मोहम्मद बशीर का शामिल किया गया है।

याचिका में उठाए गए मुख्य कानूनी और तकनीकी मुद्दे

राहुल गांधी के नेतृत्व में दायर इस याचिका में मुख्य रूप से 24 जून 2025 को एसआईआर शुरू करने के फैसले को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही ईसीनेट और एरोनेट के एक्सेस लॉग्स की मांग भी उठाई गई है। याचिका में इस बात की गंभीर न्यायिक जांच की गुहार लगाई गई है कि क्या चुनाव आयोग के ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले साल 2023 के नए कानून और ऐतिहासिक टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।

वोटरों के अधिकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र समिति की मांग

कानूनी दस्तावेजों के अनुसार याचिका में मुख्य तौर पर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित नोटिस और सुनवाई का पर्याप्त मौका दिए बिना मतदाता सूची से न हटाया जाए। साथ ही यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि हटाए गए मतदाताओं की पूरी सूची बूथ-वार प्रकाशित की जाए जिसमें नाम काटने के पुख्ता कारणों और डेमोग्राफिक यानी जनसांख्यिकीय जानकारियों का स्पष्ट उल्लेख हो। याचिका में ईसीनेट और एरोनेट समेत पूरे मतदाता सूची डेटाबेस में होने वाले बदलावों और नाम हटाने की प्रक्रिया के ऑडिट के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति के गठन की मांग भी की गई है। इसके अलावा मामले का अंतिम निपटारा होने तक चल रहे एसआईआर पर अंतरिम रोक लगाने की भी गुहार लगाई गई है।

रणनीतिक संदेश और राजनीतिक मायने

याचिका के माध्यम से अदालत से विशेष रूप से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करे कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा उसका प्रत्येक निर्णय साल 2023 के कानून के मुताबिक हो और उसका विधिवत रिकॉर्ड रखा जाए। इस पूरी कवायद में राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की याचिका के जरिए समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में एक प्रमुख मुस्लिम चेहरे के रूप में ई. टी. मोहम्मद बशीर का नाम शामिल कर राजनीतिक जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों और राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की सोची-समझी कोशिश की गई है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने दायर की है?
यह याचिका राहुल गांधी और विपक्ष के दस अन्य नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है।
याचिका में मुख्य रूप से क्या मांग की गई है?
याचिका में चुनाव आयोग के एसआईआर फैसलों से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने और बिना नोटिस नाम हटाने पर रोक लगाने की मांग की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की याचिका में सूची में पहले स्थान पर कौन हैं?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इस याचिका में पहले नंबर का याचिकाकर्ता बनाया गया है।
याचिका में ग्यारहवें नंबर पर किसका नाम है?
ग्यारहवें स्थान पर केरल के सांसद और आईयूएमएल नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर का नाम शामिल है।
लोकतंत्र मार्च कब निकाला गया था?
मतदाता सूची में गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट तक लोकतंत्र मार्च निकाला था।
याचिका में किस नए कानून का हवाला दिया गया है?
याचिका में चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले साल 2023 के कानून का हवाला दिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·14 दिन पहले

याचिका में ग्यारहवें नंबर पर ई. टी. मोहम्मद बशीर का नाम होना थोड़ा अजीब सा लगता है। राहुल गांधी के इतने करीब होने के बाद भी आखिरी पायदान पर क्यों रखा, समझ नहीं आया।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·14 दिन पहले

न्यायालय में जब मैं पहली बार गया था, तो वकीलों को क्रम से कागज़ दाखिल करते देख हैरान रह गया था। बशीर साहब का नाम आखिरी होना भी शायद किसी कानूनी रणनीति का हिस्सा ही हो।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी लड़ाई में राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट जाना और वो भी ई.टी. मोहम्मद बशीर जैसे नेताओं को साथ लेकर, मामला वाकई तूल पकड़ता दिख रहा है। अब देखना होगा कि अदालत इस याचिका पर क्या रुख अपनाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

करण भाई, बात तो सही है आपकी। बशीर साहब को आखिरी नंबर पर रखना वाकई थोड़ा हैरान करने वाला है, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर नजर रखनी पड़ेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का यह कदम कानूनी लड़ाई को और दिलचस्प बना रहा है, खासकर जब इसमें डेटा और लॉग्स की मांग उठाई गई है।

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