राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने एक बार फिर उपेंद्र कुशवाहा पर भरोसा जताते हुए उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना है। निर्वाची अधिकारी प्रमोद कुमार सुमन ने अधिवेशन में उनके नाम की औपचारिक घोषणा की। इसी मंच से कुशवाहा ने न सिर्फ संगठन को लेकर बल्कि अपने बेटे और बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश के राजनीतिक भविष्य को लेकर भी सबसे बड़ी बात कही।
बेटे के मंत्री पद पर पिता का दो टूक दावा
दीपक प्रकाश का मंत्री पद बना रहेगा या नहीं, इस सवाल पर कुशवाहा ने हर तरह की अटकल को खारिज कर दिया। उनके मुताबिक अब इसे लेकर किसी को कोई भ्रम पालने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि एनडीए के शीर्ष नेताओं ने सूझबूझ का परिचय दिया है और यही वजह है कि दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाया गया — ऐसा न होता तो यह जिम्मेदारी उन्हें दोबारा नहीं मिलती। कुशवाहा ने जोर देकर कहा कि उनका बेटा पूरे कार्यकाल तक मंत्री बना रहेगा और जब तक बिहार में एनडीए की सरकार है, तब तक इस पद को लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए।
क्यों उठ रहे हैं दीपक प्रकाश के पद पर सवाल
दरअसल कुशवाहा का यह दावा संवैधानिक पेच के बीच आया है। दीपक प्रकाश ने 7 मई 2026 को दूसरी बार मंत्री पद की शपथ ली थी। संविधान के प्रावधान कहते हैं कि किसी भी सदन का सदस्य न रहने पर कोई व्यक्ति अधिकतम छह महीने तक, यानी 6 नवंबर 2026 तक ही मंत्री पद पर बना रह सकता है। मौजूदा विधान परिषद चुनाव में उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया, जिससे फिलहाल उनके एमएलसी बनने का रास्ता बंद हो गया है। अगला मौका राज्यपाल कोटे से विधान परिषद में मनोनयन का है, लेकिन वह मार्च 2027 में होगा — और उससे काफी पहले ही छह महीने की संवैधानिक समयसीमा खत्म हो जाएगी। यही टकराव दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर सवाल खड़े कर रहा है, जबकि कुशवाहा उनके बने रहने का भरोसा दिला रहे हैं।
नीतीश कुमार के 20 साल पर मुहर, पर खामियां भी गिनाईं
अधिवेशन में पारित राजनीतिक प्रस्ताव में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीते 20 साल के कार्यकाल को सराहा गया। प्रस्ताव में कहा गया कि उनकी अगुवाई में सड़क, बिजली, परिवहन और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के मोर्चे पर बिहार ने उल्लेखनीय तरक्की की है। हालांकि पार्टी ने यह स्वीकार करने में भी हिचक नहीं दिखाई कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के क्षेत्रों में अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
न्यायपालिका से लेकर परिसीमन तक — ये मांगें भी रखीं
राष्ट्रीय अधिवेशन में पार्टी ने न्यायपालिका से जुड़े सवाल भी उठाए और कॉलेजियम सिस्टम में बदलाव के साथ-साथ भारतीय न्यायिक व्यवस्था में सुधार की मांग का प्रस्ताव पारित किया। 2026 के परिसीमन को लेकर मांग रखी गई कि इसका वास्तविक आधार आबादी को बनाया जाए और दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें घटाए बगैर बिहार समेत दूसरे राज्यों की सीटें बढ़ाई जाएं।
इसके अलावा अधिवेशन के प्रस्तावों में कई और मांगें शामिल रहीं — राजधानी पटना का नाम बदलकर 'पाटलिपुत्र' करने, सावित्रीबाई फुले की जयंती को 'महिला शिक्षा दिवस' के रूप में घोषित करने, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, और भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की आदमकद प्रतिमा संसद परिसर में स्थापित करने की मांग प्रमुख रहीं।













