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एस जयशंकर ने बांग्लादेश को समझाया कूटनीति का पाठ, साझा हितों पर जोर देकर रिश्तों की दशा तय कीराजनीति
23 अग॰ 2026, 6:50 am (1 घंटे पहले)· 2

एस जयशंकर ने बांग्लादेश को समझाया कूटनीति का पाठ, साझा हितों पर जोर देकर रिश्तों की दशा तय की

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत और बांग्लादेश के संबंध तभी सफल हो सकते हैं जब दोनों देशों के साझा हितों का पूरा ध्यान रखा जाए। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के कूटनीतिक रुख पर भी खुलकर अपनी बात रखी।

भारत और बांग्लादेश के बीच के कूटनीतिक समीकरणों में आए बदलावों के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पड़ोसी देशों के साथ रिश्तों की बुनियाद को लेकर बड़ा बयान दिया है। शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद से ढाका और नई दिल्ली के आपसी संबंधों में असहजता देखी जा रही है। अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस के बाद प्रधानमंत्री तारीक रहमान की ओर से भी कुछ ऐसे ही कदम उठाए गए हैं। परंपरा से हटकर रहमान ने पदभार संभालने के बाद भारत के बजाय चीन जाने को प्राथमिकता दी। अब जब ब्रिक्स सम्मेलन में उनकी संभावित भागीदारी की बात चल रही है, तो उससे जुड़ी शर्तें भी सामने आ रही हैं, जिनमें बांग्लादेश द्वारा शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग शामिल है, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री पहले ही ढाका लौटने का ऐलान कर चुकी हैं। इन परिस्थितियों के बीच भारत ने साफ कर दिया है कि द्विपक्षीय रिश्तों को कैसे सहेजा जाना चाहिए।

साझा हितों की कसौटी पर टिके हैं रिश्ते

ईटी वर्ल्ड लीडर्स फोरम के मंच पर बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दो टूक शब्दों में कहा कि किसी भी द्विपक्षीय रिश्ते की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह दोनों पक्षों के साझा हितों की कसौटी पर कितना खरा उतरता है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारीक रहमान की भारत यात्रा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत यह उम्मीद नहीं रखता कि पड़ोसी देश पूरी तरह से केवल नई दिल्ली की प्राथमिकताओं के मुताबिक काम करें, बल्कि इसके लिए दोनों देशों के बीच आपसी सहमति की साझा जमीन का होना अनिवार्य है। जब रिश्तों में आपसी हितों का तालमेल बैठ जाता है, तब सहयोग सुचारू रूप से आगे बढ़ता है। हालांकि विदेश मंत्रालय पहले ही तारीक रहमान को द्विपक्षीय दौरे का न्यौता दे चुका है, लेकिन उनकी यात्रा की सही तारीखों के ऐलान का अभी इंतजार किया जा रहा है।

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आतंकवाद और बातचीत पर रुख साफ

पाकिस्तान के साथ संबंधों के मुद्दे पर विदेश मंत्री ने सरकार के पुराने और अडिग रुख को एक बार फिर दोहराया। उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि आतंकवाद और बातचीत कभी भी एक साथ नहीं चल सकते। भारत आतंकवाद के सवाल पर अपनी नीतियों में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि देश की जनता की भावनाओं और जनमत की अनदेखी करना किसी भी लोकतांत्रिक सरकार के लिए संभव नहीं होता है। कूटनीतिक स्तर पर यह संदेश साफ है कि अमन और हिंसा का दौर एक साथ नहीं चल सकता।

चीन के साथ स्थिरता और आर्थिक संपर्क

चीन के साथ कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों पर चर्चा करते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों एशियाई दिग्गजों का हित इसी बात में निहित है कि द्विपक्षीय रिश्तों में स्थिरता बरकरार रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगले महीने शंघाई सहयोग संगठन और ब्रिक्स सम्मेलनों के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की संभावना जताई जा रही है। इस पृष्ठभूमि में उन्होंने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर हर मुल्क के साथ व्यापार करना है, जिसमें चीन भी शामिल है। आगामी 12-13 सितंबर को भारत में प्रस्तावित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को लेकर आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो साल 2019 के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा होगी।

सीमा पर शांति ही तय करेगी आगे की दिशा

विदेश मंत्री ने बताया कि भारत और चीन के बीच आर्थिक संपर्क का मुख्य उद्देश्य अपनी अर्थव्यवस्था को अधिक आधुनिक बनाना और क्षमताओं का विस्तार करना है। दोनों देशों के बीच कारोबार का बड़ा महत्व है। भारत लगातार बीजिंग के संपर्क में है और भारतीय व्यापारियों को वीजा मिलने में आ रही अड़चनों का मुद्दा उठाया जा रहा है। साल 2020 से 2024 के बीच सीमा पर चले तनावपूर्ण दौर का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि सरहद की जमीनी हालात ही तय करेंगे कि दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में आगे बढ़ेंगे। यदि सीमा पर शांति और स्थिरता बनी रहती है, तो दोनों बड़े बाजारों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।

सवाल-जवाब

एस जयशंकर ने भारत-बांग्लादेश संबंधों को लेकर क्या मुख्य बात कही है?
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया है कि किसी भी रिश्ते की सफलता के लिए दोनों देशों के साझा हितों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आयोजन कब प्रस्तावित है?
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 12-13 सितंबर को प्रस्तावित है, जिसकी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर भारत का क्या रुख है?
भारत ने साफ कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते और इस मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा।
चीन के साथ संबंधों को लेकर विदेश मंत्री ने क्या कहा?
जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन दोनों का हित द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता बनाए रखने में है और सीमा की स्थिति ही रिश्तों की दिशा तय करेगी।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·15 मिनट पहले

विदेश मंत्री का यह बयान केवल कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर क्षेत्रीय कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर भी पड़ेगा। बांग्लादेश में राजनीतिक सत्ता परिवर्तन के बाद जिस तरह से प्रत्यर्पण और कूटनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव आए हैं, उससे सीमा पार अपराध और सुरक्षा प्रबंधन की चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं। यदि पड़ोसी देशों के बीच आपसी हितों और संप्रभुता का संतुलन बिगड़ता है, तो इसका नकारात्मक प्रभाव आंतरिक सुरक्षा और द्विपक्षीय संधियों के क्रियान्वयन पर पड़ना तय है। ऐसे में कूटनीतिक संवाद के साथ-साथ सुरक्षा एजेंसियों को भी क्षेत्रीय स्थिरता पर कड़ी नजर रखनी होगी।

Ravikash Gupta@ravikash·15 मिनट पहले

सहकर्मी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि भारत और बांग्लादेश के बीच आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते क्षेत्रीय स्थिरता की रीढ़ हैं। वर्तमान राजनीतिक उथल-पुथल और प्रत्यर्पण जैसे संवेदनशील मुद्दों का सीधा असर सीमावर्ती व्यापार, सप्लाई चेन और निवेश के माहौल पर पड़ सकता है। यदि कूटनीतिक मोर्चे पर आपसी हितों का संतुलन जल्द नहीं साधा गया, तो इसका प्रभाव वित्तीय बाजारों और औद्योगिक गतिविधियों पर भी पड़ना तय है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा सकता है। इसलिए द्विपक्षीय वार्ताओं में आर्थिक स्थिरता को प्राथमिकता देना अनिवार्य होगा।

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