बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। बुधवार 5 अगस्त को उनका एक वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए संबोधन तय माना जा रहा है, जिससे पहले ही उन्होंने दिसंबर तक अपने वतन लौटने की इच्छा जताई है। इस घटनाक्रम के बाद से यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उनका यह कदम बांग्लादेश के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल देगा और इसका द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर पड़ेगा।
इन तमाम राजनीतिक और कूटनीतिक सवालों पर बांग्लादेश में भारत की उच्चायुक्त रह चुकीं वीना सीकरी ने विस्तार से अपनी राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना बांग्लादेश छोड़कर भारत आईं थीं और तब से यहीं निवास कर रही हैं। सीकरी के अनुसार, हालांकि वह भारतीय प्रशासन की देखरेख में यहां मौजूद हैं, लेकिन उन्हें अपने देशवासियों से संवाद करने और अपनी बात दुनिया के सामने रखने की पूरी स्वतंत्रता प्राप्त है।
वीना सीकरी ने घटनाक्रम को याद करते हुए कहा कि ठीक दो साल पहले 5 अगस्त 2024 को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना भारत पहुंची थीं और तब से यहीं हैं। वह बेशक भारत सरकार की सुरक्षा और मेहमाननवाज़ी में हैं, लेकिन लंबे समय तक खामोश रहने के बाद अब वह अपने लोगों से बात करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। वह लोगों से मिलती-जुलती हैं और अपनी बात रखने का अधिकार रखती हैं। सत्ता से बेदखल होने के दो साल बाद यदि उन्होंने अपने देश वापस लौटने की इच्छा व्यक्त की है, तो इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है।
बांग्लादेश में साल 2024 के दौरान हुए छात्र आंदोलन पर टिप्पणी करते हुए सीकरी ने कहा कि वह महज छात्रों के स्वतःस्फूर्त गुस्से का नतीजा नहीं था, बल्कि वह सत्ता परिवर्तन की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा था। उन्होंने इसके पीछे का तर्क देते हुए कहा कि आज भी बांग्लादेश की आम जनता खुशहाल नहीं है। देश आर्थिक मोर्चे पर भारी संघर्ष कर रहा है, बेरोजगारी चरम पर है और किसी भी तरह का विदेशी निवेश वहां नहीं आ रहा है। कुल मिलाकर वह स्थिति नहीं बनी जिसका बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे। ऐसे में यही कारण है कि शेख हसीना ने वापस लौटने का मन बना लिया है और संभव है कि वह अपने संबोधन में इसी बात पर जोर देंगी।
जब यह सवाल उठाया गया कि क्या भारतीय धरती से शेख हसीना का यह वर्चुअल संबोधन दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों में खटास ला सकता है, तो पूर्व राजनयिक ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि इसे कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं माना जाना चाहिए। वह केवल अपने वतन लौटना चाहती हैं। बांग्लादेश की एक अदालत ने उनकी गैरमौजूदगी में उन्हें मौत की सजा सुना दी है। वहां उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर तक नहीं दिया गया। उनके वकील को भी अपनी दलीलें पेश करने की अनुमति नहीं दी गई थी। न्यायिक प्रक्रिया वैसी नहीं चली जैसी निष्पक्ष न्याय प्रणाली में दिखनी चाहिए। ऐसी स्थिति में वह वहां जाकर अदालत के सामने आत्मसमर्पण करना चाहती हैं और अपनी सजा के खिलाफ अपील करना चाहती हैं, जिसकी उन्हें अनुमति दी जानी चाहिए।
सीकरी ने आगे दोहराया कि शेख हसीना भारत की मेहमान हैं और यहां सम्मान के साथ रहने का उन्हें पूरा अधिकार है। वह यहां किसी भी राजनीतिक गतिविधि में संलिप्त नहीं हैं। वह कोई कैदी नहीं हैं बल्कि पूरी तरह स्वतंत्र हैं और उन्हें अपने विचार रखने की पूरी आजादी दी गई है।
उनके मुताबिक, भारत के उच्चायुक्त की नियुक्ति को लेकर भी पहले बांग्लादेश का रवैया पूरी तरह सहज नहीं था। भारत के उच्चायुक्त खुद कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काफी करीबी माने जाते हैं। बांग्लादेश के कुछ तत्वों ने इस बात का भी बेवजह मुद्दा बनाया। वहां के मंत्रियों के बयानों के बावजूद भारत सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पड़ोसी देश के साथ संबंधों को सामान्य और सहज बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
पूर्व भारतीय राजनयिक ने अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की हालिया यात्रा का हवाला देते हुए बताया कि दो दिन पहले ही अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर बांग्लादेश की राजधानी ढाका पहुंचे थे और वहां उन्होंने अवामी लीग के नेताओं से मुलाकात की थी। हालांकि उन्होंने जमात-ए इस्लामी जैसे संगठनों से दूरी बनाए रखी और जातीय दल के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की। सर्जियो गोर दक्षिण एशिया और मध्य एशिया के क्षेत्रीय राजदूत भी हैं, इसलिए इस यात्रा को लेकर कोई बड़ा विवाद खड़ा नहीं होना चाहिए। जब अमेरिकी राजदूत की इन मुलाकातों को कोई राजनीतिक हस्तक्षेप या गतिविधि नहीं करार दिया गया, तो फिर शेख हसीना के अपने देश लौटने की इच्छा या संबोधन को सियासी मामला कैसे माना जा सकता है।



















