संसद का मॉनसून सत्र सोमवार को दोबारा शुरू होते ही एक बार फिर जबरदस्त राजनीतिक घमासान के आसार बन गए हैं। एक तरफ केंद्र सरकार इस सप्ताह संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में आधा दर्जन महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने और उन्हें पास कराने की पूरी तैयारी में जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरने के लिए अपनी रणनीति मजबूत कर ली है। विपक्ष कई संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दों को लेकर आक्रामक रुख अपनाने के मूड में नजर आ रहा है।
स्थगन नोटिस और प्रमुख मुद्दे
सोमवार सुबह से ही कांग्रेस सांसदों ने केंद्र सरकार की घेराबंदी की तैयारी शुरू कर दी थी। कांग्रेस ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से जुड़ी दान चोरी के आरोपों पर राज्यसभा में चर्चा कराने और अन्य कामकाज को रोकने के लिए नियम 267 के तहत स्थगन नोटिस दाखिल किया है। इसके साथ ही लोकसभा में कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने नए एंटी डिफेक्शन कानून से जुड़े मुद्दे को उठाने के लिए काम रोको प्रस्ताव का नोटिस दिया है। इसके अतिरिक्त NEET छात्र आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और अन्य ज्वलंत मुद्दों पर भी विपक्ष सदन के भीतर जोरदार हंगामा कर सकता है।
विधायी कार्यसूची और लंबित विधेयक
केंद्र सरकार की इस हफ्ते संसद के दोनों सदनों में कम से कम छह अलग-अलग विधेयकों को पेश करने अथवा उन्हें पारित कराने की योजना है। इन विधेयकों में विदेशी अंशदान विनियमन (संशोधन) विधेयक भी शामिल है, जिसे इस सप्ताह के मध्य तक लोकसभा में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि इस विधेयक को पहले बजट सत्र के दौरान टाल दिया गया था। इसके विपरीत, अयोध्या राम मंदिर मामले और NEET आंदोलन में छात्रों के खिलाफ हुई हिंसा को लेकर बने तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए, पहले असफल रहे परिसीमन विधेयक को फिलहाल सदन में पेश करने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं।
विपक्ष की दोहरी रणनीति और पिछला घटनाक्रम
विपक्षी दल संसद परिसर के भीतर और बाहर दोनों जगह सरकार के खिलाफ माहौल बनाने में जुटे हुए हैं। सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से ठीक पहले सुबह 10 बजे विपक्षी दलों के फ्लोर लीडर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सरकार को घेरने के लिए दोहरी रणनीति पर अंतिम सहमति बनी। तय योजना के अनुसार, एक मुख्य मुद्दा संसद के भीतर चर्चा और हंगामे के माध्यम से उठाया जाएगा, जबकि दूसरा मुद्दा सदन के बाहर धरना-प्रदर्शन के जरिए प्रमुखता से उभारा जाएगा।
यह तनातनी नई नहीं है, क्योंकि पिछले हफ्ते भी विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कड़ा हमला बोला था। सदन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति पर विपक्ष के सदस्यों ने संसद भवन के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया था। उसी दौरान अयोध्या राम मंदिर दान चोरी के मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए सांसद पप्पू यादव ने संसद परिसर में साधु का वेश धारण कर विरोध का स्वांग भी रचा था। इन सभी घटनाक्रमों को देखते हुए आज संसद के दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक भिड़ंत देखने को मिल सकती है।


















