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सदन में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने पर राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस, अनुराग सिंह ठाकुर ने की कड़ी कार्रवाई की मांगराजनीति
30 जुल॰ 2026, 9:26 pm (46 दिन पहले)· 2

सदन में अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने पर राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस, अनुराग सिंह ठाकुर ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

लोकसभा में असंसदीय शब्दों के प्रयोग और केंद्रीय गृह मंत्री पर निराधार आरोप लगाने को लेकर बीजेपी सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की प्रक्रिया शुरू की है.

लोकसभा में 29 जुलाई 2026 को आयोजित कार्यवाही के दौरान विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आचरण और भाषण को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी सांसद तथा पूर्व कैबिनेट मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने 30 जुलाई 2026 को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का औपचारिक नोटिस प्रस्तुत किया. इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस नेता ने संसदीय नियमों का गंभीर उल्लंघन करते हुए निचले सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई है. अनुराग सिंह ठाकुर ने अपने शिकायती पत्र में इस बात पर विशेष बल दिया है कि जनप्रतिनिधियों से भरी संसद में ऐसे आपत्तिजनक शब्दों का चयन संसदीय लोकतंत्र के उच्च मानदंडों के सर्वथा विपरीत है.

नियम 352 का उल्लंघन और असंसदीय भाषा पर विवाद

अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा प्रस्तुत नोटिस में लोकसभा संचालन नियमावली के नियम 352 का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है. इस नियम के तहत सदन में किसी भी सदस्य द्वारा आपत्तिजनक, अपमानजनक अथवा मानहानिकारक शब्दावली का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है. 29 जुलाई की बहस के समय राहुल गांधी ने एक छात्र के साथ हुई अपनी किसी बातचीत की कहानी साझा की थी. उस उदाहरण का सहारा लेते हुए उन्होंने देश के नागरिकों के एक पूरे समूह को दो विशिष्ट श्रेणियों में बांटते हुए 'इडियट' और 'अंधभक्त' जैसे शब्दों से संबोधित किया.

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जब विपक्ष के नेता यह वक्तव्य दे रहे थे, तब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए इन शब्दों के चयन पर कड़ा विरोध व्यक्त किया. इसके अतिरिक्त, पीठासीन अधिकारी की ओर से भी राहुल गांधी को स्पष्ट हिदायत दी गई कि वे इस प्रकार के असंसदीय शब्दों का प्रयोग न करें. हालांकि, चेतावनी के बावजूद राहुल गांधी ने उन्हीं विवादित शब्दों को दोबारा दोहराया. अनुराग सिंह ठाकुर ने अपने पत्र में लिखा कि यह व्यवहार न केवल संसदीय व्यवस्था की अवमानना है, बल्कि सदन के समय का अनुचित प्रयोग भी है, क्योंकि प्रस्तुत कहानी का मूल चर्चा के विषय से कोई प्रासंगिक संबंध नहीं था.

संसदीय परंपराओं में प्रत्येक सदस्य को अपनी बात रखने का अधिकार प्राप्त है, परंतु यह अधिकार नियमावली के अधीन होता है. अनुराग सिंह ठाकुर ने तर्क दिया कि 'इडियट' तथा 'अंधभक्त' जैसे शब्दों का प्रयोग कर राहुल गांधी ने न केवल राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधा, बल्कि सरकार के समर्थकों और देश के आम नागरिकों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाई है. इस तरह का वर्गीकरण किसी भी दृष्टि से स्वस्थ लोकतांत्रिक चर्चा का हिस्सा नहीं माना जा सकता.

नियम 353 और बिना अग्रिम नोटिस आरोप लगाने का मामला

विशेषाधिकार हनन नोटिस का दूसरा प्रमुख आधार नियम 353 का उल्लंघन है. संसदीय नियमों के अनुसार, यदि कोई सदस्य सदन के भीतर किसी मंत्री अथवा साथी सांसद पर गंभीर व्यक्तिगत आरोप लगाना चाहता है, तो उसे इसकी पूर्व सूचना लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित मंत्री को देनी अनिवार्य होती है. नोटिस में कहा गया है कि राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के विरुद्ध बिना किसी पूर्व सूचना अथवा आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत किए अत्यंत गंभीर एवं तथ्यहीन दावे किए.

पूर्व कैबिनेट मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर का कहना है कि पूर्व सूचना दिए बिना इस तरह के आरोप लगाना निष्पक्षता के बुनियादी सिद्धांतों का हनन है. इससे संबंधित मंत्री को अपने बचाव में तथ्यात्मक उत्तर देने का उचित अवसर नहीं मिल पाता. नियम 353 का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संसद के मंच का उपयोग बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के लिए न किया जाए. जब भी कोई सदस्य केंद्रीय गृह मंत्री जैसे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति पर आरोप लगाता है, तो उसके पास प्रामाणिक दस्तावेज होने चाहिए. इस मामले में साक्ष्य प्रस्तुत न किया जाना नियमों की अवहेलना को दर्शाता है.

सदन से माफी और विशेषाधिकार समिति से जांच की मांग

सदन की मर्यादा बनाए रखने के उद्देश्य से अनुराग सिंह ठाकुर ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से इस पूरे प्रकरण में सख्त कदम उठाने की अपील की है. नोटिस के माध्यम से मांग की गई है कि राहुल गांधी द्वारा प्रयोग किए गए असंसदीय शब्दों को लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड से स्थायी रूप से हटा दिया जाए. इस प्रक्रिया के लिए लोकसभा नियमावली के नियम 380 और नियम 381 के प्रावधानों को लागू करने का आग्रह किया गया है.

इसके अतिरिक्त, नोटिस में यह भी मांग की गई है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपने इस आचरण के लिए पूरे सदन तथा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांगें. अनुराग सिंह ठाकुर ने स्पष्ट किया है कि बार-बार निर्देश देने के बाद भी अध्यक्ष के आदेशों की अवहेलना करना और कार्यवाही में बाधा पहुंचाना चिंताजनक है. अतः इस पूरे मामले को विस्तृत जांच और आवश्यक कार्रवाई के लिए विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाना चाहिए.

संसदीय विशेषाधिकार हनन की प्रक्रिया किसी भी सांसद के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. यदि विशेषाधिकार समिति इस मामले की जांच करती है और राहुल गांधी को दोषी पाती है, तो उन्हें चेतावनी दी जा सकती है या सदन के समक्ष माफी मांगने का निर्देश जारी किया जा सकता है. लोकसभा अध्यक्ष अब इस नोटिस का अध्ययन करेंगे और नियमानुसार आगे का फैसला लेंगे.

सवाल-जवाब

विशेषाधिकार हनन का नोटिस किसने और किसके खिलाफ दिया है?
बीजेपी सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को यह नोटिस दिया है.
विशेषाधिकार हनन का नोटिस किस तारीख को सौंपा गया?
यह नोटिस 30 जुलाई 2026 को सौंपा गया, जो 29 जुलाई 2026 को सदन में राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयान पर आधारित है.
राहुल गांधी पर नियम 352 के तहत क्या आरोप लगाए गए हैं?
आरोप है कि उन्होंने सदन की चर्चा के दौरान 'इडियट' और 'अंधभक्त' जैसे असंसदीय शब्दों का प्रयोग कर नियम 352 का उल्लंघन किया.
नियम 353 का उल्लंघन किस मामले से जुड़ा है?
राहुल गांधी ने बिना अग्रिम सूचना या दस्तावेजी सबूत दिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए, जो नियम 353 का उल्लंघन है.
अनुराग सिंह ठाकुर ने नोटिस में क्या मांगें रखी हैं?
उन्होंने विवादास्पद शब्दों को रिकॉर्ड से हटाने, राहुल गांधी द्वारा बिना शर्त माफी मांगने और मामले की विशेषाधिकार समिति से जांच कराने की मांग की है.
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