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हिमाचल विधानसभा में राष्ट्रगान मामले पर घमासान, जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को विशेषाधिकार उल्लंघन नोटिस थमायाराजनीति
26 अग॰ 2026, 3:40 pm (62 दिन पहले)· 4

हिमाचल विधानसभा में राष्ट्रगान मामले पर घमासान, जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को विशेषाधिकार उल्लंघन नोटिस थमाया

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के विवाद पर राजनीति गर्मा गई है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया है, वहीं सरकार ने वीडियो फुटेज के दावों पर तकनीकी सफाई पेश की है।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के मुद्दे को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब प्रशासनिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। विधानसभा परिसर में बयानबाजी का दौर तेज होते ही नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ विधानसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का औपचारिक नोटिस सौंपा है। विपक्ष का मुख्य आरोप है कि मुख्यमंत्री ने सदन के भीतर प्रदेश की लगभग 75 लाख जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच कड़वाहट को बढ़ा दिया है।

सदन के भीतर राष्ट्रगान विवाद और विशेषाधिकार हनन का आधार

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने घटनाक्रम का ब्योरा देते हुए कहा कि मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि सदन में राष्ट्रगीत वंदे मातरम का गायन नहीं होगा। हालांकि सत्र का शुभारंभ होने पर सभी सदस्यों ने गरिमा के साथ राष्ट्रगान गाया। इसके बाद जब विधानसभा अध्यक्ष ने आसन ग्रहण किया, तब संपूर्ण वंदे मातरम का गायन संपन्न हुआ और पुनः राष्ट्रगान का गायन किया गया। विपक्ष का कहना है कि प्रक्रिया पूरी तरह नियमों और परंपराओं के अनुसार हुई, फिर भी मुख्यमंत्री ने सदन में गलत टिप्पणी कर जनता के प्रतिनिधियों का अपमान किया है। इसी वजह से विपक्ष को विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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वीडियो फुटेज की मांग, क्षमा की शर्त और कानूनी कार्रवाई का संकेत

सदन में हुए घटनाक्रम की सचाई उजागर करने के लिए नेता प्रतिपक्ष ने लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग की मांग उठाई थी। वीडियो क्लिप प्राप्त होने के बाद जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यदि रिकॉर्डिंग में विपक्ष का कोई भी सदस्य राष्ट्रगान का अनादर करते हुए दिखाई देता है, तो वह खुद उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के समक्ष शर्त रखी कि यदि मुख्यमंत्री अपने दिए गए वक्तव्य के लिए सार्वजनिक रूप से क्षमा मांग लेते हैं, तो विपक्ष इस विवाद को यहीं समाप्त कर देगा। परंतु यदि क्षमा याचिका प्रस्तुत नहीं की जाती है, तो विधानसभा अध्यक्ष को नियमों के तहत नोटिस पर कार्रवाई करनी होगी। इसके अतिरिक्त विपक्ष क्रिमिनल डिफैमेशन यानी आपराधिक मानहानि की धाराओं के तहत कानूनी विकल्प चुनने पर भी विचार कर सकता है।

राष्ट्रीय प्रतीकों पर सियासत का विरोध और मंत्री पर हमला

विपक्ष के नेता ने कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी का सीधे नाम लिए बिना उनकी दलीलों पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री मामले को सुलझाने के बजाय अतार्किक तर्कों का सहारा ले रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कांग्रेस नेतृत्व से सवाल किया कि जिन प्रदेशों में कांग्रेस की सरकारें कार्य कर रही हैं, वहां राष्ट्रगीत गाने से परहेज क्यों किया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत जैसे राष्ट्रप्रेम से जुड़े संवेदनशील विषयों को राजनीतिक बयानबाजी से दूर रखा जाना चाहिए और पूरी बात केवल प्रामाणिक तथ्यों के आधार पर ही होनी चाहिए।

आउटसोर्स भर्तियों में अनियमितता और हाईकोर्ट की टिप्पणी का उल्लेख

सदन के बाहर संवाददाताओं से बातचीत करते हुए जयराम ठाकुर ने प्रदेश सरकार की आउटसोर्स भर्ती नीति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए अपने समर्थकों, पदाधिकारियों और कांग्रेस विधायकों के करीबियों को नौकरियां बांटने में लगी हुई है। उनका कहना था कि सरकार का ध्यान हिमाचल प्रदेश के पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को अवसर देने के बजाय केवल अपने लोगों की बेरोजगारी दूर करने पर केंद्रित है। नेता प्रतिपक्ष ने स्मरण दिलाया कि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट भी आउटसोर्स एजेंसियों की कार्यप्रणाली और कार्यशैली पर पहले ही चिंता प्रकट कर चुका है। इसलिए सरकार को इस पूरी भर्ती प्रक्रिया में तत्काल पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।

सरकार का पलटवार: कैमरे के फोकस और तकनीकी स्थिति पर मंत्री की सफाई

दूसरी तरफ, विपक्ष द्वारा उठाए गए वीडियो क्लिप के मुद्दे पर प्रदेश के राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने करारा पलटवार किया है। मंत्री ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी कैमरे की तकनीकी सीमा का फायदा उठाकर राष्ट्रगान के दौरान उत्पन्न हुए व्यवधान को छिपाने का प्रयास कर रही है और जनता को गुमराह कर रही है। जगत सिंह नेगी ने तकनीकी व्यवस्था समझाते हुए कहा कि विधानसभा के भीतर कैमरा केवल उसी सदस्य पर केंद्रित रहता है जिसे अध्यक्ष बोलने की अनुमति देते हैं। जब कोई अन्य सदस्य बीच में बोलता है या हंगामा करता है, तो कैमरा उसकी तरफ मुड़ता नहीं है। राष्ट्रगान के समय भी कैमरा केवल विधानसभा अध्यक्ष पर केंद्रित था क्योंकि वे सदन को संबोधित कर रहे थे। इसलिए वीडियो में व्यवधान न दिखने का अर्थ यह कदापि नहीं है कि सदन में कोई बाधा उत्पन्न नहीं हुई थी।

सवाल-जवाब

जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस क्यों दिया?
जयराम ठाकुर का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने सदन के भीतर प्रदेश के 75 लाख लोगों के चुने हुए प्रतिनिधियों के खिलाफ गलत और भ्रामक बयान दिया है।
राष्ट्रगान विवाद में विपक्ष ने मुख्यमंत्री के सामने क्या शर्त रखी है?
विपक्ष ने शर्त रखी है कि यदि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू अपने बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांग लेते हैं, तो मामले को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
यदि मुख्यमंत्री माफी नहीं मांगते हैं तो विपक्ष का क्या कदम होगा?
माफी न मांगने की स्थिति में विपक्ष नियमों के तहत विशेषाधिकार नोटिस पर कार्रवाई और आपराधिक मानहानि के कानूनी विकल्पों पर आगे बढ़ेगा।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने वीडियो फुटेज पर क्या सफाई दी है?
जगत सिंह नेगी ने स्पष्ट किया कि कैमरे का फोकस केवल अध्यक्ष पर था, इसलिए दूसरे सदस्यों द्वारा किए गए व्यवधान कैमरे में रिकॉर्ड नहीं हुए।
आउटसोर्स भर्ती को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर क्या आरोप लगाए?
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार बेरोजगार युवाओं के बजाय कांग्रेस नेताओं और विधायकों से जुड़े लोगों को आउटसोर्स एजेंसियों के जरिए नौकरियां दे रही है।
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