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सड़क पर न निकलने देने की धमकी पर भड़कीं ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी के बयान पर उठाए गंभीर सवालराजनीति
24 अग॰ 2026, 10:34 pm (1 घंटे पहले)· 3

सड़क पर न निकलने देने की धमकी पर भड़कीं ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी के बयान पर उठाए गंभीर सवाल

पश्चिम बंगाल में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी के एक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी का दौर एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सुवेंदु अधिकारी के एक कथित बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए राजनीतिक विरोधियों को डराने-धमकाने और देश के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर करने का सीधा आरोप लगाया है। ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सुवेंदु अधिकारी का एक वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर किस कानून के तहत कोई नेता यह तय कर सकता है कि दूसरा राजनीतिक दल का प्रमुख अपने घर से बाहर निकल पाएगा या नहीं।

वायरल वीडियो क्लिप में सुवेंदु अधिकारी को कथित तौर पर यह कहते हुए सुना जा सकता है कि किसी को भी सड़कों पर आने की कोई आवश्यकता नहीं है और वह यह सुनिश्चित करेंगे कि विपक्षी नेताओं को सड़क पर कदम तक न रखने दिया जाए। इसी बयान को आधार बनाते हुए ममता बनर्जी ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की और कहा कि यह मामला केवल उनके व्यक्तिगत अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने और संविधान की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

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हाउस अरेस्ट और राजनीतिक उत्पीड़न का गंभीर आरोप

ममता बनर्जी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि राज्य के एक मौजूदा मुख्यमंत्री ने पद संभालने से पहले संविधान की रक्षा करने की शपथ ली होती है, लेकिन वही मुख्यमंत्री अगर प्रमुख विपक्षी दल की अध्यक्ष की आवाजाही की स्वतंत्रता पर पहरा बिठाने की बात करें तो स्थिति चिंताजनक हो जाती है। उन्होंने तीखा सवाल किया कि इस तरह के बयानों का क्या अर्थ निकाला जाना चाहिए। क्या यह सीधे तौर पर हाउस अरेस्ट करने की धमकी है, समाज में डर पैदा करने की कोशिश है या फिर सरेआम राजनीतिक उत्पीड़न का मामला है।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाते हुए पूछा कि संवैधानिक लोकतंत्र में आखिर किसी व्यक्ति को यह अधिकार किसने दे दिया कि वह यह तय करे कि राज्य में कौन व्यक्ति स्वतंत्र रूप से आ-जा सकता है और किसकी स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

राजनीति छोड़ने की अटकलों पर दिया स्पष्ट जवाब

हाल ही में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगने या रैलियों की अनुमति न मिलने को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन्हें ममता बनर्जी ने सिरे से खारिज कर दिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर लाइव के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग यह कयास लगा रहे हैं कि प्रशासनिक अनुमति न मिलने या दबाव के चलते वह राजनीति से संन्यास ले लेंगी, वे पूरी तरह गलतफहमी में हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि उनकी राजनीतिक लड़ाई आगे भी जारी रहेगी और यह संघर्ष तब तक नहीं थमेगा, जब तक बीजेपी को राजनीतिक रूप से बाहर का रास्ता नहीं दिखा दिया जाता।

ममता बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ताधारी बीजेपी सरकार उन्हें और उनकी पार्टी को राजनीतिक बैठकें करने से रोक रही है। उन्होंने दावा किया कि सत्ता परिवर्तन के कुछ ही महीनों के भीतर पश्चिम बंगाल की आम जनता ने बीजेपी के असली चेहरे को पहचान लिया है और वह सब कुछ समझ रही है।

अभिषेक बनर्जी ने भी बीजेपी को घेरा

ममता बनर्जी के इस तीखे हमले के बाद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ने भी बीजेपी पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि जब कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल जनता के बीच अपनी साख और सम्मान हासिल करने में नाकाम रहता है, तो वह समाज में डर और आतंक का माहौल पैदा करने की कोशिश करता है। अभिषेक बनर्जी का आरोप था कि बीजेपी की पूरी राजनीति का आधार ही धमकियां देना और लोगों में भय पैदा करना है, जो पार्टी की अंदरूनी असुरक्षा को साफ तौर पर उजागर करता है। इस ताजा विवाद के बाद पश्चिम बंगाल की सियासत में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव काफी बढ़ गया है।

सवाल-जवाब

ममता बनर्जी ने किस बयान पर आपत्ति जताई है?
ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी के उस कथित बयान पर आपत्ति जताई है जिसमें उन्होंने विपक्षी नेताओं को सड़क पर न निकलने देने की बात कही थी।
ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी का वीडियो कहां शेयर किया?
ममता बनर्जी ने सुवेंदु अधिकारी का यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर किया है।
क्या ममता बनर्जी राजनीति से संन्यास लेंगी?
नहीं, ममता बनर्जी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह राजनीतिक संन्यास नहीं लेंगी और बीजेपी के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।
अभिषेक बनर्जी ने इस विवाद पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि जब कोई सम्मान हासिल नहीं कर पाता, तब वह डर पैदा करने की कोशिश करता है और बीजेपी की राजनीति असुरक्षा को दर्शाती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·23 मिनट पहले

पश्चिम बंगाल की इस राजनीतिक रस्साकशी का सीधा असर राज्य की कारोबारी धारणा और निवेशकों के भरोसे पर पड़ सकता है। जब भी राजनीतिक अस्थिरता या इस तरह के टकराव बढ़ते हैं, कॉरपोरेट जगत और एमएसएमई क्षेत्र में अनिश्चितता का माहौल बनता है। यदि इस प्रकार का गतिरोध लंबा खिंचता है, तो आगामी निवेश प्रस्तावों और स्थानीय स्टार्टअप इकोसिस्टम की विकास गति पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ना तय है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·23 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से यह विवादित बयान सीधे तौर पर सार्वजनिक शांति और भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों के तहत गंभीर उल्लंघन के दायरे में आ सकता है। जब सत्ता या विपक्ष के प्रमुख नेता सड़क पर आवाजाही रोकने और खुली धमकियां देने जैसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं, तो इससे स्थानीय स्तर पर हिंसक झड़पों की आशंका और भीड़ के बेकाबू होने का जोखिम खतरनाक हद तक बढ़ जाता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए ऐसे बयानों के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखना और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।

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