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संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का लगा आरोप, अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी की राजनीति पर उठाए सवालराजनीति
12 अक्तू॰ 2026, 5:51 pm (14 दिन पहले)· 2

संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का लगा आरोप, अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी की राजनीति पर उठाए सवाल

बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी राजनीति देश में अस्थिरता और भ्रम फैलाने तक सीमित है।

भारतीय जनता पार्टी के सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक तौर-तरीकों पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस नेता की कार्यशैली का मुख्य मकसद देश में अव्यवस्था पैदा करना और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को चोट पहुंचाना है। उनके अनुसार, देश के संसदीय इतिहास में मुख्य विपक्षी नेता के स्तर से इस तरह का गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार पहले कभी देखने को नहीं मिला।

संवैधानिक मर्यादा और संस्थाओं पर हमलों का आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस सांसद लगातार राष्ट्रीय संस्थाओं की साख गिराने में लगे हुए हैं। निर्वाचन आयोग, ईवीएम की विश्वसनीयता और मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर उठाए जा रहे सवालों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी चुनाव परिणाम मनमुताबिक नहीं आते, जनादेश का अनादर शुरू कर दिया जाता है। उन्होंने राहुल गांधी की पूरी रणनीति को सतही करार दिया और कहा कि यह केवल निराधार दावों, दिखावटी विरोध और तथ्यहीन बयानों के इर्द-गिर्द घूमती है।

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सबूतों के अभाव और बयानबाजी पर उठाए सवाल

सार्वजनिक विमर्श में इस्तेमाल की जा रही भाषा की गुणवत्ता पर चिंता जताते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के आरोप गढ़ना विपक्ष के नेता को शोभा नहीं देता। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, "राहुल जी, देश को शोर नहीं, सच्चाई चाहिए। आरोप नहीं, सबूत चाहिए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक विमर्श में सनसनी फैलाने की जगह तथ्यों और स्पष्ट उत्तरों की जरूरत होती है।

इसी संदर्भ में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पूर्व बयान का भी उल्लेख आया, जिसमें उन्होंने कांग्रेस की चुनावी विफलता का ठीकरा उसके शीर्ष नेतृत्व पर फोड़ा था और दावा किया था कि खुद पार्टी के भीतर ही नेतृत्व पर भरोसा कम हो रहा है।

अदालत और संवैधानिक मंचों के रुख की दिलाई याद

अनुराग ठाकुर ने पूर्व के घटनाक्रमों की ओर इशारा करते हुए याद दिलाया कि जब कांग्रेस नेता अपनी शिकायतें लेकर राष्ट्रपति के पास पहुंचे थे, तब उनसे आरोपों के समर्थन में पुख्ता साक्ष्य पेश करने को कहा गया था, जिस पर वह बाद में पूरी तरह खामोश रहे। इसके अतिरिक्त, उन्होंने न्यायपालिका का संदर्भ देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह स्पष्ट कर चुका है कि अदालती मंचों का उपयोग राजनीतिक जंग लड़ने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। बीजेपी नेता ने लंबित मामलों में न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति पर भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

सवाल-जवाब

अनुराग ठाकुर ने राहुल गांधी पर क्या मुख्य आरोप लगाए?
उन्होंने राहुल गांधी पर देश में अस्थिरता पैदा करने, संस्थाओं को कमजोर करने और बिना सबूत के गैर-जिम्मेदाराना आरोप लगाने का आरोप लगाया।
अनुराग ठाकुर ने किन संवैधानिक संस्थाओं के संदर्भ में बात की?
उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन आयुक्त, राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट का उल्लेख करते हुए अपनी बात रखी।
राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट के संबंध में बीजेपी नेता ने क्या दावा किया?
उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने राहुल गांधी से सबूत मांगे थे जिस पर वह शांत रहे, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत का इस्तेमाल राजनीतिक लड़ाई के लिए नहीं हो सकता।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस नेतृत्व पर क्या टिप्पणी की थी?
शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि कांग्रेस की चुनावी हार की मुख्य वजह उसका नेतृत्व है और उनकी पार्टी के लोग ही उन पर भरोसा नहीं करते।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·14 दिन पहले

हर चुनाव के बाद ईवीएम पर सवाल उठाना अब नया नॉर्मल बन गया है। क्या वाकई विपक्ष के पास कभी कोई ठोस सबूत होता है या यह सिर्फ शोर मचाने का तरीका है?

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं, पर जब संसद में रोज इस तरह का हंगामा होता है तो असली मुद्दों पर बहस ही छूट जाती है। जनता महंगाई और बेरोजगारी पर बात सुनना चाहती है, न कि ईवीएम या संस्थाओं पर रोज की तकरार।

Vikram Yadav@vikram-yadav·14 दिन पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। मैं पिछले हफ्ते ही पटना जंक्शन के पास एक छोटे चाय वाले से मिला था, जो महंगाई से परेशान होकर मुझसे पूछ रहा था कि संसद में नेता बस आपस में ही क्यों लड़ते रहते हैं?

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

हर चुनाव हारने के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना विपक्षी नेता की पुरानी आदत बन गई है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

रोहन जी, बात सही है। जब अदालतों और आयोगों के कागजों में सबूत नहीं टिकते, तो फिर सड़कों पर सिर्फ शोर ही बचता है।

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