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संविधान से बड़ा कुछ नहीं, पूर्व ईडी अधिकारी निरंजन सिंह ने अमृतपाल सिंह की पार्टी से बनाया किनाराराजनीति
28 सित॰ 2026, 6:04 pm (28 दिन पहले)· 1

संविधान से बड़ा कुछ नहीं, पूर्व ईडी अधिकारी निरंजन सिंह ने अमृतपाल सिंह की पार्टी से बनाया किनारा

प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की पार्टी से जुड़ने के कुछ ही दिनों बाद इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने वैचारिक मतभेदों और सिद्धांतों से समझौता न करने की बात कहते हुए यह कदम उठाया है।

प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने वारिस पंजाब दे संगठन से अपने सभी रिश्ते खत्म कर लिए हैं। कुछ ही दिन पहले उन्होंने आतंकवाद से जुड़े मामलों में जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह के इस राजनीतिक दल के साथ अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने का ऐलान किया था। बुधवार को ही उन्होंने इस मोर्चे से जुड़ने की घोषणा की थी, लेकिन वैचारिक असहमतियों और कुछ गंभीर मुद्दों पर आपसी मतभेद सामने आने के बाद उन्होंने तुरंत पार्टी से अलग होने का फैसला किया। सोशल मीडिया के माध्यम से अपने इस्तीफे की जानकारी देते हुए उन्होंने यह स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में देश का संविधान और अनुशासन सबसे ऊपर है। निरंजन सिंह वही चर्चित अधिकारी हैं जिन्होंने अकाली दल के प्रमुख नेता बिक्रम सिंह मजीठिया से ड्रग्स तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ की थी और काफी सुर्खियों में आए थे।

क्यों छोड़ा अमृतपाल सिंह का साथ

निरंजन सिंह ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह साफ किया है कि उन्होंने पंजाब में तेजी से फैल रहे नशे के कारोबार, गंभीर भ्रष्टाचार, गैंगस्टरों की गतिविधियों, रंगदारी और अपराधियों के साथ पुलिस की सांठगांठ जैसे अहम मुद्दों के खिलाफ आवाज उठाने के लिए इस दल को समर्थन दिया था। हालांकि, संगठन के भीतर कुछ ऐसे आंतरिक विषय रहे जिन पर उनके विचार और दृष्टिकोण बिल्कुल मेल नहीं खाए और वह इन बिंदुओं पर किसी भी प्रकार का समझौता करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थे।

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अपने इस अचानक लिए गए फैसले के पीछे की वजहों को साझा करते हुए पूर्व ईडी अधिकारी ने दो टूक शब्दों में कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले हर व्यक्ति का आचरण भारतीय संविधान के दायरे के भीतर ही होना चाहिए। उनके अनुसार संविधान से ऊपर कुछ भी नहीं रखा जा सकता और संगठन के साथ उनके वैचारिक मतभेद इतने गहरे थे कि आगे का सफर तय करना संभव नहीं था। हालांकि, पार्टी से अलग होने के साथ ही उन्होंने संगठन को अपनी शुभकामनाएं भी प्रेषित की हैं।

युवाओं के लिए क्या है सीख

आज की युवा पीढ़ी यानी जेन-जी के लिए यह घटना मूल्य प्रणालियों और व्यक्तिगत सीमाओं के महत्व को दर्शाती है। जब आपके निजी उसूल किसी संगठन की कार्यपद्धति के साथ मेल न खाएं, तो बिना किसी संकोच के सही समय पर पीछे हट जाना ही बुद्धिमत्ता है। निरंजन सिंह का यह त्वरित कदम यह सीख देता है कि चाहे करियर हो या राजनीति, अपने मूल सिद्धांतों और संविधान के प्रति निष्ठा के साथ कभी भी समझौता न करना ही सबसे महत्वपूर्ण दृष्टिकोण है।

सवाल-जवाब

निरंजन सिंह कौन हैं?
निरंजन सिंह प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर हैं, जो ड्रग तस्करी मामले में अकाली नेता से पूछताछ के बाद सुर्खियों में आए थे।
उन्होंने किस पार्टी से नाता तोड़ा है?
उन्होंने वारिस पंजाब दे संगठन से अपना नाता तोड़ा है, जो जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह से जुड़ा है।
इस्तीफा देने की मुख्य वजह क्या थी?
वैचारिक मतभेदों और संगठन के साथ कुछ जरूरी मुद्दों पर असहमति के चलते उन्होंने यह कदम उठाया।
उन्होंने इस्तीफे में किस बात पर जोर दिया?
उन्होंने साफ किया कि सार्वजनिक जीवन में अनुशासन और देश का संविधान सबसे ऊपर है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·28 दिन पहले

जब मैं कुछ साल पहले चंडीगढ़ में एक स्थानीय चुनाव की रिपोर्टिंग कर रहा था, तब एक नेता ने मंच से बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन बाद में उनके संगठन के अंदरूनी तौर-तरीकों से तंग आकर मैंने खुद कई लोगों को बिना सोचे-समझे पार्टी छोड़ते देखा था। उसूलों के आगे राजनीति टिक नहीं पाती।

Ravikash Gupta@ravikash·28 दिन पहले

संविधान से बड़ा सचमुच कुछ नहीं है। अगर वैचारिक मेल न हो, तो बिना सोचे कदम पीछे खींच लेना ही बेहतर फैसला होता है।

Aisha Khan@aisha-khan·28 दिन पहले

रविकेश, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर इतने बड़े अधिकारी ने जब साथ आने का फैसला किया था, तो क्या उन्हें पहले से इस बात का अंदाज़ा नहीं था कि विचारधारा मेल नहीं खाएगी?

Karan Malhotra@karan-malhotra·28 दिन पहले

मजीठिया से पूछताछ करने वाले अफसर का इस तरह कुछ ही दिन में बाहर आना साफ बताता है कि वैचारिक मेल न होने पर टिके रहना मुश्किल होता है। संविधान और उसूलों से समझौता न करने का यह फैसला सही वक्त पर लिया गया कदम है।

Rohan Verma@rohan-verma·28 दिन पहले

बिल्कुल सही कहा करण भाई, उसूलों से बड़ा कुछ नहीं होता।

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