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सोनम वांगचुक का बड़ा बयान, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर खुलकर रखी अपनी बातराजनीति
30 अग॰ 2026, 6:45 pm (1 दिन पहले)· 3

सोनम वांगचुक का बड़ा बयान, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर खुलकर रखी अपनी बात

प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि युवाओं का राजनीति में आना गलत नहीं है, बशर्ते छात्र आंदोलनों का इस्तेमाल किसी राजनीतिक दल के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए न किया जाए।

जाने-माने पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापकों की राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर एक अहम बयान दिया है। उनका कहना है कि इन युवा नेताओं के मन में राजनीति में उतरने की तीव्र इच्छा हो सकती है, जो कि अपने आप में कोई गलत बात नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने वाले युवा यदि भविष्य में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने का निर्णय लेते हैं, तो इसे एक सामान्य और सकारात्मक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। हालांकि, उनका मुख्य जोर इस बात पर था कि जिस छात्र आंदोलन के मंच से ये नेता उभरे हैं, उसकी पवित्रता और निष्पक्षता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए।

जंतर-मंतर पर करीब से देखा

यह पूरी चर्चा तब सामने आई जब सोनम वांगचुक ने प्रखर गुप्ता के साथ एक पॉडकास्ट में शिरकत की। बातचीत के दौरान उन्होंने साझा किया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगभग दो महीने तक चले लंबे विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्होंने सीजेपी के प्रमुख संस्थापकों अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका के साथ काफी समय बिताया था। इन युवाओं के साथ काम करने और उनके तौर-तरीकों को नजदीक से देखने के बाद वांगचुक को इस बात का अहसास हुआ था कि उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं, भले ही उन्होंने कभी सीधे तौर पर इस बात की घोषणा नहीं की हो। वांगचुक ने यह भी कहा कि ये संस्थापक कोई संत नहीं हैं और राजनीति में जाने की उनकी इच्छा होना पूरी तरह स्वाभाविक है।

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आंदोलन और राजनीति का अलगाव

वांगचुक ने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष बल दिया कि व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा और किसी जन आंदोलन के चरित्र के बीच एक स्पष्ट रेखा खींची जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने सीजेपी के इन नेताओं को बार-बार समझाया था कि वे भविष्य में अपनी राजनीतिक राह चुनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं, लेकिन जिस छात्र आंदोलन का वे नेतृत्व कर रहे हैं, उसे किसी भी राजनीतिक दल के संकीर्ण हितों के साधन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, एक छात्र आंदोलन का मूल स्वरूप हमेशा गैर-राजनीतिक और पूरी तरह निष्पक्ष बना रहना चाहिए ताकि समाज के हर वर्ग का उस पर भरोसा कायम रह सके।

राजनीतिक दलों से दूरी जरूरी

विरोध प्रदर्शन के दौरान निष्पक्षता बनाए रखने के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि इस तरह के अभियानों को भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी या किसी भी अन्य राजनीतिक संगठन के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष एजेंडे से पूरी तरह दूर रखना अनिवार्य होता है। वांगचुक ने इस बात का भी उल्लेख किया कि उन्होंने इस विषय पर सीजेपी के संस्थापकों के साथ लगातार और लंबी बातचीत की थी। उन्हें इस बात की प्रसन्नता है कि अंततः इस समूह ने आंदोलन के मूल चरित्र को बचाए रखा और इसे किसी खास राजनीतिक दल के मंच के रूप में तब्दील नहीं होने दिया, जिससे इस अभियान की विश्वसनीयता पूरी तरह सुरक्षित रही।

लंबा चला था छात्र आंदोलन

यह पूरा घटनाक्रम उस छात्र आंदोलन से जुड़ा है जिसके तहत शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को उनके पद से हटाने की मांग को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस लंबे धरने के दौरान सीजेपी के संस्थापक छात्र नेताओं ने प्रमुख भूमिका निभाई थी और सोनम वांगचुक भी इस मुहिम के दौरान इन युवाओं के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे थे। इसी साझा संघर्ष के दौरान उनकी इन नेताओं से नजदीकी बढ़ी थी और उनके कार्य करने के तरीके को गहराई से समझने का अवसर मिला था। इस पूरे अभियान के दौरान वांगचुक की सबसे बड़ी प्राथमिकता यही सुनिश्चित करना थी कि छात्रों का यह मंच किसी चुनावी दल की विचारधारा का मोहरा न बने।

अभिजीत दिपके के अतीत पर स्पष्टीकरण

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के पुराने समय में आम आदमी पार्टी के साथ जुड़े होने के कारण उठने वाले विभिन्न सवालों पर भी वांगचुक ने बेबाकी से अपनी राय रखी। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने अतीत में किसी राजनीतिक दल के साथ मिलकर काम किया है, तो इसे केवल इसी आधार पर गलत नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने इस प्रकार की चिंताओं को पूरी तरह खारिज कर दिया कि दिपके का पुराना आप कनेक्शन वर्तमान छात्र आंदोलन की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर किसी भी प्रकार का दाग लगाता है। उनके अनुसार, किसी राजनीतिक दल के साथ कार्य करने का पूर्व अनुभव होना और मौजूदा निष्पक्ष आंदोलन को किसी दल विशेष के फायदे के लिए इस्तेमाल करना, ये दोनों बिल्कुल अलग और स्वतंत्र विषय हैं।

लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा

सोनम वांगचुक के इस पूरे वक्तव्य का सार यही है कि युवाओं की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को हतोत्साहित करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि देश के युवा समाज के ज्वलंत मुद्दों पर काम करते हुए आगे चलकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश करते हैं या अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पार्टी की स्थापना करते हैं, तो यह एक स्वस्थ लोकतंत्र की स्वाभाविक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, जिस विशिष्ट मंच के माध्यम से वे किसी जनसमस्या के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं, उसकी साख को बनाए रखना उससे भी कहीं अधिक आवश्यक कार्य है। वांगचुक के अनुसार, सीजेपी के इन युवा नेताओं ने संघर्ष के उन कठिन दिनों में इस नाजुक संतुलन को सफलताપૂર્વक साधकर दिखाया, जो इस पूरे आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।

सवाल-जवाब

सोनम वांगचुक ने किस संगठन के संस्थापकों के बारे में बयान दिया है?
सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के संस्थापकों के बारे में बयान दिया है।
वांगचुक ने सीजेपी के किन संस्थापकों का जिक्र किया है?
उन्होंने अभिजीत दिपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका का जिक्र किया है।
यह छात्र आंदोलन कहां और किस मांग को लेकर हुआ था?
यह आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने की मांग को लेकर हुआ था।
वांगचुक के अनुसार युवा नेताओं की राजनीति में रुचि के बारे में क्या राय है?
उनका मानना है कि युवाओं का राजनीति में आना या पार्टी बनाना गलत नहीं है, बशर्ते आंदोलन की निष्पक्षता बनी रहे।
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