पूर्वी सऊदी अरब के हवाई अड्डे पर हमला, दो लोगों की मौत और आठ घायलबैंक इंडोनेशिया के नीतिगत बदलावों के बीच उभरती मुद्राओं और वैश्विक बाजारों में हलचलआश्विन शुक्ल त्रयोदशी पर 23 अक्टूबर को मनेगा शुक्र प्रदोष व्रत, जानिए शाम की पूजा का सटीक समय और चौघड़ियाकरवा चौथ पर पत्नी को भेंट करें ये ट्रेंडी मिनिमल मंगलसूत्र, बॉलीवुड सितारों के अंदाज से लें प्रेरणानौकरी बदलने या छोड़ने पर अटक गया है प्रोविडेंट फंड? जानिए ईपीएफओ में शिकायत का कानूनी तरीकायूरोपीय प्राइवेसी नियमों से मेटा के विज्ञापन कारोबार को झटका, अमेरिकी बाजार से पिछड़ा यूरोप का रेवेन्यूअमेरिकी नशीले पदार्थों की एजेंसी में डार्क वेब और क्रिप्टो अपराधों को बेनकाब करने वाली महिला जासूस की अनसुनी दास्तानअमेरिकी सेना के लिए जेनेटिकली मॉडिफाइड खोजी कुत्ते तैयार करेगा नया रक्षा स्टार्टअपदीवाली पर पीतल की मूर्तियां खरीदते वक्त रखें इन बातों का ध्यान, ऐसे करें असली और नकली की पहचानमूलांक 1 राशिफल 23 अक्टूबर 2026: हर जिम्मेदारी खुद पर न लादें, फैसले से पहले लें थोड़ा विराम
नेपाल के त्रिशूली बाजार में बाढ़ के बाद मलबे पर बैठा वफादार कुत्तादुनिया
31 अग॰ 2026, 9:39 pm (52 दिन पहले)· 3

नेपाल के त्रिशूली बाजार में बाढ़ के बाद मलबे पर बैठा वफादार कुत्ता

नेपाल के त्रिशूली बाजार में आई भीषण बाढ़ के बाद सब कुछ तबाह हो गया, लेकिन एक वफादार कुत्ता अपने ढहे हुए घर की चौखट छोड़ने को तैयार नहीं है।

यदि आपको लगता है कि वफादारी और दुख की भावनाएं केवल इंसानों तक सीमित हैं, तो नेपाल के त्रिशूली बाजार की यह दृश्य आपके दिल को झकझोर कर रख देगा। हाल ही में आई भयंकर और खौफनाक बाढ़ ने इस इलाके में भारी तबाही मचाई है, जिसमें चार आवासीय मकान पूरी तरह से पानी में बह गए और पूरा क्षेत्र मलबे के ढेर में बदल गया। इसी मलबे के बीच एक काले और सफेद रंग का कुत्ता बैठा हुआ है, जिसके गले में आज भी उसके मालिक का पट्टा सुरक्षित बंधा हुआ है। वह बेजुबान प्राणी अपने पूरी तरह से ढह चुके घर की दहलीज को छोड़ने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है, भले ही वहां अब कुछ भी शेष नहीं बचा है।

मशीनों के शोर और कीचड़ के बीच अडिग पहरा

इस ताहबी के बीच घटनास्थल पर भारी मशीनें लगातार काम कर रही हैं। आसपास आधे दर्जन से ज्यादा जेसीबी और अन्य भारी उपकरण कानफाड़ू शोर मचा रहे हैं, जबकि बचाव दल के कर्मचारी मलबे और गाद को हटाने में जुटे हुए हैं। इसके बावजूद, वह कुत्ता एकटक उसी कीचड़ से सने छोटे से हिस्से को निहार रहा है। उसकी पूंछ में कोई हरकत नहीं होती और न ही उसकी आंखों में किसी प्रकार का डर दिखाई देता है। उसकी स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वह सिर्फ इस उम्मीद में बैठा है कि उसके अपने परिवार के लोग और मालिक जल्द ही लौटकर वापस आ जाएंगे।

ये भी पढ़ें

राहत सामग्री और बिस्कुट ठुकराए

मौके पर राहत और बचाव कार्य संभाल रहे वॉलंटियर बिक्रम थापा ने जानकारी दी कि शुरुआत में वहां मौजूद हर शख्स ने उस कुत्ते को दुलारने और वहां से सुरक्षित स्थान पर हटाने का प्रयास किया था। लोगों ने उसे खाने के लिए बिस्कुट दिए और उसके पुराने नामों से पुकारा, लेकिन उसने एक बार भी मुड़कर उनकी तरफ नहीं देखा। उसके गले में पड़ा हुआ पट्टा इस बात की गवाही दे रहा है कि कुछ ही दिन पहले तक वह किसी परिवार का बेहद दुलारा और पालतू सदस्य था। भारी मशीनों को चलाने वाले ऑपरेटर सुनील तामांग का कहना है कि जेसीबी का इतना भयानक शोर भी उसे अपनी जगह से डिगा नहीं पाता है। खुदाई करने वाली बड़ी-बड़ी मशीनें उसके बेहद करीब से निकल जाती हैं, फिर भी वह उसी कीचड़ से भरे गड्ढे में चुपचाप बैठा रहता है। उसने अपनी पुरानी बाउंड्री और आंगन के दायरे को किसी भी कीमत पर पार न करने की कसम सी खा रखी है।

तबाही के निशान और अनिश्चितता

इस भीषण बाढ़ ने पूरे मोहल्ले के अस्तित्व को ही मिटा दिया है। जिन चार घरों की एक सुंदर कतार हुआ करती थी, वहां अब केवल कीचड़, बिखरा हुआ मलबा और बर्बादी के भयावह निशान बाकी हैं। मौके पर राहत कार्यों में जुटे किसी भी कर्मचारी को यह नहीं मालूम है कि उस कुत्ते के असली मालिक कौन थे या वह उन चार बहे हुए मकानों में से किस घर का हिस्सा था। हालांकि, उसका बार-बार उसी पुरानी चौखट पर लौटकर बैठना और अपने आंगन की तय सीमा को न लांघना यह साफ तौर पर जाहिर करता है कि यही उसका घर था। जहां इस आपदा के दौरान अन्य पशु जान बचाने के लिए सुरक्षित ऊंचे स्थानों की ओर भाग गए थे, वहीं यह अकेला जीव वहीं डटा रहा।

वहां के स्थानीय दुकानदारों और इसी बाढ़ में अपना आशियाना गंवा चुके बेघर लोगों का दिल भी इस वफादार बेजुबान की हालत देखकर पसीज गया है। कम्युनिटी एनिमल रेस्क्यू वॉलंटियर रीता गुरुंग ने मीडिया को बताया कि अब बचाव कर्मियों ने उसे वहां से बलपूर्वक हटाने का विचार छोड़ दिया है। इसके बजाय, अब यह व्यवस्था की गई है कि हर कुछ घंटों के अंतराल पर उसके पास सूखा भोजन और पीने का पानी रख दिया जाता है, जिसे वह चारों तरफ शांति होने पर चुपचाप खा लेता है।

इंसानों और जानवर के दर्द का फर्क

इसी बाढ़ के कारण अपना घर खोने वाले दिनेश बस्थाल ने इस स्थिति पर बात करते हुए कहा कि हम इंसानों ने अपने मकान और संपत्ति खोई है, लेकिन हम कम से कम यह बात अच्छी तरह समझते हैं कि असल में क्या हुआ है। इसके विपरीत, यह बेजुबान यह बिल्कुल नहीं समझ पा रहा है कि आखिर उसकी पूरी दुनिया यानी उसके अपने लोग अचानक कहां गायब हो गए हैं। वह केवल इतनी सी बात जानता है कि जब तक उसके परिवार के सदस्य वापस नहीं आ जाते, उसे यह जगह छोड़कर कहीं नहीं जाना है।

सवाल-जवाब

यह घटना कहाँ की है?
यह घटना नेपाल के नुवाकोट जिले के त्रिशूली बाजार की है।
बाढ़ में कितने घर बहे थे?
इस भीषण बाढ़ में कुल चार घर पूरी तरह से बह गए थे और मलबे में तब्दील हो गए थे।
कुत्ता अपनी जगह से क्यों नहीं हट रहा है?
कुत्ता अपने मालिक और पुराने घर के प्रति अत्यधिक वफादारी और इस उम्मीद में वहीं बैठा है कि उसका परिवार लौटकर आएगा।
कुत्ते के लिए खाने की व्यवस्था कौन कर रहा है?
कम्युनिटी एनिमल रेस्क्यू वॉलंटियर और राहतकर्मी हर कुछ घंटों के बाद उसके लिए सूखा खाना और पानी रख जाते हैं।
क्या कुत्ते को वहां से हटाने की कोशिश की गई थी?
हां, शुरुआत में लोगों ने उसे पुचकारकर और बिस्कुट देकर हटाने की कोशिश की थी, लेकिन उसने जाने से मना कर दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·52 दिन पहले

नेपाल के त्रिशूली बाजार में प्राकृतिक आपदा के बीच इस मूक प्राणी का अपने ढहे हुए घर पर अडिग रहना मानवीय संवेदनाओं और पशुओं के बीच गहरे भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित करता है। जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिण एशिया में लगातार बढ़ रही ऐसी चरम मौसमी घटनाएं न केवल इंसानों के आशियाने और अर्थव्यवस्था को तबाह कर रही हैं, बल्कि क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र और बेजुबान जीवों के जीवन को भी गंभीर खतरे में डाल रही हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·52 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि आपदाओं के समय प्रशासनिक और राहत कार्य प्रणालियों में बेजुबान और पालतू जानवरों के विस्थापन व पुनर्वास की कोई पुख्ता नीति नहीं होती है। जलवायु आपदाओं से निपटने वाले हमारे नीतिगत ढांचे में अभी भी मानवीय जीवन से परे व्यापक पारिस्थितिकीय और पशु कल्याण के आयामों का अभाव है, जिस पर शासन स्तर पर तुरंत ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp