यदि आपको लगता है कि वफादारी और दुख की भावनाएं केवल इंसानों तक सीमित हैं, तो नेपाल के त्रिशूली बाजार की यह दृश्य आपके दिल को झकझोर कर रख देगा। हाल ही में आई भयंकर और खौफनाक बाढ़ ने इस इलाके में भारी तबाही मचाई है, जिसमें चार आवासीय मकान पूरी तरह से पानी में बह गए और पूरा क्षेत्र मलबे के ढेर में बदल गया। इसी मलबे के बीच एक काले और सफेद रंग का कुत्ता बैठा हुआ है, जिसके गले में आज भी उसके मालिक का पट्टा सुरक्षित बंधा हुआ है। वह बेजुबान प्राणी अपने पूरी तरह से ढह चुके घर की दहलीज को छोड़ने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं है, भले ही वहां अब कुछ भी शेष नहीं बचा है।
मशीनों के शोर और कीचड़ के बीच अडिग पहरा
इस ताहबी के बीच घटनास्थल पर भारी मशीनें लगातार काम कर रही हैं। आसपास आधे दर्जन से ज्यादा जेसीबी और अन्य भारी उपकरण कानफाड़ू शोर मचा रहे हैं, जबकि बचाव दल के कर्मचारी मलबे और गाद को हटाने में जुटे हुए हैं। इसके बावजूद, वह कुत्ता एकटक उसी कीचड़ से सने छोटे से हिस्से को निहार रहा है। उसकी पूंछ में कोई हरकत नहीं होती और न ही उसकी आंखों में किसी प्रकार का डर दिखाई देता है। उसकी स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि वह सिर्फ इस उम्मीद में बैठा है कि उसके अपने परिवार के लोग और मालिक जल्द ही लौटकर वापस आ जाएंगे।
राहत सामग्री और बिस्कुट ठुकराए
मौके पर राहत और बचाव कार्य संभाल रहे वॉलंटियर बिक्रम थापा ने जानकारी दी कि शुरुआत में वहां मौजूद हर शख्स ने उस कुत्ते को दुलारने और वहां से सुरक्षित स्थान पर हटाने का प्रयास किया था। लोगों ने उसे खाने के लिए बिस्कुट दिए और उसके पुराने नामों से पुकारा, लेकिन उसने एक बार भी मुड़कर उनकी तरफ नहीं देखा। उसके गले में पड़ा हुआ पट्टा इस बात की गवाही दे रहा है कि कुछ ही दिन पहले तक वह किसी परिवार का बेहद दुलारा और पालतू सदस्य था। भारी मशीनों को चलाने वाले ऑपरेटर सुनील तामांग का कहना है कि जेसीबी का इतना भयानक शोर भी उसे अपनी जगह से डिगा नहीं पाता है। खुदाई करने वाली बड़ी-बड़ी मशीनें उसके बेहद करीब से निकल जाती हैं, फिर भी वह उसी कीचड़ से भरे गड्ढे में चुपचाप बैठा रहता है। उसने अपनी पुरानी बाउंड्री और आंगन के दायरे को किसी भी कीमत पर पार न करने की कसम सी खा रखी है।
तबाही के निशान और अनिश्चितता
इस भीषण बाढ़ ने पूरे मोहल्ले के अस्तित्व को ही मिटा दिया है। जिन चार घरों की एक सुंदर कतार हुआ करती थी, वहां अब केवल कीचड़, बिखरा हुआ मलबा और बर्बादी के भयावह निशान बाकी हैं। मौके पर राहत कार्यों में जुटे किसी भी कर्मचारी को यह नहीं मालूम है कि उस कुत्ते के असली मालिक कौन थे या वह उन चार बहे हुए मकानों में से किस घर का हिस्सा था। हालांकि, उसका बार-बार उसी पुरानी चौखट पर लौटकर बैठना और अपने आंगन की तय सीमा को न लांघना यह साफ तौर पर जाहिर करता है कि यही उसका घर था। जहां इस आपदा के दौरान अन्य पशु जान बचाने के लिए सुरक्षित ऊंचे स्थानों की ओर भाग गए थे, वहीं यह अकेला जीव वहीं डटा रहा।
वहां के स्थानीय दुकानदारों और इसी बाढ़ में अपना आशियाना गंवा चुके बेघर लोगों का दिल भी इस वफादार बेजुबान की हालत देखकर पसीज गया है। कम्युनिटी एनिमल रेस्क्यू वॉलंटियर रीता गुरुंग ने मीडिया को बताया कि अब बचाव कर्मियों ने उसे वहां से बलपूर्वक हटाने का विचार छोड़ दिया है। इसके बजाय, अब यह व्यवस्था की गई है कि हर कुछ घंटों के अंतराल पर उसके पास सूखा भोजन और पीने का पानी रख दिया जाता है, जिसे वह चारों तरफ शांति होने पर चुपचाप खा लेता है।
इंसानों और जानवर के दर्द का फर्क
इसी बाढ़ के कारण अपना घर खोने वाले दिनेश बस्थाल ने इस स्थिति पर बात करते हुए कहा कि हम इंसानों ने अपने मकान और संपत्ति खोई है, लेकिन हम कम से कम यह बात अच्छी तरह समझते हैं कि असल में क्या हुआ है। इसके विपरीत, यह बेजुबान यह बिल्कुल नहीं समझ पा रहा है कि आखिर उसकी पूरी दुनिया यानी उसके अपने लोग अचानक कहां गायब हो गए हैं। वह केवल इतनी सी बात जानता है कि जब तक उसके परिवार के सदस्य वापस नहीं आ जाते, उसे यह जगह छोड़कर कहीं नहीं जाना है।


















