महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व पंक्ति के खिलाफ पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। मुंबई स्थित दिंडोशी पुलिस थाने में सौंपी गई इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक सार्वजनिक समारोह के दौरान राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' के गायन में व्यवधान डाला गया। शिकायतकर्ता ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर पूरे मामले की गहन जांच की मांग की है।
स्वतंत्रता दिवस समारोह और विवादित वीडियो फुटेज
यह मामला 15 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में स्थित ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ा हुआ है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत पार्टी के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता एकत्र हुए थे। कार्यक्रम के दौरान जब राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' का सामूहिक गायन चल रहा था, तब की एक वीडियो फुटेज सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर प्रसारित हुई।
मुंबई में बीजेपी के प्रदेश सचिव अखिलेश चौबे द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, वायरल वीडियो में मंच पर मौजूद सोनिया गांधी को गायन के शुरुआती चरण में ही पास खड़े नेताओं से बातचीत करते और इशारे करते देखा जा सकता है। शिकायत में दावा किया गया है कि उन्होंने हाथ के इशारे से राष्ट्रीय गीत को बीच में ही समाप्त करने का संकेत दिया। इसके अलावा, शिकायत में यह भी आरोप है कि जब गीत जारी था, तब राहुल गांधी ने भी मंच पर कुछ ऐसे इशारे किए जो राष्ट्रीय गीत के प्रवाह को रोकने से संबंधित प्रतीत होते हैं।
कानूनी प्रावधान और 2026 का संशोधन कानून
शिकायतकर्ता ने अपनी याचिका में राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम से जुड़े कानून 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971' का विशेष रूप से उल्लेख किया है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 2026 में इस अधिनियम में किए गए महत्वपूर्ण संशोधन के माध्यम से राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को भी वही कानूनी सुरक्षा और दर्जा प्रदान किया गया है जो पहले राष्ट्रगान के लिए निर्धारित था।
इस कानून की धारा 3 के अंतर्गत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगान या राष्ट्रीय गीत के गायन में बाधा डालता है, गायन को जबरन रुकवाता है या सामूहिक रूप से गा रहे लोगों के बीच व्यवधान पैदा करता है, तो यह संज्ञेय अपराध माना जाता है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की कैद, आर्थिक जुर्माना या दोनों सजाएं दी जा सकती हैं। शिकायत में इसी कानूनी प्रावधान को आधार बनाते हुए कांग्रेस नेताओं पर मामला दर्ज करने का आग्रह किया गया है।
सुरक्षित फुटेज और निष्पक्ष जांच की मांग
बीजेपी नेता अखिलेश चौबे ने दिंडोशी पुलिस से अनुरोध किया है कि वे इस मामले में त्वरित कार्रवाई करें और स्वतंत्रता दिवस समारोह के सभी प्रामाणिक वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित करें। शिकायत में जोर दिया गया है कि मंच पर मौजूद नेताओं के आचरण और इशारों की फोरेंसिक व तकनीकी जांच की जानी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या यह राष्ट्रीय गीत को रोकने का कोई पूर्व-नियोजित अथवा जानबूझकर किया गया प्रयास था।
शिकायतकर्ता का कहना है कि पुलिस को निष्पक्षता से जांच करते हुए लागू कानूनी धाराओं के तहत FIR दर्ज करनी चाहिए। दूसरी ओर, कानून विशेषज्ञों और पुलिस अधिकारियों का मानना है कि प्राथमिक शिकायत के आधार पर साक्ष्यों की प्रारंभिक जांच की जाएगी और उसके बाद ही आगे की कानूनी कार्रवाई या FIR दर्ज करने पर फैसला लिया जाएगा।



















