पश्चिम बंगाल की सियासत इस समय उबाल पर है और राज्य में सत्ता संघर्ष का बेहद आक्रामक रूप सामने आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमों ममता बनर्जी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें उन्हीं के आवास पर नजरबंद कर दिया गया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच टीएमसी के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक कुणाल घोष के वाहन पर उपद्रवियों ने हमला बोल दिया, जिससे राज्य की राजनीतिक सरगर्मी और ज्यादा बढ़ गई है। बंगाल की राजनीति में इस समय दोनों प्रमुख दलों के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर पहुंच चुका है।
कुणाल घोष की कार पर लगातार तीसरी बार हमला
तृणमूल कांग्रेस के प्रभावशाली नेता कुणाल घोष जब ममता बनर्जी की एक निर्धारित रैली में शामिल होने के लिए जा रहे थे, तभी रास्ते में असामाजिक तत्वों ने उनकी गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया। हमलावरों ने कार पर ताबड़तोड़ अंडे फेंके और लाठी-डंडों से वार करके गाड़ियों के शीशे पूरी तरह चकनाचूर कर दिए। पिछले चार महीनों के भीतर कुणाल घोष की गाड़ी पर यह तीसरा बड़ा हमला हुआ है, जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी गुस्सा व्याप्त है। इस घटना के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए भाजपा सरकार और स्थानीय पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार हमला बोला।
अदालत की अनुमति के बावजूद घर से न निकलने देने का आरोप
कोलकाता और हुगली में आयोजित जनसभाओं को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने प्रशासन और भाजपा पर तीखे प्रहार किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की इस बैठक के लिए अदालत से पूरे पंद्रह दिन पहले ही विधिवत अनुमति प्राप्त कर ली गई थी, इसके बावजूद उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया। ममता ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के उपद्रवियों ने सड़कों को पूरी तरह से जाम कर दिया है और पुलिस मूकदर्शक बनकर उनका सहयोग कर रही है। कुणाल घोष की गाड़ी में हुई तोड़फोड़ का जिक्र करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की घटनाएं स्वस्थ लोकतंत्र का संकेत हैं।
पुलिस की भूमिका पर खड़े किए गंभीर सवाल
अपने तीखे भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधते ہوئے एक बेहद कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन को सत्ताधारी दल के इशारों पर ही काम करना है, तो उन्हें अपनी वर्दी उतारकर सीधे तौर पर भाजपा का झंडा थाम लेना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उत्तरपाड़ा क्षेत्र में जानबूझकर भारी जाम लगाया गया ताकि आम लोग और समर्थक उनके कार्यक्रम तक न पहुंच सकें। ममता के अनुसार, उनके लगभग दो सौ कार्यकर्ताओं को डराया-धमकाया गया और गिरफ्तार कर लिया गया, और वह कल्याण बनर्जी के प्रयासों के कारण ही किसी तरह कार्यक्रम स्थल तक पहुंच पाईं।
बंगाल की सियासत में गर्माया माहौल
ममता बनर्जी के इन कड़े बयानों और टीएमसी नेताओं पर हो रहे लगातार हमलों के बाद विपक्षी और सत्तारूढ़ खेमों के बीच नया राजनीतिक नैरेटिव तैयार होने लगा है। टीएमसी का आरोप है कि राज्य में विपक्षी और टीएमसी की आवाजों को दबाने का कुचक्र चलाया जा रहा है, और रैलियों में भीड़ को रोकने के लिए कार्यकर्ताओं को घरों में डराया-धमकाया जा रहा है तथा उनकी गिरफ्तारियां की जा रही हैं। कुणाल घोष पर हुए हमले और हाउस अरेस्ट जैसे बयानों के बाद यह विवाद अब केवल सड़कों की नारेबाजी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में कानूनी और राजनीतिक मंचों पर भी पूरी तरह से तूल पकड़ेगा।



















