संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को उसी के अंदाज में बेबाक जवाब दिया। न्यूयॉर्क में आयोजित इस वैश्विक मंच पर एक पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर झूठे और निराधार आरोप लगाए, लेकिन एस. जयशंकर ने अपने एक ही वाक्य से उसका मुंह पूरी तरह बंद कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से दो टूक शब्दों में कहा कि एक आतंकवादी देश इस तरह का सवाल पूछ रहा है। इस तीखी प्रतिक्रिया के बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल तुरंत सभाकक्ष से बाहर निकल गया। देश के भीतर भी विदेश मंत्री के इस आक्रामक और कड़े तेवर की जमकर सराहना हो रही है। देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद मनीष तिवारी ने भी एस. जयशंकर के इस कूटनीतिक रुख की मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। मनीष तिवारी ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की पुरानी और कुटिल फितरत पूरे दक्षिण एशिया में आतंकवाद को पोषित करने की रही है। इस राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर पूरा देश बिना किसी मतभेद के एक स्वर में खड़ा नजर आ रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में क्या हुआ था पूरा घटनाक्रम
न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में जब कूटनीतिक बैठकों का दौर चल रहा था, तब माहौल सामान्य था। इसी दौरान एक पाकिस्तानी मीडियाकर्मी ने एस. जयशंकर के सामने एक बेहद हास्यास्पद और बेतुका सवाल उछाल दिया। उसने पूछा कि भारत आखिरकार पड़ोसी मुल्क में अशांति फैलाना कब बंद करेगा। इस पर एस. जयशंकर ने एक पल की भी देर किए बिना बेहद तीखा पलटवार किया। विदेश मंत्री ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। इस तीखे और कड़े जवाब के मिलते ही पूरी सभा में सन्नाटा छा गया। इसके तुरंत बाद एस. जयशंकर और अन्य भारतीय प्रतिनिधि अपनी कुर्सियों से उठे और कक्ष से बाहर चले गए। वह पाकिस्तानी पत्रकार भौचक्का रह गया और पीछे से अपने बेतुके सवाल को दोहराता ही रह गया। विदेश मंत्री का यह बेखौफ अंदाज इस समय पूरी दुनिया में प्रमुखता से चर्चा का विषय बना हुआ है और सोशल मीडिया पर इसकी गूंज सुनाई दे रही है।
मनीष तिवारी ने पाकिस्तान पर खोले बड़े राज
एस. जयशंकर के इस साहसी बयान के ठीक बाद कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी का भी एक कड़ा बयान सामने आया। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार वर्ष 1971 में बांग्लादेश के अभ्युदय के बाद से पाकिस्तान मानसिक रूप से बौखलाया हुआ है। उसके बाद से ही उस देश ने भारत को लगातार हजार घाव देकर कमजोर करने की सुनियोजित नीति अपनाई है। मनीष तिवारी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा आतंकवादी मुल्क है जहाँ सेना देश की नहीं है, बल्कि पूरा देश ही उस सेना के अधीन और नियंत्रण में चलता है। उन्होंने वैश्विक समुदाय को यह भी याद दिलाया कि दुनिया का सबसे कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन पाकिस्तान के ही एबटाबाद शहर में सुरक्षित छिपा बैठा था। अमेरिकी कमांडो दस्ते ने उसी के घर के अंदर घुसकर उस खूंखार आतंकी को मौत के घाट उतार दिया था। इन अकाट्य ऐतिहासिक तथ्यों के मद्देनजर पाकिस्तान के पास आतंकवाद के मुद्दे पर भारत से सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं बचता है।
सिंधु जल समझौते पर शहबाज शरीफ की धमकी का भारत का जवाब
संयुक्त राष्ट्र के मंच से पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते के मुद्दे पर भी जमकर जहर उगला था। शहबाज शरीफ ने भारत को खुली धमकी देते हुए कहा था कि देश का पानी रोकने के किसी भी प्रयास को युद्ध की घोषणा मान लिया जाएगा। इस बचकानी और गीदड़भभकी पर कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने भारत सरकार के उठाए गए कूटनीतिक कदमों को पूरी तरह से सही और सटीक ठहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिंधु जल समझौते को फिलहाल रोककर रखना भारत का एक बेहद बेहतरीन और नपा-तुला कूटनीतिक कदम है। इसके माध्यम से पाकिस्तान को बहुत स्पष्ट संदेश दिया गया है कि यदि वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया और आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा, तो उसे भारी आर्थिक और सामरिक नुकसान उठाना पड़ेगा। खून और पानी कभी भी एक साथ नहीं बह सकते हैं। भारत ने अपनी शानदार कूटनीति के बल पर वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान की चतरफ से पूरी तरह घेराबंदी कर दी है जिससे वह हर मोर्चे पर घिर चुका है।
























