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तमिलनाडु विधानसभा में दिवंगत नेता का नाम बिना सम्मानसूचक शब्द के लेने पर बवाल, मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मांगी माफीराजनीति
18 अग॰ 2026, 2:04 pm (24 दिन पहले)· 2

तमिलनाडु विधानसभा में दिवंगत नेता का नाम बिना सम्मानसूचक शब्द के लेने पर बवाल, मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने मांगी माफी

तमिलनाडु विधानसभा में वन मंत्री द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का नाम बिना सम्मानसूचक संबोधन के लिए जाने पर हंगामा हुआ, जिसके बाद मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने हस्तक्षेप कर माफी मांगी।

तमिलनाडु विधानसभा में सोमवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया जब वन मंत्री आर वी रंजीत कुमार ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत नेता एम. करुणानिधि का नाम लेते समय तय परंपरा का पालन नहीं किया। सदन के भीतर विपक्षी दल के कड़े विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने तुरंत मामले में दखल दिया और अपने मंत्री की तरफ से पूरे सदन से औपचारिक रूप से माफी मांगी।

संसदीय परंपरा और विवाद की वजह

यह विवाद स्वास्थ्य और राजस्व विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सामने आया। सदन में भाषण देते हुए वन मंत्री आर वी रंजीत कुमार ने दिवंगत नेता का नाम बिना किसी सम्मानसूचक संबोधन के सीधे बोल दिया। तमिलनाडु विधानसभा की पुरानी परंपरा के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का जिक्र करते समय उनके नाम के साथ 'कलैग्नर' या 'पूर्व मुख्यमंत्री' जैसे सम्मानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है। 'कलैग्नर' शब्द का अर्थ विद्वान होता है। मंत्री द्वारा इस परंपरा की अनदेखी किए जाने पर विपक्षी द्रमुक के विधायकों ने तुरंत कड़ा ऐतराज जताया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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मुख्यमंत्री का हस्तक्षेप और माफी

विपक्ष के हंगामे और नारेबाजी के कारण जब विधानसभा की कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न होने लगा, तब स्थिति को संभालने के लिए मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय खुद आगे आए। उन्होंने स्वीकार किया कि दिवंगत नेता का नाम इस तरह से लेना सर्वथा अनुचित था। सदन में मर्यादा और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री ने कहा कि वह अपने मंत्री की तरफ से माफी मांगते हैं।

चुनाव और 'तिरुमंगलम फॉर्मूले' का जिक्र

वन मंत्री आर वी रंजीत कुमार असल में पिछले चुनावों में वोट के बदले पैसे बांटने की नीति पर हमला बोल रहे थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने चर्चित 'तिरुमंगलम फॉर्मूले' का उल्लेख किया और दावा किया कि पिछले चुनावों में उनके अपने कांचीपुरम विधानसभा क्षेत्र में प्रति वोट 1,500 रुपये तक बांटे गए थे। उन्होंने कहा कि टीवीके बिना पैसे बांटे सत्ता में आई है, जबकि पिछली सरकारें धनबल के दम पर बनी थीं। इसी चुनावी रणनीति का विश्लेषण करते समय उनके मुंह से करुणानिधि का नाम बिना सम्मानसूचक शब्द के निकल गया, जिससे पूरा विवाद खड़ा हुआ।

सवाल-जवाब

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने विधानसभा में माफी क्यों मांगी?
मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने इसलिए माफी मांगी क्योंकि वन मंत्री आर वी रंजीत कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का नाम लेते समय 'कलैग्नर' जैसे तय सम्मानसूचक शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था।
विधानसभा में किस मंत्री ने यह विवादित टिप्पणी की थी?
वन मंत्री आर वी रंजीत कुमार ने स्वास्थ्य और राजस्व विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान बिना सम्मानसूचक संबोधन के पूर्व मुख्यमंत्री का नाम लिया था।
तमिलनाडु विधानसभा में एम. करुणानिधि के लिए किस सम्मानसूचक शब्द का प्रयोग किया जाता है?
तमिलनाडु विधानसभा की परंपरा के अनुसार एम. करुणानिधि का जिक्र करते समय उनके नाम के साथ 'कलैग्नर' शब्द का प्रयोग किया जाता है, जिसका अर्थ विद्वान होता है।
भाषण के दौरान मंत्री आर वी रंजीत कुमार ने चुनाव को लेकर क्या दावा किया?
मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले चुनावों में 'तिरुमंगलम फॉर्मूले' के तहत उनके कांचीपुरम विधानसभा क्षेत्र में प्रति वोट 1,500 रुपये तक बांटे गए थे।
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टिप्पणियाँ 2

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

तमिलनाडु विधानसभा का यह घटनाक्रम केवल एक शिष्टाचार उल्लंघन नहीं, बल्कि राज्य के राजनीतिक अर्थशास्त्र और चुनावी रणनीति की गहरी परतें खोलता है। वन मंत्री द्वारा 'तिरुमंगलम फॉर्मूले' और वोट के बदले नकद वितरण जैसे गंभीर वित्तीय विषयों पर की गई टिप्पणी यह दर्शाती है कि क्षेत्रीय राजनीति में धनबल और चुनावी रणनीतियां कितने गहरे तक जुड़ी हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने सदन में त्वरित माफी मांगकर तात्कालिक राजनीतिक संकट को टाल दिया है, लेकिन धन-संचालित राजनीति और कैश-फॉर-वोट के इन मुद्दों पर छिड़ी बहस आने वाले दिनों में राज्य के वित्तीय और राजनीतिक परिदृश्य को और अधिक प्रभावित करेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

रविकाश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस घटना में 'तिरुमंगलम फॉर्मूले' का उल्लेख और प्रति वोट नकद वितरण के आरोप गंभीर चुनावी अपराध और वित्तीय भ्रष्टाचार के दायरे में आते हैं। एक क्राइम संवाददाता के तौर पर मेरा मानना है कि जब सदन के पटल पर मंत्री स्वयं सार्वजनिक रूप से इस तरह के अवैध लेन-देन और धनबल के इस्तेमाल की बात स्वीकार कर रहे हैं, तो यह चुनाव आयोग और प्रवर्तन एजेंसियों के लिए स्वतः संज्ञान लेने योग्य गंभीर मामला बन जाता है। इस खुलासे के बाद भविष्य की चुनावी जांच और निगरानी और अधिक सख्त होने की पूरी संभावना है।

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