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उत्तर प्रदेश के कानपुर में कांग्रेस नेताओं ने सड़क पर उतारी नाव, जलभराव को लेकर प्रशासन पर बोला तीखा हमलाराजनीति
24 अग॰ 2026, 11:31 pm (18 दिन पहले)· 2

उत्तर प्रदेश के कानपुर में कांग्रेस नेताओं ने सड़क पर उतारी नाव, जलभराव को लेकर प्रशासन पर बोला तीखा हमला

कानपुर में भारी बारिश के बाद हुए गंभीर जलभराव से परेशान कांग्रेस नेताओं ने सड़कों पर नाव चलाकर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान नगर निगम और प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए गए।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में मानसून की बारिश के बाद उत्पन्न हुई विकट जलभराव की स्थिति ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है। शहर की सड़कों पर हुए भयंकर जलभराव के बीच कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार और अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करने के लिए एक नायाब तरीका अपनाया। कानपुर दक्षिण के गोविंद नगर इलाके में पानी से लबालब भरी सड़क के बीचों-बीच कांग्रेस नेताओं विकास अवस्थी और प्रभाकर पांडे ने नाव चलाकर जोरदार विरोध दर्ज कराया। इस अनोखे प्रदर्शन के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि शहर की प्रमुख सड़कें अब वाहनों के आवागमन के योग्य नहीं बल्कि जल परिवहन यानी नाव चलाने लायक बन चुकी हैं।

गोविंद नगर में जलभराव से जनजीवन अस्त-व्यस्त

विरोध प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर जमकर भड़ास निकाली। उनका आरोप था कि कानपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में तब्दील करने के लिए बड़े-बड़े विज्ञापनों का सहारा लिया जाता है और करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे होते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि हल्की सी बारिश होते ही शहर के कई अहम इलाके पानी में डूब जाते हैं। गोविंद नगर की जनता पिछले करीब दस वर्षों से इस गंभीर समस्या से जूझ रही है। यहां थोड़ी सी बारिश के बाद ही सड़कों पर इतना पानी जमा हो जाता है कि पैदल चलने वाले राहगीर, दोपहिया और चार पहिया वाहन चालक तथा स्थानीय दुकानदार भारी मुसीबतों का सामना करने को मजबूर हो जाते हैं।

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अधिकारियों की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

सड़क पर नाव खेते हुए विकास अवस्थी और प्रभाकर पांडे ने तीखे शब्दों में कहा कि जब शहर की सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, तो यह सवाल उठना लाजिमी है कि जल निकासी के पुख्ता इंतजाम के दावे करने वाले जिम्मेदार अधिकारी अपनी ठंडी एसी केबिनों से बाहर क्यों नहीं निकलते। उन्होंने इस बात का भी जिक्र किया कि हाल ही में कार्यों में लापरवाही बरतने के कारण कानपुर नगर आयुक्त को मुख्यमंत्री की कड़ी फटकार का सामना करना पड़ा था, जिसकी गूंज कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी सुनाई दी थी। गोविंद नगर जैसे घनी आबादी वाले और मुख्य इलाके में घंटों तक पानी का जमा रहना आम जनता की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।

व्यापारियों के कारोबार को भारी नुकसान

प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि जलभराव की इस चिरपरिचित समस्या की वजह से स्थानीय बाजार और व्यापारियों का कारोबार चौपट हो रहा है। दुकानों के बाहर जलभराव होने के कारण ग्राहक उस बाजार का रुख करने से बचते हैं। कई बार पानी का स्तर इतना ऊपर आ जाता है कि वाहनों को पार करना असंभव हो जाता है। लंबे अरसे से चली आ रही इस समस्या का कोई स्थायी हल नहीं निकाले जाने के कारण कारोबारियों को लगातार वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है। बारिश थमने के बाद भी पानी की निकासी में चार से पांच घंटे का समय लग जाता है, जिससे लोगों का जनजीवन ठप पड़ जाता है.

स्मार्ट सिटी के दावों और मेयर पर निशाना

कांग्रेस नेताओं ने स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत आवंटित और खर्च होने वाले धन के उपयोग पर भी कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि शहर को विकसित बनाने के नाम पर विज्ञापनों में भले ही विकास की लंबी-चौड़ी कहानियां सुनाई जाती हों, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसके साथ ही उन्होंने कानपुर की मेयर प्रमिला पांडे और नगर निगम के अन्य प्रशासनिक अमले को भी आड़े हाथों लिया। उनका कहना था कि बेहतर जलनिकासी व्यवस्था सुनिश्चित करने के तमाम दावे खोखले साबित हो रहे हैं। नालों की सफाई और सड़क के स्तर को सुधारने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी समीक्षा की सख्त आवश्यकता है।

आंदोलन तेज करने की चेतावनी

प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जलभराव की इस समस्या का शीघ्र और स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे अपने इस आंदोलन को और अधिक उग्र करेंगे। हालांकि यह नाव चलाने का प्रदर्शन एक प्रतीकात्मक विरोध था, लेकिन इसने शहर की लचर जलनिकासी व्यवस्था और बारिश के दौरान सामने आने वाली वास्तविक कठिनाइयों को खुलकर उजागर कर दिया है।

सवाल-जवाब

कानपुर में कांग्रेस नेताओं ने किस अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन किया?
कांग्रेस नेताओं ने कानपुर के गोविंद नगर इलाके में जलभराव से भरी सड़क पर नाव चलाकर विरोध प्रदर्शन किया।
इस प्रदर्शन में किन कांग्रेस नेताओं ने हिस्सा लिया?
इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता विकास अवस्थी और प्रभाकर पांडे शामिल थे।
गोविंद नगर में जलभराव की समस्या कितने समय से बनी हुई है?
गोविंद नगर इलाके में जलभराव की यह समस्या पिछले करीब दस वर्षों से बनी हुई है।
कानपुर के किस नगर आयुक्त से जुड़ा मामला चर्चा में रहा?
कानपुर नगर आयुक्त को हाल ही में कार्यों में लापरवाही को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा फटकार लगाई गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Tanvi Desai@tanvi-desai·17 दिन पहले

कानपुर के गोविंद नगर का यह जलभराव संकट अब केवल स्थानीय प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल और सोशल मीडिया के इस दौर में यह विजुअल सामग्री सीधे तौर पर शहर की 'स्मार्ट सिटी' छवि को राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल कर रही है। जब इस तरह के विरोध प्रदर्शनों के वीडियो वायरल होते हैं, तो यह वैश्विक मंच पर और ओटीटी या डिजिटल न्यूज़ फीड्स में उत्तर प्रदेश के शहरी बुनियादी ढांचे के दावों पर बड़ा सवालिया निशान खड़े करते हैं। यदि नगर निगम ने जल निकासी के स्थायी समाधान के लिए तुरंत कदम नहीं उठाए, तो यह मुद्दा डिजिटल माध्यमों से सोशल मीडिया पर और अधिक आक्रामक रूप ले सकता है, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर जनता का दबाव और तीव्र हो जाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

कानपुर के गोविंद नगर में एक दशक से जलभराव का यह संकट केवल एक मौसमी परेशानी नहीं, बल्कि शहरी नियोजन और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ा सवालिया निशान है। हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा नगर आयुक्त को लगाई गई फटकार के बाद भी जमीनी स्तर पर सुधार न होना यह दर्शाता है कि विभागीय समन्वय और ड्रेनेज मास्टर प्लान कागजों तक सीमित हैं। यदि समय रहते जल निकासी के स्थायी उपाय नहीं किए गए, तो यह आक्रोश आगामी स्थानीय चुनावों और राजनीतिक समीकरणों में शासन विरोधी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।

Ananya Iyer@ananya-iyer·18 दिन पहले

रोहन वर्मा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मौसमी संकट अब सिर्फ प्रशासनिक नाकामी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह डिजिटल युग में पॉप कल्चर और सोशल मीडिया पर एक वायरल मीम बन चुका है। जब मुख्य सड़कों पर नाव चलाना पड़ता है, तो स्मार्ट सिटी के विज्ञापनों का खोखलापन ट्रेंड करने लगता है। यदि नगर निगम ने इस जनरैतिक रोष पर तुरंत कदम नहीं उठाए, तो यह दृश्य सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और आम जनता के बीच एक बड़ा राजनीतिक और सांस्कृतिक विमर्श बन जाएगा, जिससे शहर की छवि को गहरा आघात पहुंचेगा।

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

कानपुर के गोविंद नगर में जलभराव के कारण होने वाला वित्तीय नुकसान सिर्फ स्थानीय व्यापारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र के आर्थिक चक्र को भी बाधित करता है। जब बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमियों के चलते व्यापारिक गतिविधियां घंटों ठप रहती हैं और दुकानदारों को लगातार घाटा उठाना पड़ता है, तो इससे शहरी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर और स्थानीय बाज़ार का कॉन्फिडेंस दोनों कमज़ोर होते हैं। स्मार्ट सिटी के दावों और ज़मीनी हक़ीक़त के बीच का यह अंतर निवेशक भावना पर भी असर डालता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

कानपुर के गोविंद नगर में एक दशक से बनी यह जलभराव की समस्या महज प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नागरिकों के बुनियादी अधिकारों और सार्वजनिक सुरक्षा का खुला उल्लंघन है। जब मुख्य सड़कों पर घंटों पानी जमा रहता है और जल निकासी के लिए चार से पांच घंटे का इंतजार करना पड़ता है, तो यह कानून-व्यवस्था और नगर निगम की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। यदि इस मामले में तुरंत कोई पुख्ता और स्थायी कानूनी या प्रशासनिक कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति नागरिकों के आक्रोश को और भड़का सकती है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का अंदेशा भी बढ़ जाता है।

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