सियासी मोर्चे पर विपक्षी दलों के आक्रामक रुख का जवाब देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जमीनी स्तर पर व्यापक जनसंपर्क और विरोध कार्यक्रमों की योजना बनाई है। विपक्षी मोर्चे की बैठकों तथा रैलियों के प्रत्युत्तर में सत्ताधारी दल राष्ट्रीय स्तर पर अपनी ताकत दिखाने जा रहा है। इस रणनीति के तहत राष्ट्रीय राजधानी में सन 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों को साथ लेकर पार्टी सड़क पर उतर रही है, जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा के रोहतक में संगठन का शीर्ष नेतृत्व विशाल पैदल मार्च की कमान संभालेगा।
राष्ट्रीय राजधानी में 1984 के पीड़ितों के हक की आवाज
राजधानी के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज करते हुए भाजपा नेताओं ने 1984 के दंगों के भुक्तभोगियों के परिजनों के साथ एकजुटता जाहिर करने का फैसला किया है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की अगुवाई में पार्टी के कई वरिष्ठ चेहरे इस विरोध मार्च में कदमताल करते दिखाई देंगे। आयोजकों का उद्देश्य इन दंगों के अनसुलझे दर्द और कांग्रेस शासनकाल के दौरान हुए घटनाक्रमों को जनता के बीच दोबारा रेखांकित करना है, जिससे विपक्षी मोर्चे के राजनीतिक हमलों की धार कुंद की जा सके।
हरियाणा के रोहतक में शीर्ष नेतृत्व का जमावड़ा
राजधानी से सटे हरियाणा में भी चुनावी और संगठनात्मक सरगर्मियां चरम पर हैं। रोहतक शहर में पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व सीधे सड़क पर उतर रहा है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतिन नबीन और प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी इस विशाल पैदल मार्च का मुख्य आकर्षण होंगे। आसपास के करीब 12 जिलों से आए पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भागीदारी से इस आयोजन को एक बड़े शक्ति प्रदर्शन में बदलने की तैयारी की गई है।
छोटू राम पॉलिटेक्निक से डी पार्क तक का तय रूट
प्रशासनिक स्तर पर इस विशाल भीड़ को संभालने के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। तय कार्यक्रम के मुताबिक, यह पैदल यात्रा सुबह 11:00 बजे रोहतक स्थित छोटू राम पॉलिटेक्निक ग्राउंड से शुरू होकर दिल्ली रोड पर जाट कॉलेज संस्था से होते हुए मॉडल टाउन के डी पार्क बापू पार्क तक पहुंचेगी। स्थानीय पुलिस ने आम जनता की सहूलियत को देखते हुए इलाके के कई प्रमुख रास्तों पर वाहनों का रूट डायवर्ट किया है। मार्च के अंतिम पड़ाव पर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी पार्क में पहुंचकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।
अराजकता के आरोपों के खिलाफ देशव्यापी मुहिम
दरअसल, विपक्षी खेमे की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग और वोट चोरी को लेकर लगातार उठाए जा रहे सवालों का मुकाबला करने के लिए भाजपा ने यह पूरा खाका खींचा है। पार्टी इस अभियान को लोकतंत्र की रक्षा और व्यवस्था को अस्थिर करने की कथित साजिशों को विफल करने के प्रयास के रूप में पेश कर रही है। देश के विभिन्न हिस्सों में चलाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क कार्यक्रम के माध्यम से कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरना और विपक्ष के नैरेटिव को बेअसर करना ही पार्टी की प्रमुख रणनीति है।



















