राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक और भारतीय जनता पार्टी के बीच चुनावी निष्पक्षता को लेकर राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर विपक्षी सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक मॉक पार्लियामेंट आयोजित करके प्रतीकात्मक महाभियोग पेश किया। विपक्षी दलों के इस सांकेतिक प्रदर्शन के जवाब में भाजपा ने तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कांग्रेस के आरोपों को खारिज किया और पलटवार करते हुए देश के पहले प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप जड़े।
संबित पात्रा का कांग्रेस पर तंज और ऐतिहासिक आरोप
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने मीडिया को संबोधित करते हुए विपक्षी दलों के इस आयोजन को लोकतंत्र के साथ किया जाने वाला भद्दा मजाक करार दिया। पात्रा ने कहा कि वास्तविक संसद में विपक्षी सांसद सोने, आंख मारने और सदन के सामान्य कामकाज को बाधित करने का काम करते हैं। जब कांग्रेस अध्यक्ष ने वोट चोरी का मुद्दा उठाया, तो उन्होंने जवाब देते हुए कहा कि देश के इतिहास में पहली वोट चोरी पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा की गई थी।
संबित पात्रा ने अपने वक्तव्य में आरोप लगाते हुए कहा,
"पंडित नेहरू वोट चोरी करके प्रधानमंत्री बने थे।"उन्होंने विस्तार से दावा किया कि कांग्रेस नेता सरदार वल्लभभाई पटेल को मिले समर्थन और वोटों की कथित रूप से चोरी करके पंडित नेहरू को सत्ता के शीर्ष पद पर बिठाया गया था। इसके साथ ही पात्रा ने कांग्रेस द्वारा देश में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावों पर सवाल उठाया और कहा कि यदि वास्तव में इतने बड़े पैमाने पर नागरिकों के मताधिकार छीने गए होते, तो वे 13 करोड़ लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतर चुके होते।
मॉक पार्लियामेंट में खरगे ने लगाए गंभीर आरोप
दूसरी तरफ, कांग्रेस के नेतृत्व में आयोजित पब्लिक इंपीचमेंट कार्यक्रम में विपक्षी गठबंधन के सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ औपचारिक रूप से प्रतीकात्मक महाभियोग का प्रस्ताव रखा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस दौरान स्पष्ट किया कि विपक्ष का मुख्य चुनाव आयुक्त से कोई व्यक्तिगत विरोध या बैर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी कवायद केवल इसलिए की जा रही है ताकि निर्वाचन आयोग अपनी संवैधानिक मर्यादा में रहकर पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से काम करे। खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र की सत्ताधारी सरकार चुनाव प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करने और सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए सुनियोजित साजिश रच रही है।
चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून और मतदाता सूची पर विवाद
मल्लिकार्जुन खरगे ने वर्ष 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून को संसद में मनमाने ढंग से पारित कराया गया था, जिसके माध्यम से संवैधानिक स्वायत्तता को कमजोर किया गया। खरगे के मुताबिक, इसी कानूनी बदलाव के सहारे चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और वोट चोरी की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि जब वोट चोरी का मामला पकड़ा गया, तब जाकर मतदाता सूचियों के एसआईआर की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की गई।
कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विपक्ष की यह लड़ाई मतदाता सूची में अपात्र या बाहरी लोगों के नाम शामिल कराने की नहीं है, बल्कि देश के वास्तविक और पात्र मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने की है। खरगे ने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता और जनता का विश्वास सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि सरकार जैसी संस्थाओं द्वारा चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करना लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा आघात है, और विपक्ष नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए बिना किसी समझौते के अपनी आवाज बुलंद करता रहेगा।



















