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वंदे मातरम पर कांग्रेस के प्रस्ताव को अमित शाह ने बताया तुष्टिकरण, बोले आजादी के दीवानों का अपमान किया गयाराजनीति
20 अग॰ 2026, 12:59 pm (68 दिन पहले)· 1

वंदे मातरम पर कांग्रेस के प्रस्ताव को अमित शाह ने बताया तुष्टिकरण, बोले आजादी के दीवानों का अपमान किया गया

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में अमित शाह ने कांग्रेस पर वंदे मातरम को दो हिस्सों में बांटने और तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि 1937 की नीति से देश का विभाजन हुआ था।

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में गुरुवार को आयोजित एक जनसभा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम के गायन से जुड़े कांग्रेस वर्किंग कमिटी के ताजा प्रस्ताव पर जोरदार हमला बोला। गृह मंत्री ने विपक्षी दल के इस फैसले को सीधे तौर पर देश-विरोधी करार दिया और आरोप लगाया कि पार्टी राजनीतिक लाभ के लिए एक बार फिर तुष्टिकरण का रास्ता अपना रही है।

1937 का प्रस्ताव और विभाजन की पृष्ठभूमि

अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी ने अपने वर्ष 1937 के पुराने प्रस्ताव को आधार बनाकर राष्ट्रगीत वंदे मातरम के केवल दो पद ही गाने का निर्णय लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 1937 के दौर में भी विशेष वर्ग को खुश करने की नीयत से वंदे मातरम को बांटने की पहल की गई थी। गृह मंत्री के अनुसार, इतिहास में उठाए गए उसी कदम ने आगे चलकर देश के विभाजन की नींव रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत पहले भी राष्ट्रीय प्रतीक को दो हिस्सों में बांटने की बड़ी भूल कर चुका है और पूरा देश उसके दुष्परिणाम भुगत चुका है।

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स्वतंत्रता सेनानियों और रचयिता का अपमान

संसदीय व्यवस्था और कानूनी ढांचे का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने देश की अखंडता को मजबूती देने के उद्देश्य से पुरानी गलती को सुधारा और राष्ट्रगीत को कानूनी आधार भी प्रदान किया। उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस एक तरफ संसद द्वारा पारित कानूनों को मानने से इंकार करती है, तो दूसरी तरफ अपने 1937 के फैसले को जबरन लागू करने में लगी है। गृह मंत्री ने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस अमर रचना को अधूरा गाना न सिर्फ इसके महान रचयिता का अनादर है, बल्कि आजादी की लड़ाई में अपने प्राण न्योछावर करने वाले लाखों स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान का भी अपमान है।

तुष्टिकरण के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

विपक्षी नेतृत्व को निशाने पर लेते हुए अमित शाह ने कहा कि राहुल गांधी की अगुवाई में कांग्रेस एक बार फिर देश को विभाजनकारी नीतियों की ओर ढकेल रही है। पूर्व की घटनाओं का स्मरण कराते हुए शाह ने कहा, "देश एक बार वंदे मातरम को दो हिस्सों में बंटने देने की गलती कर चुका है और हमने इसके नतीजे भुगते हैं।" उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस के इस कदम की पुरजोर निंदा करती है और देश में तुष्टिकरण की राजनीति को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने आम जनता से कांग्रेस के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होने की अपील की।

सवाल-जवाब

अमित शाह ने वंदे मातरम को लेकर बयान कहां दिया?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने यह बयान गुरुवार को तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दिया।
कांग्रेस वर्किंग कमिटी के प्रस्ताव पर क्या आरोप लगाया गया है?
अमित शाह ने आरोप लगाया कि कांग्रेस वर्किंग कमिटी द्वारा वंदे मातरम के केवल दो पद गाने का फैसला तुष्टिकरण की राजनीति से प्रेरित है।
1937 के प्रस्ताव का क्या संदर्भ दिया गया है?
अमित शाह के मुताबिक, 1937 में वंदे मातरम को बांटने का फैसला किया गया था, जिसने आगे चलकर देश के विभाजन की नींव रखी।
नरेंद्र मोदी सरकार के किस कदम का जिक्र किया गया है?
अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार ने पुरानी गलती को सुधारकर राष्ट्रगीत को कानूनी आधार दिया और राष्ट्रीय एकता को मजबूत किया।
राष्ट्रगीत को अधूरा गाने पर क्या टिप्पणी की गई?
गृह मंत्री ने कहा कि इसे अधूरा गाना इसके रचयिता बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय और लाखों स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान है।
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