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कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक और वंदे मातरम पर छिड़ी नई बहस, शो में उठी रणनीति पर सवालराजनीति
9 सित॰ 2026, 10:01 pm (47 दिन पहले)· 3

कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक और वंदे मातरम पर छिड़ी नई बहस, शो में उठी रणनीति पर सवाल

‘कॉफी पर कुरुक्षेत्र’ शो के दौरान कांग्रेस की राजनीतिक चालों, वंदे मातरम पर उसके रुख और उत्तर प्रदेश चुनावों को लेकर गंभीर चर्चा हुई। पैनलिस्टों ने राहुल गांधी की कार्यशैली और विपक्षी दलों पर पड़ने वाले असर का विश्लेषण किया।

भारतीय सियासत में अल्पसंख्यक मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कांग्रेस पार्टी की कोशिशों ने एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है। इस अहम विषय पर चर्चा विशेष टीवी कार्यक्रम के दौरान हुई, जिसमें देश के जाने-माने पत्रकारों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान एंकर के साथ चर्चा में बैठे मेहमानों ने राहुल गांधी के चुनावी तौर-तरीकों और पार्टी के सियासी सफर पर कई तीखे सवाल उठाए। वक्ताओं के बीच मुख्य रूप से यह बात उठी कि क्या कांग्रेस का यह दांव केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित है या इसके तार आगामी लोकसभा चुनाव से जुड़े हैं।

वंदे मातरम पर रुख को लेकर बहस

इस सियासी विमर्श के दौरान राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के मौजूदा रुख पर भी लंबी बात हुई। कश्मीर की एक घटना का हवाला दिया गया, जहां उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला और उनके मंत्रिमंडल की मौजूदगी में राष्ट्रगान और वंदे मातरम का गायन हुआ था। इसके बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता केसी वेणुगोपाल के उस तर्क पर सवाल खड़े किए गए जिसमें उन्होंने पूरा वंदे मातरम न गाने की बात कही थी। उस स्पष्टीकरण के मुताबिक, गीत का पूरा रूप देश के धर्मनिरपेक्ष और बहुलतावादी ताने-बाने से मेल नहीं खाता है और केवल वही हिस्सा गाया जाना चाहिए जिसे स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वीकार किया था।

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चर्चा को आगे बढ़ाते हुए मेहमानों ने कांग्रेस के पुराने सियासी फैसलों और मौजूदा नेतृत्व की सोच के बीच की कड़ी को टटोलने की कोशिश की। विश्लेषकों का मानना था कि पार्टी का यह रवैया एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए अल्पसंख्यक मतदाताओं को अपने साथ जोड़े रखने की पुरजोर कोशिश की जाती है। इस कड़ी में अतीत से लेकर वर्तमान तक के सियासी फैसलों का जिक्र करते हुए पार्टी की वैचारिक दिशा पर भी सवाल उठाए गए।

उत्तर प्रदेश का राजनीतिक गणित और क्षेत्रीय दल

उत्तर प्रदेश के आगामी सियासी समीकरणों पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने साफ कहा कि कांग्रेस का असली मुकाबला सिर्फ भारतीय जनता पार्टी से ही नहीं है, बल्कि उन प्रांतीय दलों से भी है जो लंबे वक्त से इस वोट बैंक पर काबिज रहे हैं। अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी समेत अन्य क्षेत्रीय संगठनों के लिए इसे खतरे की घंटी माना गया। यह तर्क रखा गया कि अगर कांग्रेस इस वर्ग को अपने पाले में लाने में कामयाब होती है, तो वह विपक्षी खेमे में खुद को मजबूत स्थिति में ला सकती है।

इसी सिलसिले में दलित और मुस्लिम गठजोड़ की राजनीति पर भी रोशनी डाली गई। राहुल गांधी द्वारा जय भीम का नारा लगाने और दलित समुदाय तक पहुंच बनाने के प्रयासों का जिक्र करते हुए यह अनुमान लगाया गया कि उत्तर प्रदेश की जमीन पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक रस्साकशी और ज्यादा तेज हो सकती है।

राहुल गांधी की शैली और वैचारिक विरोधाभास

पैनल चर्चा के दौरान राहुल गांधी के काम करने के तरीके और उनके सलाहकारों की भूमिका पर भी सवाल दागे गए। विश्लेषकों का आरोप था कि उनके आसपास के लोगों की विचारधारा पार्टी की नीति को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह भी कहा गया कि उनका राजनीतिक रुख अक्सर बदलता हुआ नजर आता है, जहां कभी धार्मिक प्रतीकों के साथ तस्वीरें सामने आती हैं, तो कभी अल्पसंख्यक और वामपंथी झुकाव वाली राजनीति दिखाई देती है।

कुल मिलाकर इस पूरी चर्चा का केंद्र बिंदु कांग्रेस की अल्पसंख्यक रणनीति, वंदे मातरम पर उसका नज़रिया और क्षेत्रीय दलों के साथ उसकी संभावित प्रतिद्वंद्विता रही। वक्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि क्या यह रणनीति पार्टी को संजीवनी देगी या फिर उसके अपने सहयोगी दलों के लिए मुश्किलें पैदा करेगी।

सवाल-जवाब

चर्चा के दौरान मुख्य रूप से किस मुद्दे पर बात हुई?
चर्चा मुख्य रूप से कांग्रेस की मुस्लिम वोट रणनीति और वंदे मातरम पर उसके रुख के इर्द-गिर्द घूमती रही।
वंदे मातरम को लेकर कांग्रेस के किस नेता के तर्क पर सवाल उठे?
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के इस तर्क पर सवाल उठे कि वंदे मातरम का पूरा संस्करण धर्मनिरपेक्ष चरित्र से मेल नहीं खाता।
उत्तर प्रदेश की राजनीति को लेकर चर्चा में क्या कहा गया?
कहा गया कि कांग्रेस का लक्ष्य केवल भाजपा से मुकाबला करना नहीं, बल्कि क्षेत्रीय दलों से मुस्लिम वोट वापस लेना भी है।
कार्यक्रम में कौन-कौन पत्रकार मौजूद थे?
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप सिंह, आलोक मेहता और अनंत विजय ने बतौर मेहमान हिस्सा लिया।
इस चर्चा का संचालन किसने किया?
इस चर्चा का संचालन एंकर और सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर सौरव शर्मा ने किया।
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