पश्चिम बंगाल की राजनीतिक जमीन पर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी भारतीय जनता पार्टी को एक नए आंतरिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। सत्ता हासिल करने के शुरुआती कुछ महीनों के भीतर ही पार्टी संगठन के भीतर भ्रष्टाचार और अनियमिताओं की शिकायतें खुलकर सामने आने लगी हैं। जिन मुद्दों को लेकर पार्टी लंबे समय से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को घेरती आई है, अब वही आरोप उसके अपने कार्यकर्ताओं पर लगना सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
जिला स्तर पर हुई कड़ी कार्रवाई
संगठन के भीतर बढ़ती अनुशासनहीनता से निपटने के लिए प्रदेश नेतृत्व ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। शुरुआती अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से लगभग 25 कार्यकर्ताओं को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किया जा चुका है। इसके साथ ही 300 से अधिक अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को आधिकारिक तौर पर कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी पर अवैध वसूली, भ्रष्टाचार के मामलों में संलिप्तता और पार्टी के नियमों के खिलाफ जाकर काम करने के गंभीर आरोप दर्ज हैं।
भीतरघात और पाला बदलने वालों की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम पर पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने अपनी बात रखते हुए स्वीकार किया कि जबरन वसूली की यह समस्या संगठन के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। उनका कहना था कि इस स्थिति के पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं, जिसमें संगठन के कुछ पुराने लोगों के साथ-साथ उन लोगों की संलिप्तता भी शामिल है जो हाल ही में तृणमूल कांग्रेस छोड़कर अनौपचारिक रूप से पार्टी में शामिल हुए थे और पुरानी कार्यशैली को छोड़ नहीं पाए हैं।
नेतृत्त्व की ओर से सख्त चेतावनी
पार्टी मुख्यालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अनुशासनहीनता के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। जिला स्तर के सभी प्रमुख पदाधिकारियों को इन गतिविधियों पर पूरी सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। पार्टी नेताओं का दोहराना है कि संगठन की वैचारिक स्पष्टता और अनुशासित नियमों से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और संगठन के संविधान के अनुसार उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रहेगी।



















