मुंबई की राजनीति और राष्ट्रीय परिदृश्य पर अपनी बेबाक टिप्पणियों के लिए जाने जाने वाले शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने उत्तराखंड के हल्द्वानी में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद उस मंच के कथित तौर पर हवन-पूजन कर शुद्धिकरण किए जाने की घटना को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। राउत का साफ कहना है कि यदि लोग इस तरह की हरकतों को अंजाम देते हैं, तो उनके विरुद्ध अत्याचार का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
मल्लिकार्जुन खरगे के मंच के शुद्धिकरण पर कड़ा रुख
संजय राउत ने मीडिया से चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया कि देश के भीतर आज भी दलितों पर जुल्म और अत्याचार की घटनाएं थम नहीं रही हैं और समाज के विभिन्न हिस्सों में जातिगत भेदभाव अब भी गहराई से मौजूद है। उन्होंने मल्लिकार्जुन खरगे को कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और एक अत्यंत वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि यदि भाजपा या उससे जुड़े लोग उस स्थान या मंच का शुद्धिकरण करते हैं जहां से उन्होंने जनता को संबोधित किया था, तो यह गंभीर मामला है और ऐसे तत्वों के खिलाफ अत्याचार निवारण कानून के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा कभी भी ऐसी परिस्थिति में खुद कोई मुकदमा दर्ज नहीं करेगी।
राहुल गांधी की मांग का समर्थन
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के उस बयान से जुड़ी है जिसमें उन्होंने हल्द्वानी की घटना को एक गंभीर अपराध और छुआछूत का रूप करार दिया था। राहुल गांधी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए दोषियों के खिलाफ तत्काल एससी/एसटी एक्ट के अंतर्गत एफआईआर दर्ज करने की पुरजोर मांग उठाई है, जिसका समर्थन अब विपक्षी खेमे के अन्य नेताओं द्वारा भी किया जा रहा है।
मोहन भागवत के न्यूयॉर्क वाले बयान पर प्रतिक्रिया
संजय राउत ने सिर्फ घरेलू राजनीतिक मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत द्वारा हाल ही में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में दिए गए एक बयान पर भी खुलकर अपनी बात रखी। मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क के 'वन वर्ल्ड, वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम के दौरान 30 देशों से आए 180 से अधिक प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए मुसलमानों के प्रति संघ के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया था। वहां उन्होंने वर्ष 2018 में दिल्ली में मुस्लिम प्रतिभागियों के साथ हुई अपनी बातचीत का हवाला देते हुए दो टूक कहा था कि जो शख्स मुसलमानों से नफरत करता है या यह इच्छा रखता है कि मुसलमानों को देश से बाहर निकाल दिया जाए, वह सच्चा हिंदू हो ही नहीं सकता। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई खुद को हिंदू कहलाना चाहता है, तो उसे यह स्वीकार करना होगा कि तमाम रास्ते एक ही मंजिल की तरफ जाते हैं और हर इंसान की अपनी गरिमा होती है, जहां इंसानों के बीच कोई भेद नहीं किया जा सकता।
भारत में भी ऐसा संदेश देने की सलाह
आरएसएस प्रमुख के इस अमेरिकी बयान का स्वागत करते हुए संजय राउत ने तंज कसा कि मोहन भागवत को इसी तरह की सीख और ऐसा ही वैचारिक संदेश भारत की धरती पर भी देना चाहिए। उन्होंने मांग की कि भागवत को यह बात अपने संगठन के उन लोगों को समझानी चाहिए जो इस वक्त दिल्ली और उत्तर प्रदेश की सत्ता में काबिज हैं, या फिर महाराष्ट्र में उनकी पार्टी में बाहर से शामिल किए जाते हैं और इस तरह के भड़काऊ बयान देते रहते हैं। राउत ने सुझाव दिया कि संघ प्रमुख को ऐसे लोगों को शिक्षित करने के लिए विशेष वैचारिक और चिंतन सत्र आयोजित करने चाहिए ताकि देश की सामाजिक समरसता बनी रहे।



















