चेन्नई की राजनीति में इन दिनों एक नया बवंडर उठा हुआ है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को देश के सर्वोच्च पद यानी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर प्रोजेक्ट करने वाले अभियानों के कारण सत्ताधारी पार्टी 'तमिलगा वेट्री कझगम' (टीवीके) और उसकी सहयोगी कांग्रेस पार्टी के बीच वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद की कुर्सी के लिए आगे बढ़ाने वाले तमाम पोस्टरों, होर्डिंग्स और डिजिटल वीडियो को लेकर अंदरखाने काफी असहज महसूस कर रहा है। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कैंपेन मुख्य रूप से सी. जोसेफ विजय के उत्साही समर्थकों के एक खास गुट द्वारा पार्टी संगठन और नेतृत्व पर अपनी पसंद का दबाव बनाने के लिए शुरू किया गया है, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम कांग्रेस पार्टी को चिंतित कर रहे हैं। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को इस बात का गहरा डर सता रहा है कि इस तरह के प्रचार से राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के राजनीतिक रुख और इंडिया गठबंधन की छवि को लेकर मतदाताओं के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है, जिससे विपक्षी एकता को नुकसान पहुंच सकता है।
विधानसभा से लेकर सड़कों तक शुरू हुआ प्रचार और उत्तर भारत में गूंज
इस पूरी राजनीतिक बहस और सुगबुगाहट की शुरुआत तब हुई जब टीवीके के विधायकों और मंत्रियों ने राज्य की विधानसभा के भीतर लगातार और बार-बार सी. जोसेफ विजय की तारीफों के पुल बांधने शुरू कर दिए। देखते ही देखते यह बात सदन की चार दीवारों तक सीमित नहीं रही और तेजी से बाहर की दुनिया में फैल गई। सार्वजनिक स्थलों, चौराहों और दीवारों पर सी. जोसेफ विजय को देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में चित्रित करने वाले पोस्टर और बैनर धड़ल्ले से लगाए जाने लगे। हैरानी की बात यह है कि इस तरह का प्रचार सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर भारत के कई इलाकों से भी ऐसे प्रचार वाले वीडियो और सोशल मीडिया रील्स सामने आने लगे हैं। उत्तर भारत के इन राज्यों में कांग्रेस पार्टी खुद को भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मुख्य और सबसे बड़ी विपक्षी ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश में जुटी हुई है, ऐसे में वहां सी. जोसेफ विजय के पक्ष में इस तरह का कैंपेन चलना कांग्रेस के रणनीतिकारों के लिए एक असहज स्थिति पैदा कर रहा है।
सर्वे के आंकड़ों ने बढ़ाई बेचैनी और डीएमके गठबंधन टूटने की पृष्ठभूमि
एक प्रमुख टीवी चैनल द्वारा हाल ही में कराए गए एक ओपिनियन सर्वे के नतीजों के बाद इस पूरे कैंपेन पर अचानक से लोगों का ध्यान केंद्रित हो गया। उस सर्वे में देश के प्रधानमंत्री पद के संभावित और लोकप्रिय उम्मीदवारों की सूची में सी. जोसेफ विजय को 9 प्रतिशत जनता का समर्थन मिला था, जिसके आधार पर उन्हें सूची में तीसरा स्थान हासिल हुआ था। हालांकि वे इस पायदान पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी से थोड़े पीछे जरूर थे, लेकिन जैसे ही यह आंकड़ा सामने आया, कांग्रेस के भीतर की बेचैनी कई गुना बढ़ गई। पार्टी के भीतरूनी सूत्रों से मिल रही जानकारियों के मुताबिक, कांग्रेस नेता इस बात से खासे नाखुश नजर आ रहे थे कि तमिलनाडु में टीवीके और कांग्रेस के बीच गठबंधन की सरकार बने हुए अभी कुछ ही महीने बीते हैं और इतनी जल्दी सी. जोसेफ विजय को सीधे देश के सबसे बड़े पद के लिए प्रोजेक्ट किया जाने लगा है। इस सिलसिले में नेताओं ने तमिलनाडु कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मणिकम टैगोर की हालिया तीखी आलोचना का भी खुलकर हवाला दिया, जिसमें उन्होंने राज्य के मंत्रियों द्वारा 'फैन वाली मानसिकता' दिखाने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। कांग्रेस पार्टी के लिए यह पूरा घटनाक्रम बेहद संवेदनशील मोड़ पर आया है, क्योंकि टीवीके के साथ हाथ मिलाने से पहले उसने द्रमुक के साथ अपने पुराने गठबंधन को पूरी तरह खत्म कर दिया था, और उसी द्रमुक ने पहले राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के आधिकारिक उम्मीदवार के तौर पर अपना खुला समर्थन देने की घोषणा की थी।
नेताओं के तीखे बयान और भविष्य की राजनीतिक उथल-पुथल
बढ़ते विवाद के बीच कांग्रेस सांसद जोथिमानि ने हाल ही में एक बयान देते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को इस तरह आगे बढ़ाए जाने को मात्र एक चुनावी रणनीति करार दिया, लेकिन साथ ही उन्होंने इस बात पर भी बहुत जोर दिया कि मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार का कड़ा मुकाबला करने और उसे चुनावी मैदान में हराने के मामले में राहुल गांधी का आज की तारीख में कोई मुकाबला नहीं है। वहीं दूसरी ओर, जब शनिवार को मदुरै शहर में हुए एक विवादित घटनाक्रम के बारे में राज्य सरकार के मंत्री निर्मल कुमार से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि पूरे देश भर के लोगों को सी. जोसेफ विजय से बहुत सारी उम्मीदें जुड़ी हुई हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भविष्य में राज्य और देश के राजनीतिक हालातों का बारीकी से आकलन करने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेंगे, और इस बात पर जोर दिया कि फिलहाल इस विषय पर सार्वजनिक चर्चा करने की कोई खास जरूरत नहीं है।
शुरुआती राजनीतिक रणनीति के तहत कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व राहुल गांधी को पूरे विपक्षी गठबंधन के एकमात्र राष्ट्रीय चेहरे के तौर पर देश के सामने पेश करना चाहता था, और इसके साथ ही दक्षिण भारत के महत्वपूर्ण राज्यों में गठबंधन की चुनावी संभावनाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की विशाल व्यक्तिगत लोकप्रियता का पूरा फायदा उठाना चाहता था। हालांकि, जमीन पर अचानक से सी. जोसेफ विजय को प्रधानमंत्री पद की रेस में आगे करने की मची इस होड़ ने कांग्रेस की उस सोची-समझी रणनीति को कागजों पर ही उलझा कर रख दिया है। इस पूरे घटनाक्रम ने भविष्य के राजनीतिक संदेश, पार्टी के नेतृत्व की प्राथमिकताओं और सबसे बढ़कर विपक्षी दलों के बीच आपसी राजनीतिक एकजुटता को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आने वाले समय में दोनों दलों को तलाशना होगा।



















